सप्रेक

मजीज़िया बानो: केरल की उभरती पॉवरलिफ्टर, स्टीरियोटाइप सोच को बदल रहीं हैं

Kumar Vibhanshu

September 15, 2018

SHARES

दो साल पहले, मजीज़िया बानो केरल के कोझिकोड जिले में ऑरकेट्टेरी नाम के एक छोटे से शहर से साधारण डेंटल कॉलेज की छात्रा थी। आज, न केवल मजीज़िया एक स्थानीय सेलिब्रिटी बन गयी है, बल्कि कई रूढ़िवादी तरीकों को सफलतापूर्वक तोड़ दिया है जिनका उन्हें अधीन बनाया गया था।

केरल के एक छोटे से शहर से एक 23 वर्षीय महिला पावरलिफ्टिंग चैंपियन बन रही है, वह खुद में एक कठिन काम है। हिजाब (मुस्लिम हेडकार्फ) में रहते हुए पुरुषप्रधान इस खेल में पैठ बनाना मजीज़िया की उपलब्धियों को अनुकरणीय और प्रशंसनीय बनाता है। र्तकसंगत से बात करते हुए, मजीज़िया ने अपने जुनून और परिणामी अंदेशों के साथ आने वाली दो साल की लड़ाई का वर्णन किया।

एक छोटी उम्र से खेल में गहरी दिलचस्पी ले ली

बहुत ही कम आयु से, मजीज़िया को फिटनेस, एथलेटिक्स और खेल में रुचि है। क्षेत्र में उत्कृष्टता प्राप्त करने के जुनून ने मजीज़िया को हिम्मत दी और 2016 में, उसने अंततः पावरलिफ्टिंग की दुनिया में चलने का फैसला किया। उन्होनें कहा, “जिस गांव में मैं रहती हूँ वहाँ कोई सुविधा नहीं थी और मुझे फिटनेस में दिलचस्पी थी, मेरे माता-पिता अक्सर अन्य शहरों के बारे में पूछताछ करते रहते थे मैं जहाँ जाकर अपने सपनों को पूरा कर सकूँ।” मजीज़िया का परिवार हमेशा उनके साथ खड़ा था, जिसने उन्हें अपनी रुचियों का जानने और पाने के लिए प्रोत्साहित किया। “

अपने शहर में बुनियादी ढांचे की कमी ने भी मजीज़िया को अपने जुनून का पीछा करने से नहीं रोका सका। अपने सालाना गर्मी के छुट्टी के दौरान 2016 में, उन्होनें अपने गृह नगर से 60 किलोमीटर दूर कोझिकोड में एक प्रशिक्षण सुविधा जिमनासियम की यात्रा शुरू कर दी। उन्होंने कहा, “मैंने रविवार को छोड़कर हर दिन 120 किलोमीटर की यात्रा की।”

 

औपचारिक प्रशिक्षण के कुछ महीनों के बाद भी लोगों का उनके प्रयासों पर ध्यान नहीं गया, मजीज़िया ने उसी वर्ष कालीकट जिला पावरलिफ्टिंग चैंपियनशिप में अपना पहला स्वर्ण पदक जीता। इसके बाद, पिछले दो सालों में विभिन्न राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय चैंपियनशिप में  मजीजि़या ने इतने रजत और स्वर्ण पदक जीते कि उन्होंने गिनती ही करनी छोड़ दी, इसके बाद मजीज़िया ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। उन्होंने 2017 में एशियाई पावरलिफ्टिंग चैंपियनशिप में भी एक रजत जीता।

