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शिलांग : 36 वर्षीया वर्किंग मदर रेफिका बेकी पदे अल्ट्रा मैराथन रेस जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनी

Kumar Vibhanshu

September 12, 2018

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रविवार, 9 सितंबर को, शिलांग के 36 वर्षीय वर्किंग मदर रेफिका बेकी पदे , दुनिया के सबसे ऊँचे अल्ट्रा-मैराथन  खारदंग ला चैलेंज (72 किमी) में भाग ले कर दूसरे स्थान पर आने वाली पहली भारतीय महिला बन गईं।

जबकि मैराथन को सबसे कठिन और सबसे चुनौतीपूर्ण सहनशक्ति दौड़ में गिना जाता है, पदे  के लिए यह गर्व का क्षण था क्योंकि उसने बर्फबारी और ख़राब मौसम के बावजूद 12 घंटे 28 मिनट में मैराथन पूरा किया था।

पदे ने हाईलैंड पोस्ट में अपने अनुभव का वर्णन किया, और बताया कि  “ऑक्सीजन का स्तर 50 प्रतिशत से कम था और किसी व्यक्ति के लिए वहां जाना मुश्किल हो जाता है, भागना तो दूर की बात है”। “सड़कें  गीली और ख़राब थी, बर्फबारी थी, मैं भींग गयी थी और काँप रही थी, मेरे हाथ सुस्त हो गए थे।”

 

बेकी ने कहा कि हालांकि मौसम ने दौड़ के दौरान उनके विश्वास को हिला दिया था, लेकिन दौड़ने के लिए उनका जुनून कम नहीं हुआ। उन्होनें बताया कि  “एक समय पर मैंने सोचा कि मेरे हाथ कट कर गिर जाएंगे, लेकिन मैं सपोर्ट स्टाफ से जैकेट मिलने करने के बाद आत्मविश्वास हासिल करने में कामयाब रही।”

“मुझे पता था कि यह सबसे कठिन दौड़ थी क्योंकि 33 किमी खारदंग पॉइंट तक चढ़ाई थी । इसलिए मैंने मैराथन से कुछ महीने पहले हर दिन प्रैक्टिस किया क्योंकिदौड़ना  हमेशा मेरा जुनून रहा है, “पदे ने कहा।

इससे पहले2 सितंबर को पदे 21 किलोमीटर कारगिल इंटरनेशनल दौड़ी और उसमें प्रथम आयीं और 9 सितंबर लेह लद्दाख पूर्ण मैराथन 42 किमी में दूसरे स्थान पर रहीं।

 

 

यह उल्लेख किया जा सकता है कि खारदंग ला चैलेंज उन धावक के लिए सबसे कठिन और सहनशक्ति को चुनौती देता है जो अपनी क्षमता को बढ़ाना चाहते हैं। कठोर परिस्थितियां इसे बेहद कठिन बनाती हैं क्योंकि यहाँ धावकों को लगभग 60 किमी दौड़ 17,680 फ़ीट की चढ़ाई पर करनी पड़ती है।

पदे  ने कहा कि इस दौड़ ने उसे मजबूत बनाया है और वह अब पूरे देश में मैराथन में भाग लेगी। पदे  देश में कुछ महिला अल्ट्रा-मैराथन धावकों में से एक है। एक अल्ट्रा-धावक 50 किमी और उससे अधिक की दूरी को कवर करता है।

पदे  ने कहा “मैराथन एक मानसिक खेल है। अपने पैरों से पहले अपने दिमाग को प्रशिक्षित करें”।

 

तर्कसंगत इस उपलब्धि को प्राप्त करने के लिए रेफिका की सराहना करता है और उनके जुनून को सलाम करता है।

 

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