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गीता गोपीनाथ इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड की पहली चीफ इकोनॉमिस्ट नियुक्त की गयीं

तर्कसंगत

October 4, 2018

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इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड (आईएमएफ) की मैनेजिंग डायरेक्टर क्रिस्टीन लागर्ड ने हार्वर्ड विश्वविद्यालय की प्रोफेसर गीता गोपीनाथ को आईएमएफ के मुख्य अर्थशास्त्री (चीफ इकोनॉमिस्ट) के रूप में नियुक्त किया है। 1 अक्टूबर को जारी किए गए एक प्रेस रिलीज़ में मैनेजिंग डायरेक्टर ने नियुक्ति की घोषणा की और कहा कि गोपीनाथ, मौरिस (मौरी) ओबस्टफेल्ड की उत्तराधिकारी होंगी, जो 2018 के अंत में सेवानिवृत्त होंगे। इस घोषणा के बाद भारतीय मूल की प्रोफेसर न केवल पहली महिला होंगी बल्कि भारतीय मूल की दूसरी व्यक्ति होंगी जिन्हें आईएमएफ के मुख्य अर्थशास्त्री के रूप में नियुक्त किया गया है। आरबीआई के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन आईएमएफ में मुख्य अर्थशास्त्री के रूप में सेवा करने वाले एकमात्र पहले भारतीय थे।
गीता गोपीनाथ कौन है?
वर्तमान में, 46 वर्षीय गोपीनाथ हार्वर्ड विश्वविद्यालय में इंटरनेशनल स्टडीज एंड इकोनॉमिक्स की जॉन ज़्वानस्ट्रा प्रोफेसर हैं, जहां वह 2005 से पढ़ा रही हैं। उनका जन्म 1971 में कर्नाटक के मैसूर शहर में हुआ था। एक किसान और उद्यमी की बेटी गोपीनाथ ने 1992 में लेडी श्री राम कॉलेज फॉर विमेन से स्नातक की उपाधि प्राप्त की और फिर 1994 में दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से अपनी मास्टर डिग्री पूरी की। 2017 में, उन्होंने इकोनॉमिक टाइम्स को बताया कि भारत में 1990 के शुरुआत में पहली बड़ी वित्तीय संकट आई थी जिसने उनकी अंतरराष्ट्रीय वित्त में रूचि बढ़ा दी। 2001 में प्रिंसटन यूनिवर्सिटी से पीएचडी खत्म करने से पहले उन्होनें 1996 में वाशिंगटन विश्वविद्यालय से भी मास्टर्स डिग्री हासिल की।

अगले दो दशकों में, गोपीनाथ ने अपने अकादमिक करियर को और भी मजबूत करने के लिए कड़ी मेहनत की। 2001 में, उन्हें यूनिवर्सिटी ऑफ़ शिकागो ग्रेजुएट स्कूल ऑफ़ बिज़नेस में सहायक प्रोफेसर नियुक्त किया गया था और 2005 में, वह हार्वर्ड चली गईं।

 

उनकी उपलब्धियां क्या हैं?
मनीकंट्रोल के अनुसार, गीता अमेरिकन इकोनॉमिक रिव्यू की सह-संपादक हैं और नेशनल ब्यूरो ऑफ़ इकनोमिक रिसर्च  (एनबीआर) में इंटरनेशनल फाइनेंस एंड मैक्रोइकॉनॉमिक्स प्रोग्राम की सह-निदेशक हैं। उन्होंने विनिमय दर, अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय संकट, उभरते बाजार संकट और निवेश जैसे विभिन्न प्रकार के विषयों पर लगभग 40 रिसर्च आर्टिकल लिखे हैं। 2011 में, उन्हें वर्ल्ड इकनोमिक फ़ोरम द्वारा यंग ग्लोबल लीडर के रूप में चुना गया था। गीता ने वित्त मंत्रालय के लिए जी-20 मामलों पर एमिनेंट पर्सन्स एडवाइजरी ग्रुप के सदस्य के रूप में भी कार्य किया है। 2014 में आईएमएफ ने उन्हें 45 वर्ष कम के शीर्ष 25 अर्थशास्त्रीयों में से एक के रूप में नामित किया था। गोपीनाथ, को 2016 के शुरू में केरल के आर्थिक सलाहकार के रूप में नियुक्त किया गया था। इस कदम ने एक विवादित बहस की शुरुआत की थी जहां उनकी नव उदारवादी वकालत को राज्य की वामपंथी आर्थिक नीतियों के विरुद्ध माना जाता था।
गोपीनाथ भारत के नोटबंदी के कदम की आलोचना करती रही हैं, जहां उन्होंने खुलेआम भारत सरकार को कहा है कि वह ये माने कि यह एक अच्छा विचार नहीं था। बिजनेस स्टैंडर्ड के साथ एक साक्षात्कार के दौरान, उन्होनें कहा था, “मुझे नहीं लगता कि मैं एक मैक्रोइकॉनॉमिस्ट को जानती हूं जो सोचता है कि यह एक अच्छा विचार था।”

 

आईएमएफ में उनका काम क्या है?
आईएमएफ वैश्विक वित्त और अर्थव्यवस्था के क्षेत्र में काम कर रही एक अग्रणी अंतरराष्ट्रीय निकाय है। आईएमएफ का काम वित्तीय स्थिरता को बढ़ावा देना, वैश्विक मौद्रिक सहयोग को बढ़ावा देना और दुनिया भर में गरीबी को कम करना है। आर्थिक परामर्शदाता का पद सबसे प्रतिष्ठित पदों में से एक माना जाता है और अंतरराष्ट्रीय अर्थशास्त्र के बहुत प्रसिद्ध शोधकर्ताओं ने इस पद पर काम किया है। आरबीआई के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन पहले भारतीय व्यक्ति थे, अब उनके बाद गीता दूसरी भारतीय होंगी।

मुख्य अर्थशाष्त्री के रूप में उनका काम होगा पोलिसिमकेर्स को सलाह देना और साथ ही उन पोलिसी के फंडिंग के लिए भी सुझाव देना। आईएमएफ में किए गए सभी रिसर्च को देखना गीता की ज़िम्मेदारी होगी। आईएमएफ के प्रबंध निदेशक ने आर्थिक सलाहकार के रूप में अपनी घोषणा के दौरान गीता के बारे में बहुत तारीफ़ की। क्रिस्टीन ने कहा, “गोपीनाथ विश्व के उत्कृष्ट अर्थशास्त्रीयों में से एक है, जिनके पास अतुल्य अकादमिक शिक्षा, बौद्धिक नेतृत्व का अच्छा ट्रैक रिकॉर्ड है और व्यापक अंतर्राष्ट्रीय अनुभव भी है|”

तर्कसंगत पहली महिला आईएमएफ प्रमुख अर्थशास्त्री बनने पर गीता गोपीनाथ को बधाई देता है।

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