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कोलकाता की दिति लाहिरी ने अपनी जूनियर को किडनी दान की

Kumar Vibhanshu

September 13, 2018

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“यह खून नहीं है जो आपके परिवार को परिवार बनाता है, यह प्यार है” – यह वाक्य हमारे दैनिक जीवन में अधिकांश रिश्तों के लिए सच है। 40 वर्षीय दिती लाहिरी ने कोलकाता के फोर्टिस अस्पताल में जूनियर सहयोगी मार्शनील सिन्हा को अपनी किडनी दान की।

क्या हुआ?
मार्शल सिन्हा,  लगभग 40 चालीस साल की हैं जो किडनी की जानलेवा बिमारी से पिड़ीत थी। दोनों महिलाएं आईटी क्षेत्र में काम करती हैं। लाहिरी, सिन्हा की वरिष्ठ सहयोगी हैं।

द टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक, लाहिरी को पहली बार सिन्हा की हालत के बारे में पता चला जब वह बेंगलुरू में आईटीसी इन्फोटेक में एक प्रोजेक्ट कोऑर्डिनेटर के रूप में काम कर रही थीं। उन्हें पता चला कि सिन्हा किडनी के सिकुड़ने के किसीे रोग से पीड़ित है, जिसका मतलब है कि उसे नियमित डायलिसिस की आवश्यकता होती है।

वह अपनी हालत से जूझ रही थी और साथ ही साथ काम कर रही थी। समय बीतने के साथ, उसके किडनी के रोग ने उसे बैंगलोर में काम करने की इजाजत नहीं दी और वह वापस अपने शहर, बोकारो, झारखंड में चली गई। उसने बोकारो से काम करना जारी रखी।
तब लाहिरी को पता चला कि सिन्हा किडनी ट्रांसप्लांट के बिना जीवित नहीं रह सकती है।

माता-पिता गुर्दे दान नहीं कर सके

सिन्हा के माता-पिता स्वयं स्वास्थ्य समस्याओं से पीड़ित थे और इसलिए उन्हें अपने किडनी दान करने की इजाजत नहीं थी। उसकी बहन जल्द ही शादी करने वाली थी और दूल्हे के परिवार ने उसे किडनी दान करने की अनुमति नहीं दी थी।

लाहिरी ने अपने जूनियर के स्वास्थ्य को बारीकी से गौर किया और महसूस किया कि उसे मदद की बेहद ज़रूरत है। उसके बाद उन्होंने यूरोलॉजिस्ट शिबाजी बसु से सिन्हा के केस का  असेसमेंट करने के लिए कहा, डॉक्टर बसु लंबे समय से लाहिरी के पारिवारिक मित्र हैं। डॉक्टर ने यह भी कहा कि सिन्हा को किडनी की तत्काल आवश्यकता थी। एक समस्या उत्पन्न हुई की गैर-रिश्तेदारों को कई राज्यों में किडनी दान करने की अनुमति नहीं है। शुक्र है, पश्चिम बंगाल एक ऐसा राज्य है जो कि इस तरह किडनी ट्रांसप्लांट  की अनुमति देता है।

“मैंने अपने किडनी में से एक दान करने के लिए अपना मन बना लिया था क्योंकि मेरी मां कई वर्षों से एक किडनी पर स्वस्थ जीवन जी रही है। वह हम में से अधिकांश की तुलना में अधिक सक्रिय है। मैं अकेली हूँ और शायद यह मेरे लिए आसान बना दिया है। लाहिरी ने कहा, मेरे माता-पिता शुरुआत में आश्चर्यचकित थे लेकिन आखिरकार मेरे फैसले का समर्थन करने के लिए मान गए।

Last few days of been an emotional roller coaster with anxiety worry happiness pride joy, all at the same time… as my…

Geplaatst door Ena Sarkar op Zaterdag 8 september 2018

 

कानूनी परेशानी

लाहिरी और उनकी मां मोनीदीपा दोनों को नौ महीने की लंबी जांच प्रक्रिया से गुजरना पड़ा, जिसमें अलीपुर पुलिस कोर्ट में एक हलफनामा दाखिल करना और बाद में प्रथम श्रेणी के मजिस्ट्रेट का दौरा करना, ज़रूरी  दस्तावेज और विभिन्न पुलिस वेरिफिकेशन प्रस्तुत करना था। यह सब यह सुनिश्चित करने के लिए किया गया था कि ट्रांसप्लांट अपनी मर्ज़ी से ख़ुशी ख़ुशी किया जा रहा है न की पैसों की लालच में।

3 सितंबर को डॉ शिबाजी बसु द्वारा सफल ऑपरेशन के बाद, दोनों महिलाएं अब अच्छी हैं। तर्कसंगत अपनी जूनियर को किडनी दान करने के लिए सुश्री दीति लाहिरी की हिम्मत और दया की सराहना करता है। उनका यह कदम हमारे दिल को उजागर करता है और मानवता में विश्वास बहाल करता है।

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