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एप्पल कर्मचारी की हत्या: सीसीटीवी फुटेज में कांस्टेबल के बयान से मेल करता कुछ भी नहीं, कल्पना तिवारी ने मुख्यमंत्री से इंसाफ की गुहार लगाई

तर्कसंगत

October 2, 2018

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बीते शुक्रवार की रात को उत्तर प्रदेश पुलिस कांस्टेबल द्वारा ऐप्पल के एरिया मैनेजर विवेक तिवारी को लखनऊ के गोमतीनगर इलाके में गोली मार दी गई|  कथित तौर पर मकदंपुर पुलिस चौकी पर पूछताछ के लिए रोकने पर वह रुके नहीं और अपनी एसयूवी को आगे बढ़ाने लगे। जब घटना हुई थी तब 38 वर्षीय तिवारी एक पूर्व सहयोगी महिला साथी साना खान के साथ थे।

विवेक तिवारी की पत्नी कल्पना तिवारी ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की और अपने पति पर किए गए विचित्र अत्याचार पर अपनी चिंता व्यक्त की। उन्होंने अपनी चिंता व्यक्त की कि उनके स्वर्गीय पति की छवि को कैसे खराब किया जा रहा था और उनके चरित्र पर सवाल उठाया जा रहा था, क्योंकि वह उस रात अपने पूर्व सहयोगी के साथ थे।

न्यूज़ 18 से बात  करते हुए कल्पना तिवारी ने बताया “जब भी वह दूर जाते थे, मेरे पति नियमित रूप से मुझे फोन करते थे। उन्होनें मुझे उस रात भी बताया कि वह सना (उसके सहयोगी) को छोड़ने जा रहे हैं। कल्पना ने कहा कि उनके पति की छवि और चरित्र को खराब करने का प्रयास किया गया है। “विवेक ने मुझे उस रात भी कॉल किया था और दिसंबर में हमें छुट्टी पर बाहर घूमने ले जाने का वादा भी किया था, क्योंकि दो नए आईफोन लॉन्च किए गए थे और उन्होंने कहा कि बाजार बहुत अच्छा चल रहा था। उन्होंने दीवाली सीजन में अच्छी बिक्री की भी उम्मीद की|”

उन्होंने एक दूसरी प्राथमिकी दायर की जिसमें दावा किया गया कि सना खान को किसी से भी फ़ोन पर बात करने की इजाजत नहीं थी और उसे पेपर की एक खाली शीट पर हस्ताक्षर करने के लिए मजबूर किया गया। पहली एफआईआर अस्पष्ट थी और उसमें कॉन्स्टेबल के नाम नहीं थे। रविवार को, उसने एक और प्राथमिकी दायर की क्योंकि उसने कहा था कि उसे पिछले दिन पुलिस ने उस पर नाम न लेने के लिए दबाव बनाया था। दूसरी एफआईआर में, उन्होंने स्पष्ट रूप से कॉन्स्टेबल के नाम का उल्लेख किया जिसने विवेक को गोली मारी थी।

इस बीच, यूपी के कानून मंत्री बृजेश पाठक ने यूपी पुलिस पर लापरवाही दिखाने और पूरी घटना को आनन फानन में ख़त्म करने की कोशिश करने के लिए फटकार लगायी। पाठक ने कहा, “यह एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना है और हम पीड़ित के परिवार के सदस्यों के साथ हैं। हम मामले को तेजी से ट्रैक करने की कोशिश करेंगे ताकि परिवार न्याय प्राप्त कर सके। मैं प्रधान सचिव गृह और डीजीपी से भी अनुरोध करूंगा की बड़े शहरों में संवेदनशील और ज़िम्मेदार पुलिस की नियुक्ति की जाए।”

 

बयान में विरोधाभास

इसके पहले एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि यूपी पुलिस ने इस मामले को आनन फानन में हल करने की कोशिश की और यह दावा किया कि दोनों कॉन्स्टेबल घटनास्थल पर मौजूद नहीं थे। साना ने दोनो पुलिस अधिकारियों के नाम उनकी वर्दी पर  देखे थे  और इसलिए पुलिस को नाम दे पाई।


