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दिव्या ककरन: “दिल्ली सरकार साथ देती तो कांस्य के जगह गोल्ड ले कर आती”

Kumar Vibhanshu

September 9, 2018

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एशियाई खेलों में भारत का प्रतिनिधित्व करने वाली और कांस्य पदक विजेता दिव्या ककरन ने अरविंद केजरीवाल की अगुआई वाली दिल्ली सरकार पर कुश्ती प्रतियोगिता की तैयारी के दौरान उसे कोई मदद नहीं देने का आरोप लगाया है।

दिल्ली में आयोजित एक समारोह के दौरान, दिव्या ककरन ने केजरीवाल और अन्य सरकारी अधिकारियों के सामने खुल कर अपनी भड़ास निकाली। उन्होंने कहा कि “मैंने इस साल की शुरुआत में राष्ट्रमंडल खेलों (गोल्ड कोस्ट, ऑस्ट्रेलिया में) में एक पदक जीता था और आपने मुझे विश्वास दिलाया था कि मुझे आगे बढ़ने में और मदद मिलेगी।” डीएनए की रिपोर्ट के मुताबिक, ककरन ने बताया कि “मेरे फोन कॉल का जवाब भी नहीं दिया गया था।” उन्होंने कहा कि विजेताओं को सम्मानित करने के बजाय अगर सरकार ने सही समय पर पर्याप्त मदद प्रदान किया होता, तो वह और अन्य एथलीटों ने स्वर्ण जीता होता। उन्होंने आगे कहा, “आप आज हमें सम्मानित कर रहे हैं लेकिन कृपया गरीब बच्चों के बारे में भी सोचें जो एथलीट बनने की इच्छा रखते हैं। आप आज हमें बधाई देने के लिए इकट्ठा हुए हैं, लेकिन जब हमें इसकी आवश्यकता होती है तब कोई समर्थन नहीं दिया जाता है। “

कुश्ती चैंपियन दिव्या ककरन दिल्ली के गोकुलपुर में कम आय वाले परिवार से आती है। दिव्य के पिता “लंगोट” बेचकर अपने बेटी के सपने को साकार करने की कोशिश कर रहे हैं – और उनके पिता कथित तौर पर, बेटी के राष्ट्रीय प्रतियोगिता जीतने के दौरान भी  स्टेडियम के बाहर लंगोट बेच रहे थे। 20 वर्षीय ने एबीपी समाचार को बताया कि एशियाई खेलों की तैयारी करते समय, उन्होंने राज्य सरकार से मदद के लिए लगातार अनुरोध किया था लेकिन इसका कोई फायदा नहीं हुआ। वह निराश महसूस कर रही थी क्योंकि उनकी लिखित अपील को नजरअंदाज कर दिया गया था। उन्होंने कहा, “जब मैं एशियाई खेलों की तैयारी कर रही थी, तो हमने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से मदद के लिए संपर्क किया था, मैंने उन्हें अपनी वित्तीय स्थिति के बारे में बताया था, उन्होंने मुझे मदद का भी आश्वासन दिया लेकिन इसका कोई फायदा नहीं हुआ। आज तक, मुझे दिल्ली सरकार से कोई समर्थन नहीं मिला है। “

जब उन्हें दिल्ली सरकार से कोई मदद नहीं मिली, तो उन्होंने उत्तर प्रदेश राज्य टीम के लिए भाग लिया, जहां उन्होंने एशियाई खेलों 2018 के लिए क्वालीफाई किया। एबीपी न्यूज़ को से बात करते हुए उन्होनें बताया  “कई बार अभ्यास के बाद मेरी प्यास बुझाने के लिए पर्याप्त ग्लूकोज भी नहीं था, लेकिन मेरे अंदर कुछ बड़ा करने का दृढ़ संकल्प था इसलिए मैं पानी पीती और मैट पर वापस आ जाती।” चीनी ताइपे के चेन वेनलिंग को हराकर महिला कुश्ती में फ्रीस्टाइल 69 किलो स्पर्धा में कांस्य पदक जीतकर दिव्या ककरन ने अपना देश का नाम रोशन किया।

इस बीच प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी और अनिल कपूर जैसे कलाकारों ने दिव्या ककरन को उनकी जीत पर बधाई दी है, उत्तर प्रदेश सरकार ने उनकी उपलब्धि के लिए 20 लाख रुपये का नकद पुरस्कार घोषित किया है।

 

केजरीवाल अपनी सरकार का बचाव करते दिखे उन्होंने बताया कि एथलीटों के समर्थन में उन्होंने जो भी नीतियां तैयार की हैं, उन्हें बाधाओं का सामना करना पड़ा था, उच्च अधिकारी उसे एक न एक कारण से रोके हुए थे। उन्होंने कहा कि सिर्फ दिव्या  ही नहीं, बल्कि कई अन्य एथलीट उनसे सहायता के लिए आए थे, लेकिन वह उनकी मदद नहीं कर सके। उन्होंने कहा, “आज हम जो समारोह कर रहे हैं वह सर्वोच्च न्यायालय के हालिया फैसले की वजह से मुमक़िन हुआ है।”

तर्कसंगत का पक्ष


युवा एथलीट आगे आ रहे हैं और अपनी बात को सबके सामने रख रहे हैं यह एक सही दिशा में जाता हुआ बदलाव है। सरकार को एथलीटों का सही से ध्यान न देने के लिए जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए। दशकों से, भारतीय एथलीटों को उनके अंतर्राष्ट्रीय एथलीटों  की तरह उचित मान,सम्मान, सुविधा नहीं मिल रही है। अब समय आ गया है की सरकार इस बात को समझ ले कि उनका विश्वास बढ़ाने से और ज़रूरी सुविधा देने से वह भारत का नाम और रोशन कर सकते हैं।

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