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कोबरापोस्ट का खुलासा 6 पूर्व मुख्यमंत्री समेत 194 राजनेताओं ने निर्वाचन आयोग को गलत पैन डिटेल दिए हैं

तर्कसंगत

October 6, 2018

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हाल ही में, कोबरापोस्ट ने गहन विश्लेषण के बाद यह पाया कि 2006 से 2016 के 10 साल की अवधि में चुनाव आयोग में जमा किये गए 2000 से अधिक एफिडेविट या हलफनामे फ़र्ज़ी हैं| 23 राज्यों के 194 से अधिक राजनेताओं ने अपने स्थायी खाता संख्या (पैन) की गलत सुचना दी है।

 

चुनाव आयोग द्वारा जाँच पड़ताल 

कानून के मुताबिक, एक उम्मीदवार को यह घोषित करना होता है कि क्या उनके खिलाफ कोई आपराधिक मामला है या उनके ख़िलाफ़ कोई जुर्म साबित हो चूका है? उन्हें आयकर विभाग द्वारा जारी किए गए कार्ड, पैन विवरण देकर अपनी संपत्ति भी घोषित करनी पड़ती है। यदि सही खुलासा नहीं किया गया है, तो उम्मीदवार को रिप्रजेंटेशन ऑफ़ पीपल एक्ट 1951 के धारा 125 (ए) (3) के तहत अयोग्य घोषित किया जा सकता है।

कोबरापोस्ट के रिपोर्ट के अनुसार आयकर अधिनियम 1961 की धारा 139 ए (7) में कहा गया है, “जिस व्यक्ति को नई श्रृंखला के तहत स्थायी खाता संख्या (पैन कार्ड ) आवंटित हो चुका है, वह एक और स्थायी खाता संख्या प्राप्त नहीं कर सकता है|”

हाल में, नकली पैन डिटेल दिए जाने की घटना बढ़ रही है। सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्स (सीबीडीटी) गलत पैन डिटेल देने के लिए 100 से अधिक सांसदों की जांच कर रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने भी इसी मुद्दे पर चिंता जताई है।

इस रिपोर्ट से यह बात तो साफ़ है कि भारत के निर्वाचन आयोग अपने उम्मीदवारों के पैन विवरणों की पुष्टि नहीं करते हैं। ज्यादातर मामलों में, उम्मीदवारों द्वारा दिए गए पैन विवरण हैं ही नहीं, जिसका अर्थ है कि आयकर विभाग ने उन्हें कभी जारी किया ही नहीं है।
छह मुख्यमंत्रियों ने भी गलत पैन डिटेल दिए 

194 राजनेताओं में से 6 पूर्व मुख्यमंत्री, 10 मौजूदा मंत्रियों, 8 पूर्व मंत्रियों और 54 मौज़ूदा विधायक और विधान सभा के 102 पूर्व सदस्यों (विधायकों) ने अपने पैन डिटेल की गलत जानकारी दी है|  भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी), भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, बहुजन समाजवादी पार्टी, जनता दल (यूनाइटेड) (जेडी (यू)), राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) और हिंदुस्तान अवामी मोर्चा (एस) सहित 29 राजनीतिक दलों के राजनेता इस सूची में हैं।

कांग्रेस 72 राजनेताओं के साथ पहले नंबर पर है और फिर भारतीय जनता पार्टी के 41 राजनेता फेक पैन डिटेल देने में दूसरे स्थान पर हैं। राजनेताओं द्वारा गलत रिपोर्टिंग के 26 मामलों के साथ, उत्तर प्रदेश राज्यों में सबसे आगे है। जांच में प्रकट होने वाले बड़े नाम हैं असम के पूर्व मुख्यमंत्री तरुण गोगोई और भुमिधर बरमन, बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री, जितन राम मांझी और हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह।

नकली विवरण ज्यादातर एक या दो नंबर बदल कर बनाये गए हैं। असम के पूर्व मुख्यमंत्री तरुण गोगोई ने 2006 और 2011 में दो अलग-अलग पैन नंबरों का इस्तेमाल किया है। हालांकि, गोगोई परिवार ने वास्तव में उन वर्षों के बीच संपत्ति में एक बड़ी वृद्धि देखी।
हिमाचल और बीजेपी नेता पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल के लिए उन्होंने 2007 के चुनाव के दौरान जो पैन नंबर दिया वो अस्तित्व में भी नहीं है। अगले चुनाव के दौरान, उन्होंने एक और पैन नंबर अपडेट किया।

ये रहस्योद्घाटन महत्वपूर्ण हैं क्योंकि सीबीडीटी वर्तमान में 98 विधायकों और 7 लोकसभा सांसदों की अपनी संपत्ति और आय के स्रोत में पाई जाने वाली गड़बड़ी की जाँच कर रही है। संपत्तियों का खुलासा नहीं करने से आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 272 बी के तहत कानूनी कार्रवाई हो सकती है। नकली पैन विवरण के लिए जुर्माना 10,000 रुपये है। जुर्माना, बाद की जांच और आय और परिसंपत्ति में गड़बड़ि और  धोखाधड़ी या टैक्स चोरी के सिद्ध होने के साथ बढ़ सकता है।

कोबरापोस्ट की पूरी रिपोर्ट यहां पढ़ी जा सकती है।

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