आरोपी कांस्टेबल, प्रशांत चौधरी द्वारा किए गए एक अन्य दावे यह है कि विवेक ने तीन बार उस पर गाड़ी चढ़ाने की कोशिश की और इसलिए, उन्होंने आत्मरक्षा में गोली मार दी। न्यूज़ 18 द्वारा प्राप्र्त सीसीटीवी फुटेज से पता चलता है कि कार किसी भी संदिग्ध गतिविधि के बिना सामान्य गति से आगे बढ़ रही थी और कॉन्स्टेबल भी अपनी बाइक पर सामान्य गति से आगे बढ़ रहे थे। दोनों के बीच आपसी संघर्ष का कोई संकेत नहीं देखा जा सकता है। सना खान ने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें पेपर की एक खाली शीट पर हस्ताक्षर करने के लिए मजबूर किया गया और पुलिस अधिकारी ने अपनी मनमर्ज़ी से सना के नाम का बयान लिखा।

प्रशांत की पत्नी ने अपने पति की हत्या के प्रयास के लिए विवेक तिवारी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है।

 

इससे पहले की घटना 
रात के डेढ़ बजे सना खान के साथ तिवारी अपने वाहन में बैठे थे, तब यह दो कांस्टेबल जो उस वक़्त पेट्रोलिंग पर थे, उनसे पूछताछ के लिए उनके पास गए। वरिष्ठ लखनऊ पुलिस अधिकारी कलानिधि नाथानी के मुताबिक, उन्होंने सोचा कि उनसे सवाल करना जरूरी था क्योंकि उन दोनों को “कुछ संदिग्ध गतिविधि महसूस हुई “।
जैसे ही तिवारी ने भागने की कोशिश की, कॉन्स्टेबल ने उसे रोकने की कोशिश की। तब प्रशांत कुमार द्वारा गोली चलाई गयी, और तेज वाहन एक फ्लाईओवर के खंभे से जा टकराई।

तिवारी को लोहिया अस्पताल ले जाया गया, जहां वह अपने इलाज के दौरान गोली लगने के कारण मारे गए, गोली उनके बाएं कान के पास मारी गयी थी। रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस ने पीड़ित को मरने के लिए छोड़ दिया, और सना को विवेक को अस्पताल ले जाने के लिए कुछ ट्रक चालकों की मदद लेनी पड़ी।

द टाइम्स ऑफ इंडिया ने बताया कि सना खान की शिकायत से कॉन्स्टेबल प्रशांत चौधरी के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया गया है। दोनों पुलिसकर्मियों को हिरासत में ले लिया गया है।

 

“जब मैं कार की तरफ बढ़ा, तो चालक (विवेक तिवारी) ने मुझे मारने के लिए तीन बार मुझ पर गाड़ी चढ़ाने की कोशिश की।  कॉन्स्टेबल प्रशांत चौधरी ने कहा, “मैंने आत्मरक्षा में एक गोली चलाई, फिर वह तुरंत वहां से भाग निकला।” प्रशांत चौधरी ने एएनआई को बताया|

हालांकि शुरुआत में, पुलिस ने कहा कि कॉन्स्टेबल ने आत्मरक्षा में गोली चलाई मगर, बाद में उन्होंने स्वीकार किया कि यह  अत्यधिक बल का प्रयोग करने के समान था। उत्तर प्रदेश पुलिस अधिकारी आनंद कुमार ने कहा कि यह उनके लिए एक शर्मनाक घटना थी।

 
“पुलिस का अत्याचार।”

 
तिवारी के निराश ससुर रमेश चंद्र शुक्ला ने कहा कि इस  घटनाक्रम में पुलिस पूरी तरह से दोषी है।

“यह पुलिस का अत्याचार है। उन्होंने पहले विवेक को मार डाला और अब इसे दुर्घटना के रूप में चित्रित करने की कोशिश कर रहे हैं, “उन्होंने कहा।

