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उप्र: एफआईआर लिखवाना हुआ आसान उत्तर प्रदेश पुलिस ने शुरुआत की इ-एफआईआर और डायल एफआईआर की सुविधा

तर्कसंगत

September 28, 2018

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उत्तर प्रदेश पुलिस ई-एफआईआर और डायल-एफआईआर योजना नामक दो नई योजनाएं शुरू करने के लिए तैयार है। यह अपनी तरह की पहली योजना है, जिसके माध्यम से कोई व्यक्ति पुलिस स्टेशन पर जाए बिना अपने फोन या किसी अन्य डिजिटल डिवाइस के माध्यम से मामूली अपराध को रजिस्टर कर सकता है।

द हिंदू के मुताबिक, राज्य पुलिस अपराधियों के ऑनलाइन फोटोग्राफिक दस्तावेज की भी तैयारी कर रही है जो पुलिस अधिकारियों को मिलने वाले 22,000 नए आई-पैड में उपलब्ध कराई जाएगी।

भर्ती होने के लिए नए प्रशिक्षित कमांडो

राज्य सुरक्षा को मजबूत करने के कदम में, पुलिस विभाग 118 नए कमांडो को भी प्रशिक्षण दे रहा है- जिसमें महिला कर्मियों के एक युवा बैच भी शामिल हैं। पुलिस महानिदेशक (डीजीपी), ओ पी सिंह ने पीटीआई को बताया कि ये नए प्रशिक्षित कमांडो राज्य में आतंकवाद विरोधी मुकाबला और रेसपोन्स ग्रिड को मजबूत करेंगे।

उनका कहना है कि यह कदम गुणात्मक और संख्यात्मक रूप से एटीएस की ताकत बढ़ाने के उद्देश्य से लिया गया है।

द हिंदू से बात करते हुए डीजीपी ने कहा “यह एफआईआर (पहली सूचना रिपोर्ट) है जो कानून की प्रक्रिया की पहली सीढ़ी है, और जब तक आप एक मामला पुलिस में में दर्ज नहीं करते हैं, तो आपकी जांच शुरू नहीं होती है। हमने सोचा कि हम इसे कैसे बदल सकते हैं और फिर यह भी देखा गया कि हमें यूपी 100 (पुलिस आपातकालीन नंबर) पर कॉल पर लगभग 20,000 शिकायतें हर दिन प्राप्त कर रहे थे।”

सिंह ने कहा कि उत्तर प्रदेश टोल फ्री 100 नंबर पर वाहन चोरी और अन्य घटनाओं को अब कॉल-आधारित एफआईआर के माध्यम से घर पर बैठकर ही लिखवाया जा सकता है।

अधिकारी ने कहा कि ई-एफआईआर और डायल-एफआईआर नियमित एफआईआर के रूप में कार्य करेगा, आईपीसी के इसी तरह के वर्गों के तहत। सिंह कहते है, “हम ऐसा करने वाले सबसे पहले राज्य हैं और अब लोगों को मामला दर्ज करने के लिए पुलिस के पास आने की जरूरत नहीं है।”

पुलिस कर्मियों को नए टैब दिए जाएंगे

अधिकारी ने कहा कि डायल और ई-एफआईआर के साथ आने से पहले, यह दो महीने की पायलट परियोजना आयोजित की गई थी ताकि यह पता चल सके कि यह व्यावहारिक रूप से संभव है या नहीं। गाजियाबाद में पायलट परियोजना सफल रही है। उन्होंने कहा कि नई एफआईआर सुविधाओं को नए मोबाइल ऐप्स (एप्लिकेशन) पर जल्द से जल्द लॉन्च कर के नागरिक-केंद्रित सेवा के साथ जोड़ा जाएगा।

उन्होंने आगे कहा कि कुल 22 तरह के पुलिस सेवायें, डोमेस्टिक हेल्प का वेरिफिकेशन, वस्तु के खोने और पाने की सूचना, जुलूस निकालने के लिए अनुमति प्राप्त करना, चरित्र प्रमाण पत्र प्राप्त करना और अन्य इसी तरह के दस्तावेज लोगों को अब घर बैठे मिल सकते हैं। 22,000 नए आई-पैड के बारे में बात करते हुए उन्होनें बताया कि जल्द ही नए आई-पैड में 1 लाख से ज्यादा छोटे और बड़े अपराधियों का दस्तावेज पहले से ही अपलोड किया रहेगा ।
“एक बार जब वे (पुलिस) एक अपराध स्थल तक पहुंच जाएंगे, तो वे प्रारंभिक लीड के आधार पर क्षेत्र और अन्य स्थानों के संभावित संदिग्धों की तस्वीरें दिखाएंगे। हम इस डेटा को समृद्ध करने के लिए जेल विभाग से संपर्क कर रहे हैं। यह डेटाबेस बनाना जारी रखा जायेगा, और इस तरह के और भी  स्मार्ट गैजेट पुलिसकर्मियों को प्रदान किए जाएंगे।”

“यह मामले को तेजी से हल करने में मदद करेगा”

डीजीपी ने कहा कि अपराधियों का एक अच्छा रिकॉर्ड मामले को तेजी से हल करने में मदद करेगा क्योंकि संदिग्धों की पहचान जल्दी से की जा सकती है। पंजाब में यह स्थानीयकृत ऑनलाइन आपराधिक डेटाबेस लॉन्च किया गया था, इसके बाद उत्तर प्रदेश में लॉन्च किया गया है।

विशेष पुलिस के बारे में बात करते हुए डीजीपी ने कहा कि स्पेशल पुलिस ऑपरेशन टीम (एसपीओटी) लखनऊ, गोरखपुर, मेरठ, इलाहाबाद और कानपुर जैसे राज्यों के कई प्रमुख और मेट्रो शहरों में तैनात की जाएगी। ये टीमें आतंकवादी या तबाही फैलाने वाली  घटनाओं का सामना करने में मदद करेंगी।

 

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