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उप्र: दो महीने से कम समय में सरकारी अस्पताल में 70 से अधिक बच्चों की मौत हुई, सरकारी वादे एक बार फिर विफल

Kumar Vibhanshu

September 25, 2018

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उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले के एक अस्पताल में 70 से अधिक बच्चों ने अपनी जिंदगी खो दी है और कथित रूप से यह सब  एक रहस्यमय बुखार के कारण हो रहा है।

गोरखपुर के बाबा राघव दास (बीआरडी) मेडिकल कॉलेज में त्रासदी को हुए अभी लगभग एक साल गुज़रा है, जहाँ ऑक्सीजन सप्लाई में गड़बड़ी के कारण कई बच्चों की मौत हो गयी थी| अब एक नयी घटना सुर्खियां बटोर रही है जहाँ बीते 50 दिनों में उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले के सरकारी अस्पताल में रहस्यमयी बुखार के कारण से 70 बच्चे अपनी जान गँवा चुके हैं|

घटना की पुष्टि करते हुए, बहराइच अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक, डॉ डीके सिंह ने एक बयान जारी किया है कि अगस्त से 17 सितंबर तक, अस्पताल में 2,158 बच्चों को भर्ती कराया गया था। जिनमें से 70 से अधिक बच्चों ने अपना जीवन खो दिया है। उन्होंने यह भी कहा कि बच्चे विभिन्न बीमारियों से पीड़ित थे जिसके कारण उनकी मौत हुई।

टाइम्स ऑफ़ इंडिया से बात करते हुए डॉ ए के पांडे, मुख्य चिकित्सा अधिकारी, ने कहा, “बर्थ एस्फेक्सिया, मैनिंजाइटिस, तीव्र एन्सेफलाइटिस सिंड्रोम और सेप्टिसिमीया सहित चार इन मुख्य समस्याओं के कारण 70 में से 90 प्रतिशत मौतें हुई हैं।”

 

बुनियादी ढांचे की कमी

अस्पताल के बुनियादी ढांचे के बारे में बात करते हुए डॉ सिंह ने कहा कि बहराइच जिला अस्पताल में केवल 200 बिस्तर हैं, लेकिन वर्तमान में, अस्पताल में 450 से ज्यादा रोगियों का इलाज किया जा रहा है। उन्होंने भरोसा देते हुए कहा कि, “हालांकि, अधिकारी जितना संभव हो सके मरीज़ों को बचाने के लिए अपनी तरफ से पूरी कोशिश कर रहे हैं।”


न्यूजएक्स के अनुसार, सरकारी अधिकारी ने कहा कि कई जिलों में चिकित्सा टीमों को सतर्क कर दिया गया है। उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रभावित क्षेत्रों की एक प्रेस विज्ञप्ति जारी की है। प्रभावित जिले पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बरेली और बदाऊं हैं, इसके बाद हरदोई, सीतापुर, बहराइच और शाहजहांपुर – जो राज्य की राजधानी लखनऊ के नजदीक हैं।

 

अस्पताल में अफ़रा तफ़री

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार शनिवार को, जैसे ही “रहस्यमय बुखार” की खबर फ़ैली, डॉ कफ़ील खान अपने चालक और अन्य सहयोगी के साथ बहराइच जिला अस्पताल पहुंचे। डॉ कफ़ील  ने मरीजों को दिए गए इलाज के बारे में मरीज़ों से ही प्रश्न पूछना शुरू कर दिया। बाद में उन्होंने कथित तौर पर डॉक्टर और चिकित्सा कर्मचारियों के साथ भी बहस किया जिसके बाद मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ डीके सिंह ने पुलिस को बुलाया, और उनको हिरासत में ले लिया गया।

डॉ कफ़ील के बड़े भाई आदिल खान ने कहा, डॉ कफील के अनुसार, बच्चों की मौत एन्सेफलाइटिस से हुई है। उन्होंने आगे कहा कि डॉ कफ़ील की गिरफ्तारी प्रेस को संबोधित करने के दौरान हुई।

डॉ कफ़ील को आपराधिक प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 151 के तहत गिरफ्तार किया गया था, लेकिन बाद में एक चेतावनी के साथ छोड़ दिया गया कि जिले में शांति को बाधित करने की कोशिश करने पर उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।

 

तर्कसंगत का पक्ष 

बार-बार, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्य में अस्पताल सुविधाओं को अपग्रेड करने के कई वादे किए हैं। पिछले साल, मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि अगले पांच वर्षों में उत्तर प्रदेश में 6 एम्स के सामानांतर अस्पताल और 25 मेडिकल कॉलेज शुरू किए जाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि स्वास्थ्य सुविधाओं को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाया जाना चाहिए।

यह घटना सरकार की कथनी और करनी के फ़र्क़ को उजागर करता है। तर्कसंगत यह उम्मीद करता है कि संबंधित अधिकारी उचित कार्रवाई करेंगे और सरकार सुनिश्चित करे कि ऐसी घटनाएं दोबारा नहीं होंगी।

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