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दिल्ली: डीएलएफ आवासीय परिसर के सेप्टिक टैंक में ज़बरन उतारे गए पाँच मजदूर ज़हरीली गैस से मारे गए

Kumar Vibhanshu

September 11, 2018

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रविवार को, एक सेप्टिक टैंक की सफाई करते समय जहरीले गैसों में सांस लेने के बाद 18 से 30 वर्ष के आयु वर्ग के पांच पुरुष मारे गए। यह घटना पश्चिम दिल्ली के मोती नगर में एक आवासीय परिसर में हुई थी। चार मौके पर मारे गए और इलाज के दौरान एक की मौत हो गई।

यह घटना दोपहर 3:30 बजे हुई, जब पांच पुरुष- विशाल, उमेश, राजा, पंकज और सरफराज, जो जेएलएल नामक कंपनी में कॉन्ट्रैक्ट पर, मजदूरों के रूप में काम करते थे, उन्हें डीएलएफ कैपिटल ग्रीन्स आवासीय के ‘पी’ टावर के सेप्टिक टैंक में जबरन भेजा गया।
पुलिस ने कहा, प्रारंभिक जांच के अनुसार पांच पुरुष बिना किसी सुरक्षा गियर के 30 फीट गहरे सीवर टैंक के अंदर गए थे।



“उन्हें अंदर जाने के लिए मजबूर किया गया”


मृतकों के अन्य सहकर्मियों ने आरोप लगाया कि पुरुषों को “हाउसकीपिंग” के रूप में काम पर रखा गया था और सेप्टिक टैंक की सफाई उनके काम का हिस्सा नहीं थी। उन्होंने आगे दावा किया कि उनके सुपरवाइजर  ने उन्हें सेप्टिक टैंक को साफ करने की धमकी दी थी कि या तो वो लोग सेप्टिक टैंक में उतरें नहीं तो वे अपना काम खो देंगे। उनके सहयोगियों ने यह भी आरोप लगाया कि जब वे टैंक के अंदर जा रहे थे तब श्रमिकों को कोई बेल्ट या मास्क नहीं दिया गया था।
रिपोर्टों के मुताबिक, आग और आपातकालीन सेवाओं के कर्मियों ने टैंक से पांच लोगों को बाहर निकाला और जहरीले धुएं को सांस लेने के तुरंत बाद वह भी बीमार पड़ गए।



पुलिस की प्रतिक्रिया


द इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए, डीसीपी (पश्चिम) मोनिका भारद्वाज ने कहा कि दोपहर के अंत में, उन्हें आचार्य भिक्शु अस्पताल से फोन आया कि चार मजदूरों को साइट से अस्पताल ले जाया गया था। उन्होंने यह भी कहा कि पांचवां व्यक्ति विशाल अस्पताल ज़िंदा ले जाया गया था और उसे राम मनोहर लोहिया अस्पताल में भेजा गया था, जहां इलाज के दौरान उनकी मृत्यु हो गई थी।
उन्होंने कहा कि आईपीसी धारा 304-ए (लापरवाही से मौत के कारण) और अन्य वर्गों के तहत मामला दर्ज किया गया है, आगे की जांच चल रही है।
भारद्वाज ने द टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया, “हम ठेकेदार या उस व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई करेंगे जो उन्हें टैंक में जाने की इजाजत देता है।”



डीएलएफ का बयान

इस बीच, डीएलएफ ने एक बयान के साथ दावा किया है कि जेएलएल फर्म परिसर में सेवाएं प्रदान करने के लिए जिम्मेदार थी। उन्होंने आगे कहा कि “जेएलएल अपने उच्च गुणवत्ता वाले सुरक्षा मानकों और सेवा के लिए जाना जाता है, लेकिन वे अभी भी जेएलएल की विस्तृत रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं। हमें यकीन है कि जेएलएल दुर्भाग्यपूर्ण घटना के कारण प्रभावित परिवारों की देखभाल करने के लिए सभी उपाय करेगा। “हालांकि, इंडियन एक्सप्रेस  द्वारा रिपोर्ट किए गए जेएलएल से कोई भी प्रतिक्रिया नहीं आई थी।



गुस्साए प्रदर्शनकारि डीएलएफ परिसर के बाहर इकठ्ठा हुए


रविवार को लगभग रात 9 बजे, डीएलएफ कैपिटल ग्रीन्स कॉम्प्लेक्स के बाहर कम से कम 200 लोगों की भीड़ इकट्ठी हुई। गुस्से में भीड़ पांच पुरुषों की मौत के लिए कार्रवाई और जवाब की मांग कर रही थी।

19 वर्षीय सरफराज के पिता भीड़ में थे। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में मोहम्मद हैयुल ने कहा “मेरे एकमात्र पुत्र के पास टावर में एक हाउसकीपिंग नौकरी थी। ठेकेदार को जवाब देना होगा कि मेरा बेटा सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट में क्यों गया?”

विशाल (19) का परिवार राम मनोहर लोहिया अस्पताल में उनकी मृत्यु के बारे में दुखी था। परिवार ने बताया कि हाल ही में विशाल ने दिल्ली विश्वविद्यालय के ओपन लर्निंग स्कूल से स्नातक स्तर की पढ़ाई के लिए दाखिला लिया था।



तर्कसंगत का पक्ष


एक साल पहले, भारत की राजधानी दिल्ली शहर में तीन मैनुअल स्कवेंजर्स की मृत्यु हो गई थी और इसकी आलोचना भी हुई थी लेकिन हमने कोई सबक नहीं सीखा। इस बार पांच जिंदगी खो गईं और वह भी एक हाई  प्रोफ़ाइल आवासीय परिसर में। मजदूरों को सेप्टिक टैंक में नीचे जाने के लिए मजबूर किया गया और इंकार करने पर नौकरी से हटाने की धमकी दी गयी। वे सुरक्षा गियर के बिना सेप्टिक टैंक में उतरे थे। घटना पर डीएलएफ की टिप्पणी अपमानजनक है और अपनी जिम्मेदारी से मुंह मोड़ने के बराबर है। एक उचित जांच की बहुत आवश्यकता है और उनमें शामिल लोगों को कठोर दंड दे कर उदाहरण स्थापित करने की ज़रुरत है।

हमें चाहिए कि इस तरह से सर पर हमारा मैला ढोने का जो सिलसिला है, जो काम करवाने का ढंग है, उसे  अब जड़ से ख़त्म करें, इतने स्मार्ट फ़ोन, स्मार्ट टीवी, स्मार्ट सिटी बनाकर भी फायदा नहीं जब हम अपने ही लोगों को हमारा ही मैला ढोने के लिए मज़बूर करें, यह एक घिनौना अपराध है, हमें अपने सोसाइटी में इस तरह की प्रक्रिया पर नज़र रखनी चाहिए और इसका विरोध करना चाहिए, मास्क और सेफ्टी बेल्ट दे कर भी आप किसी और को अपना मैला सर पर उठाने के लिए सेप्टिक टैंक में कैसे ज़बरन भेज सकते हैं? हम यह उम्मीद करते हैं कि सरकार और समाज दोनों ही इस विषय पर जागरूक बनें, और इस जानलेवा सफाई के तरीके को रोक कर इसके बज़ाए सुरक्षित सफाई के तरीके खोजे जाएँ।  

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