मेरी कहानी

मेरी कहानी: मैं बैकबेंचर था और मैं यूपीएससी में 4 बार विफल रहा, लेकिन मैंने सभी बाधाओं के बावजूद खुद में विश्वास किया

Kumar Vibhanshu

September 23, 2018

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“मेरे बचपन के दिनों में, मैं एक औसत छात्र था, ठेठ बैकबेंचर, जिसको उज्ज्वल सहपाठी और शिक्षक हीन  भावना से देखते थे।

वहां शायद ही कोई मुट्ठी भर लोग थे जो मुझ पर विश्वास करते थे, अब जब मैं वापस देखता हूं और उन सब को ‘ब्लेसिंग इन डिस्गाइज़’ मानता हूँ। मेरा मानना ​​है कि नागरिक सेवाओं को पास करना या जीवन में किसी और चीज को प्राप्त करने में कुछ असाधारण क्षमताओं या कौशल की ज़रूरत  नहीं हैं, वे सामान्य लोग हैं जो सभी बाधाओं के बावजूद खुद पर विश्वास करते हैं और  को प्राप्त करते हैं।

स्नातक होने के बाद, सबसे बड़े बेटे होने के नाते, मुझे अपने माता-पिता का समर्थन करने के लिए नौकरी में शामिल होना पड़ा जो सेवानिवृत्ति के करीब थे। जबकि मैं एक सॉफ्टवेयर पेशेवर के रूप में काम कर रहा था, तीन साल बाद मुझे लगने लगा कि कुछ कमी थी। मेरे छोटे भाई ने हमारे घर की ज़िम्मेदारी उठाई, जिससे मेरे पिता ने जो मुझमें बीज बोया था उसे अंकुरित करने के लिए परिश्रम करने का समय मिला।

यह मेरे पिता का एक अधूरा सपना था। मैं विशेष रूप से एक सिविल सेवक और एक पुलिस अधिकारी बनना चाहता था। जब भी मैंने सड़क पर एक पुलिसकर्मी देखा तो मेरे अंदर एक बिजली सी कौंध जाती थी। जब मैंने परीक्षाओं को पास कर लिया, तो कई ने मुझसे पूछा कि प्रशासनिक सेवा क्यों नहीं। मेरे पास कोई जवाब नहीं था, मैं उन्हें समझा नहीं सकता कि वर्दी ने मुझे कितना मोहित किया और मैंने हमेशा खुद को एक वर्दी पहने हुए कल्पना की थी। मेरा मानना ​​था कि निराशा या आपातकाल में कोई भी व्यक्ति पहले अस्पताल या पुलिस स्टेशन जाता है।

मैं यूपीएससी में विभिन्न चरणों में 4 बार विफल रहा, हर बार एक अलग अनुभव और एक नया सबक सीखा। हालांकि यह मुझे एक नए व्यक्ति के रूप में ढाल चुका था ।

अंत करने से पहले, मैं अपनी एक सोच बाँटना चाहता हूं जो लाल बहादुर शास्त्री नेशनल अकादमी ऑफ़ एडमिनिस्ट्रेशन (एलबीएसएनएए) और एस वी पी  नेशनल पुलिस अकादमी (एसवीपीएनपीए) में मुझे मजबूती से मिली है और उस पर मुझे अटूट विश्वास है, “आगे बढ़ना या रुकना आपके दिमाग पर निर्भर करता है  जब तक आप कोशिश नहीं करते आप नहीं जानते की आप कितनी दूर जा सकते हैं “|

                      

                      कहानी – मिथुन कुमार जी के | आईएएस 2016 बैच | कर्नाटक कैडर

 

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