तिवारी की दुःखी पत्नी कल्पना ने जोर देकर कहा था कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ उनसे बात करें। उन्होंने कहा कि पुलिस को उनके पति को गोली मारने का कोई अधिकार नहीं था। आदित्यनाथ को लिखित पत्र में, उन्होंने 1 करोड़ रुपये के मुआवजे की भी मांग की। उन्होनें अपनी दो बेटियों के लिए नौकरी की सुरक्षा मांगी है और सीबीआई जांच के लिए आग्रह किया है।

“क्या वह एक आतंकवादी थे जिस पर पुलिस ने गोली चलाई ? हमने योगी आदित्यनाथ को हमारे प्रतिनिधि के रूप में चुना है, हम चाहते हैं कि वह इस घटना की संज्ञान ले और निष्पक्ष सीबीआई जाँच भी करें,” मृत तिवारी के साले विष्णु शुक्ला ने कहा।

तिवारी के सहयोगी पंकज पांडे ने सवाल किया कि जब कॉन्स्टेबल वाहन के पहिये पर आसानी से गोली मार सकते थे, तो उन्होंने तिवारी को क्यों गोली मारी ?

पांडे ने कहा, “मुझे इसमें षड़यंत्र की बू आ रही है।”

मुख्यमंत्री आदित्यनाथ ने मीडिया से कहा कि यह घटना पुलिस मुठभेड़ नहीं थी और यदि आवश्यक हुआ तो जांच के लिए केंद्रीय ब्यूरो को केस सौंपी जाएगी।

 

तर्कसंगत का पक्ष 

पुलिस की भूमिका नागरिकों की रक्षा करना और कानून को कायम रखना है। आत्मरक्षा में अत्यधिक बल का उपयोग समझ में आता है, लेकिन जैसा की सीसीटीवी फुटेज में देखा गया है वैसा कुछ प्रतीत नहीं हो रहा। हालांकि, यदि वरिष्ठ अधिकारी स्वयं कॉन्स्टेबल के संस्करण में त्रुटियों को इंगित करते हैं तो निष्पक्ष पूछताछ की आवश्यकता सर्वोपरि हो जाती है। इसके अलावा, यूपी के मुख्यमंत्री ने टिप्पणी की थी कि यह “मुठभेड़ नहीं है”, लेकिन ऐसा नहीं मान सकते कि यूपी पुलिस राजनीतिक प्रशासन से अधिक प्रभावित नहीं  हुई है। कई सारे सवाल अभी भी अनसुलझे हैं मसलन तिवारी और सना जब गाड़ी में थे तो उस वक़्त कांस्टेबल से पूछताछ के दौरान किस बात पर बहस हुई ? अगर बहस हुई तो फिर क्या बात इतनी बिगड़ी की गोली चलाने की नौबत आ गयी ? अगर विवेक कांस्टेबल पर तीन बार गाड़ी चढ़ाने का प्रयास कर रहे थे बाद बाकि पेट्रोलिंग को इसकी खबर उस वक़्त वायरलेस के ज़रिये दी गयी या नहीं ? पुलिस ने विवेक को घायल बीच सड़क सुनसान रात को क्यों छोड़ दिया, जबकि उन्हें गोली लग चुकी थी उन्हें अस्पताल पहुंचा कर आगे की कारवाई की जा सकती थी ? किसी भी संदिग्ध गतिविधि की पुष्टि के लिए पुलिस के पास क्या सबूत हैं ? सवाल और भी हो सकते हैं जो हमारे आपके दिमाग में कौंध रहे हो सकते हैं, मगर एक बात स्पष्ट है कि शहर के निहत्थे आम नागरिक को रात के डेढ़ बजे गोली मार दी गयी और हवाला केवल संदिग्ध गतिविधि और खुद की जान बचाने का दिया जा रहा है|

 


Contributors

Written by : Vibhansu

Edited by : Vibhansu

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