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इलाहबाद हाई कोर्ट ने ख़राब लिखावट के लिए 3 डॉक्टर क़ो 5000 जुर्माने की सज़ा सुनाई

तर्कसंगत

October 7, 2018

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इलाहाबाद उच्च न्यायालय के लखनऊ बेंच ने ख़राब लिखावट के लिए तीन डॉक्टरों को 5000 रुपये का जुर्माना लगाया है। ये तीन डॉक्टर उन्नाव, गोंडा और सीतापुर जिले के अस्पतालों से हैं।

 

अदालत के सुचारू कामकाज में रुकावट 

जैसा कि टाइम्स ऑफ इंडिया ने बताया, पिछले हफ्ते इलाहाबाद उच्च न्यायालय में सुनवाई के लिए आए तीन आपराधिक मामलों में पीड़ित के चोट की मेडिकल रिपोर्ट डॉक्टर के ख़राब लिखावट के कारण अदालत को पढ़ने में दिक्कत हो रही थी। अदालत के सुचारू कामकाज के लिए इन रिपोर्टों को रुकावट के रूप में देखते हुए, उच्च न्यायालय ने इन डॉक्टरों को ख़राब लिखावट के लिए जुर्माना लगाया। तीन डॉक्टर उन्नाव के डॉ टीपी जयस्वाल, सीतापुर के डॉ पीके गोयल और गोंडा के डॉ आशीष सक्सेना हैं।

डॉक्टरों ने इस फैसले के खिलाफ अनुरोध किया कि वे अधिक कामकाज़ के कारण अच्छी लिखावट में लिख नहीं पाये। न्यायाधीशों ने इस बहाने को बर्खास्त करते हुए लिखने के बजाय टाइप करने के लिए प्रोत्साहित किया।

इंडियन एक्सप्रेस द्वारा रिपोर्ट के अनुसार, डिवीजन खंडपीठ के न्यायमूर्ति अजय लांबा और न्यायमूर्ति संजय हरकौली ने जुर्माना लगाया। उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों ने यह भी कहा, “अदालत के निर्देश और महानिदेशक, चिकित्सा और स्वास्थ्य, उत्तर प्रदेश द्वारा जारी परिपत्र को दंड से बचते हुए नजरअंदाज किया गया है|”

 

पहले सर्कुलर ने डॉक्टरों को पढ़ने लायक कानूनी रिपोर्ट लिखने की चेतावनी दी थी
नवंबर 2012 में उत्तर प्रदेश के महानिदेशक (चिकित्सा और स्वास्थ्य) द्वारा सर्कुलर पहले से जारी किया गया था, जिसमें डॉक्टरों को एक अच्छी लिखावट में कानूनी चिकित्सा रिपोर्ट लिखने की चेतावनी दी गई थी जिसे पढ़ा जा सके।

द क्विंट द्वारा रिपोर्ट किए गए आरोपी डॉक्टरों प्राप्त जुर्माना अवध बार एसोसिएशन के पुस्तकालय को दी जाएगी। अगर वे जुर्माना देने में असफल होते हैं, तो उनके वेतन से धनराशि काट ली जाएगी।

जुर्माना लगते देख कर, इंदौर में एमजीएम मेडिकल कॉलेज ने मेडिकल छात्रों के लिए हस्तलेखन कक्षाओं की घोषणा की है, जैसा कि टाइम्स ऑफ इंडिया द्वारा रिपोर्ट किया गया है। उत्तराखंड राज्य ने अस्पष्ट हस्तलेख से निपटने के लिए पहले से ही एक पहल की है। मुख्य न्यायाधीश राजीव शर्मा और न्यायाधीश मनोज कुमार ने सितंबर में घोषणा की है कि चिकित्सकों को दवा के प्रिस्क्रिप्शन देने के लिए डिजिटल माध्यम का उपयोग करना चाहिए। इसी तरह की एक अधिसूचना झारखण्ड सरकार ने भी पारित की है जिसमें डॉक्टर्स अब से कैपिटल लेटर्स में प्रिस्क्रिप्शन लिखेंगे |

 

तर्कसंगत का पक्ष 

कई डॉक्टर जल्दबाजी में लिखते हैं, और इस प्रकार उनका लेखन पढ़ने लायक नहीं रहती है। यह रोगियों के लिए दवाइयों के नाम को समझना मुश्किल बनाता है जिसके कारण से केमिस्ट गलत दवा या अलग अलग कम्पोजीशन वाली दवा दे देते हैं। कभी-कभी मरीजों को ख़राब लिखावट के कारण बीमा सुविधाएं नहीं मिल पाती हैं। तर्कसंगत सराहना करता है कि अदालतों और संबंधित अधिकारी इस समस्या से निपटने के लिए उपाय कर रहे हैं। हालांकि, यह सुनिश्चित करने के लिए उपाय भी किए जाने चाहिए कि डॉक्टरों को अधिक काम का बोझ न पड़े, जिससे इस तरह की स्थितियां पैदा हो रही हैं।

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