इससे पहले 2018 में, उन्होंने केरल के बॉडी बिल्डिंग एसोसिएशन और केरल की स्पोर्ट्स काउंसिल द्वारा आयोजित ‘मिस्टर केरल’ प्रतियोगिता में भाग लिया और उन्हें हिजाब में ऐसा करने वाली एकमात्र महिला बना दिया। जबकि कई लोगों के लिए हेडस्कार्फ एक सीमा हो सकती है, मजीज़िया के लिए, यह उनकी पहचान का एक अनिवार्य हिस्सा है जिसे वह जाने नहीं दे सकती है। उन्होनें कहा, “मैं अपने हिजाब के साथ अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहुँची और अगर मैं ऐसा कर सकती हूँ, तो मुझे नहीं लगता कि अब मुझे इसे पहनने से रोकने का कोई कारण है, क्योंकि यह मेरी पहचान का एक हिस्सा है, जो मैं हूं।”

 

मजीज़िया बानो नियमित रूप से आलोचना का सामना करती रही हैं

जबकि मजीज़िया प्रतिभा, अभ्यास, कड़ी मेहनत और दृढ़ता के माध्यम से अपनी बहुमूल्यता साबित कर रही हैं फिर भी उन्हें नियमित रूप से सभी बाधाओं और यहां तक ​​कि आलोचनाओं के खिलाफ लड़ना पड़ता है जो उनके रास्ते आते हैं। उन्होनें बताया, “सिर्फ इसलिए कि मैं हिजाब पहनती हूँ, मुझे प्रायोजक नहीं मिल रहे हैं जैसे दूसरों को मिलते हैं।” उन्होंने कहा कि हिजाब का कंपनियों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है, हालांकि, वह इसे पहनना बंद नहीं करेंगी।

एक स्वाभिमानी मजीज़िया ने कहा, “मैं पैसे के लिए हिजाब पहनना बंद नहीं करूँगी और यह अंत में एक निजी मामला है।” उन्होंने यह भी कहा कि बहुत से प्रतिभाशाली मुस्लिम महिलाएं अपने जुनून का पीछा करने से दूर रहती हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि हिज़ाब उनके लिए बाधा है।

जबकि उनका परिवार मजीज़िया के विकल्पों का पूर्ण समर्थन कर रहा है, फिर भी उन्हें समुदाय के सदस्यों से आलोचना का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि, एक अटल मजिज़िया ओलंपिक में भारोत्तोलन में भारत का प्रतिनिधित्व करने का सपना देख रहीं हैं। उन्होंने आर्म-रेसलिंग शुरू की है और अक्टूबर 2018 में तुर्की में आर्म-रेसलिंग वर्ल्ड चैंपियनशिप में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगीं।

 

उनके गांव में बदलाव 

मजीज़िया के बाद उनके गांव में कई लड़कियां फिटनेस की दुनिया में प्रवेश करने में गहरी रूचि दिखा रही हैं। उन्होंने कहा कि पहले उनके गांव में केवल तीन या चार जिम थे, लेकिन पिछले दो वर्षों में, संख्या दोगुना हो गई है। जब वह जिम के अंदर अभ्यास करती है तो लड़कियां और यहां तक ​​कि विवाहित महिलाएं मजिज़िया के साथ शामिल होती हैं।

उन्होनें कहा, “इससे पहले, यह केवल पुरुष थे जो जिम में ट्रेन करते थे, लेकिन अब मैं महिलाओं को भी देखती हूं।” अपने कई अन्य सपनों के बारे में बताते हुए मजीजि़या बताती हैं कि उनका एक सपना है कि “मैं अपने शहर में महिलाओं के लिए एक पावरलिफ्टिंग प्रशिक्षण सुविधा खोलना चाहती हूँ, ताकि महिलाओं को फिटनेस में करियर बनाने के लिए उनकी तरह लंबी दूरी की यात्रा न करनी पड़े।

र्तकसंगत का पक्ष

अपने दृढ़ संकल्प और लगन के साथ, मजीज़िया बानो ने कई रूढ़िवादी सोच को तोड़ा है। वह अपने गांव में कई महिलाओं के लिए प्रेरणा के रूप में उभरी हैं। र्तकसंगत कम्युनिटी मजीजि़या की सराहना करता है और उनके भविष्य के प्रयासों के लिए उसे शुभकामनाएं देता है।

अपने विचारों को साझा करें

संबंधित लेख

लोड हो रहा है...