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राफेल विवाद: रक्षा मंत्री द्वारा एचएएल की अक्षमता पर की गयी टिपण्णी कितनी सही है ?

Kumar Vibhanshu

September 21, 2018

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13 सितंबर को रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि भारत की एयरोस्पेस और रक्षा कंपनी हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) में फ्रांसीसी कंपनी डेसॉल्ट एविएशन के सहयोग से राफले जेट बनाने की आवश्यक क्षमता नहीं थी।

 
“एचएएल गारंटी देने की स्थिति में नहीं था”

उन्होंने कहा, “एचएएल के साथ बातचीत में डेसॉल्ट प्रगति नहीं कर सका क्योंकि अगर विमान भारत में उत्पादित किया जाना था, तो राफेल का उत्पादन करने की गारंटी दी जानी चाहिए थी। यह एक बड़ी क़ीमती वस्तु है और आईएएफ इन जेट के लिए गारंटी चाहते थे । एचएएल गारंटी देने की स्थिति में नहीं था। ”

सीतारमण ने यह भी कहा कि 2013 में तत्कालीन रक्षा मंत्री ए के एंटनी के “अभूतपूर्व हस्तक्षेप” की वजह से यूपीए सरकार के दौरान इन जेटों की खरीद के लिए वार्ता विफल रही, जिसने “राफेल की खरीदारी के विफल होने के ताबूत में अंतिम कील का काम किया|” सीतारमण ने कहा था कि उन्हें एचएएल को कमजोर करने का कोई इरादा नहीं था, हालांकि, उन्होंने कहा कि तत्कालीन रक्षा मंत्री एचएएल को वादा किए गए संसाधनों की आपूर्ति करने में नाकाम रहे हैं।

कांग्रेस इस सौदे में कई अनियमितताओं का आरोप लगा रही है। उन्होंने आरोप लगाया है कि मोदी सरकार ने 1,570 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से प्रत्येक विमान को खरीदने के सौदे को अंतिम रूप दिया है, जो कि यूपीए सरकार द्वारा तय किये गए 526 करोड़ रुपये से कहीं अधिक है। इस पर प्रतिक्रिया करते हुए, सीतारमण ने कहा कि राफले जेटों के लिए महत्वपूर्ण ऐड-ऑन यूपीए सरकार द्वारा तय किये गए विमान से काफी बेहतर होंगे और नए सौदे के तहत विमानों को वास्तव में 9% सस्ती लागत से खरीदा जा रहा है।
यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि मोदी सरकार द्वारा किए गए नए सौदे के तहत, इन जेटों को रिलायंस डिफेंस लिमिटेड के सहयोग से डेसॉल्ट एविएशन द्वारा उत्पादित किया जाएगा। कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि पीएम मोदी की 36 राफेल जेट खरीदने की घोषणा से 12 दिन पहले अनिल अंबानी के स्वामित्व वाली रिलायंस डिफेंस को शामिल किया गया था।

 

एचएएल की “अक्षमता” पर सीतारमण का बयान कितना सच है?

एचएएल के पूर्व अध्यक्ष टी सुवर्ण राजू ने रक्षा मंत्री के वक्तव्यों का जवाब देते हुए हिंदुस्तान टाइम्स को बताया कि भारतीय कंपनी ने जेटों को एक्सपेक्टेड  “पर पीस कॉस्ट ” पर नहीं बनाया है, लेकिन कंपनी की क्षमता थी इन विमानों का उत्पादन करने की। उन्होंने कहा, “जब एचएएल 25 टन सुखोई -30 का निर्माण कर सकता है, एक चौथा पीढ़ी वाला लड़ाकू जेट जिसके रॉ मटेरियल से ले कर पूरा प्लेन तैयार कर के हमने वायु सेना का मुख्य आधार बनाया है, तो हम किस बारे में बात कर रहे हैं? हम निश्चित रूप से इसे कर सकते थे (लाइसेंस राफले जेट्स का उत्पादन किया)। ”

उन्होंने कहा कि एचएएल पिछले 20 वर्षों से राफेल निर्माता दासॉल्ट एविएशन द्वारा मिराज -2000 विमान को सफलतापूर्वक बनाए रख रहा है, उन्होंने कहा कि किसी को राफेल का लाइफ साइकिल कॉस्ट देखना है, न कि विमानों के प्रत्येक पीस का दाम। सीतारमण की टिप्पणी जिसमें उन्होंने कहा की एचएएल गारंटी देने की स्थिति में नहीं था, उन्होंने कहा, “यदि मैं विमान बनाता हूं, तो मैं उनकी गारंटी दूंगा”। उन्होंने सरकार को यह भी साबित करने के लिए दासॉल्ट और एचएएल के बीच कॉन्ट्रैक्ट को सार्वजनिक करने के लिए कहा।
विशेष रूप से, इस साल की शुरुआत में, एचएएल और महिंद्रा डिफेंस सिस्टम्स ने अमेरिकी एयरोस्पेस विशाल बोइंग के साथ मल्टीरोल लड़ाकू एयरक्राफ्ट एफ / ए -18 सुपर हॉर्नेट लड़ाकू विमानों के एक और वर्ग का निर्माण करने के लिए समझौता किया। अगस्त में भी, रूसी निर्माता मिग ने कहा कि यह एमआईजी -35 प्रदान करने के लिए एचएएल के साथ साझेदारी में प्रवेश करेगा। मिग 1960 से भारतीय वायु सेना के लिए लड़ाकू विमानों का मुख्य आपूर्तिकर्ता होता है। भारत द्वारा उपयोग की जाने वाली मिग श्रृंखला में अन्य विमान मिग -21, मिग -23, मिग -25, मिग -27 और मिग -29 हैं।

 

तर्कसंगत का पक्ष 

यह पहली बार हो सकता है कि भारत के रक्षा मंत्री ने सरकारी कंपनी एचएएल पर अपने संदेहों को सार्वजनिक रूप से व्यक्त किया है। एचएएल, आधी शताब्दी से अधिक, विमान के डिजाइन, निर्माण और असेंबली में शामिल है। यह बहस का विषय है कि राफले सौदे से 12 दिन पहले निजी तौर पर स्वामित्व वाली रिलायंस डिफेंस को कैसे शामिल किया गया था, एचएएल जैसे पहले से स्थापित पीएसयू की तुलना में नयी रिलायंस डिफेंस इस तरह के महत्वपूर्ण विमान उत्पाद में कैसे सक्षम है ? क्या रक्षा मंत्री के लिए 78 वर्षीय पीएसयू के खिलाफ ऐसी अपमानजनक टिप्पणी करना ठीक है और क्या उनका तर्क वैध है? यदि हां, तो क्या स्वदेशी क्षमताओं को बढ़ावा देने की सरकार की भूमिका नहीं है?

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