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उप्र: दलित महिला द्वारा बनाये गए मिड डे मील का छात्रों ने किया बहिष्कार, 70 छात्रों का खाना हुआ बर्बाद

Kumar Vibhanshu

September 11, 2018

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उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले के पिसवान ब्लॉक में पलरिया गांव के प्राथमिक विद्यालय के कई छात्रों न कथित रूप सेे अपने स्कूल में मिड डे मील  का भोजन करने से इनकार कर दिया, क्योंकि इसे अनुसूचित जाति की महिला द्वारा पकाया गया था। रिपोर्ट के अनुसार, यहां तक ​​कि इन बच्चों के माता-पिता ने ‘निचली जाति’ की महिला से खाना पकवाने के लिए स्कूल अधिकारियों के खिलाफ विरोध किया।

 

घटनाक्रम 

7 सितंबर को, गांव में स्थित एक प्राथमिक विद्यालय में, रामदेवी को नियमित कुक के जगह पर खाना बनाने को कहा गया क्योंकि उस दिन कुक की छुट्टी थी।

नियमित कुक एक ऊपरी जाति, ‘यादव’ से संबंधित है। हालांकि, रामदेवी को शुक्रवार को खाना पकाने के लिए कहा गया था, जो आराख जाति से संबंधित है, जिसे अनुसूचित जाति के रूप में सूचीबद्ध किया गया है।

जब गांव में खबर फैल गई कि निचली जाति की महिला ने  बच्चों के लिए मिड डे मील का खाना बनाया है, तो कई माता-पिता स्कूल के सामने इकट्ठे हुए और विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। आखिरकार, स्कूल में नामांकित 76 छात्रों में से केवल छह छात्रों ने दोपहर का खाना खाया और शेष रोटि और आलू की करी को बाहर फेकना पड़ा।

जैसा कि फर्स्टपोस्ट द्वारा रिपोर्ट किया गया है, गांव में लगभग 50 परिवार रहते हैं- उनमें से अधिकांश यादव और ब्राह्मण हैं, जिन्हें ऊपरी जाति माना जाता है। कुछ अनुसूचित जाति परिवार भी गांव में रहते हैं। जैसा कि इस घटना से पता चलता है, जातिप्रथा पलहरिया गांव में एक गंभीर मुद्दा है।

 

अधिकारियों की प्रतिक्रिया

जैसा कि फर्स्टपोस्ट द्वारा रिपोर्ट किया गया था, स्कूल के प्रिंसिपल मनोज कुमार ने 101 रिपोर्टर्स से कहा कि उन्होंने स्कूल के बाहर विरोध करने वाले माता-पिता से बात करने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने कारण सुनने से इनकार कर दिया। माता-पिता वास्तव में स्थिति के बारे में गलत थे क्योंकि राम देवी को छात्रों के लिए केवल एक समय का खाना पकाने के रूप में रखा गया था। वह उस दिन नियमित खाना पकाने वाले के छुट्टी लेने के कारण उसके जगह खाना बनाने आई थी।

पूर्व आईपीएस अधिकारी और सामाजिक कार्यकर्ता एसआर दरपुरी ने इस घटना की निंदा की और पूछताछ की मांग की और कहा कि उसकी जाति के कारण कुक का बहिष्कार राज्य सरकार के आदेशों का प्रत्यक्ष उल्लंघन है। रिपोर्ट के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के अनुसार जाति आधारित भेदभाव की समस्या का समाधान करने के लिए स्कूलों में कुक के रूप में सामाजिक रूप से पिछड़े वर्गों से लोगों को रोजगार दिया जाना चाहिए।

दरपुरी ने आगे स्कूल के प्रिंसिपल और शिक्षकों की भूमिकाओं की जांच के लिए कहा क्योंकि इन बच्चों के दिमाग में इस तरह की भावना पैदा न हो यह देखना इनका कर्तव्य है।

रिपोर्ट के अनुसार, जिला मूल शिक्षा अधिकारी अजय कुमार ने इस घटना पर टिप्पणी करने से इंकार कर दिया। हालांकि, सीतापुर के महोली शहर के उप-मंडल मजिस्ट्रेट नीरज प्रसाद ने आश्वासन दिया कि एक जांच आयोजित की जा रही है। उन्होंने कहा कि अगर कुक ने शिकायत दर्ज कराने का फैसला किया है, तो प्रशासन दोषी पाए गए सभी लोगों के खिलाफ भी कार्रवाई करेगा।

 

र्तकसंगत का पक्ष

हमारी स्वतंत्रता के कुछ सालों बाद भी, हम समय-समय पर होने वाली इन घटनाओं को देखते हैं, जो हमारे देश में जाति भेदभाव की असली तस्वीर चित्रित करते हैं। यह घटना सामाजिक रूप से पिछड़ी जातियों के लोगों द्वारा सामना किए जाने वाले दिन-प्रतिदिन भेदभाव का परिणाम है। समानता, स्वतंत्रता, बंधुता और न्याय के मूल्य हमारे संविधान में निहित हैं और यह हमारे कर्तव्य है कि हम अपने बच्चों को भी सिखाएं। जहाँ एक तरफ लोगों को मेहनत कर के भी पेट भर खाना नहीं मिलता वहाँ इतने सारे लोगों का खाना बर्बाद कर दिया जाना बच्चों के द्वारा इस कारण से कि वह एक दलित ने बनाया है, यह हमारे आने वाली पीढ़ी में पनप रही भयंकर मानसिकता को दर्शाता है, इन्हीं कारणों से हम आज भी पिछड़े हैं और ऐसा रहा तो आगे भी पिछड़े रहेंगे, इस तरह की सोच पर अंकुश लगाना हम सब का कर्तव्य है।

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