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जम्मू कश्मीर सरकार के मुलाज़िमों के लिए अनिवार्य स्वास्थ्य बीमा की ज़िम्मेदारी रिलायंस को दे दी गयी

तर्कसंगत

October 7, 2018

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जम्मू-कश्मीर सरकार द्वारा शुरू की गई ग्रुप मेडिक्लेम हेल्थ इंश्योरेंस स्कीम, जो 1 अक्टूबर से लागू हुई थी, कर्मचारियों को रिलायंस जनरल हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड से स्वास्थ्य बीमा खरीदने के लिए बाध्य करती है। रिलायंस जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड को यह प्रस्ताव (टेंडर) बेहतर बोली लगाने के आधार पर सरकारी कंपनी भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) के जगह पर दी गयी।

 

4 लाख कर्मचारियों के लिए स्वास्थ्य बीमा

जम्मू-कश्मीर सरकार द्वारा जारी आदेश में कहा गया है, “पॉलिसी को रिलायंस जनरल हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड के साथ 8,777 रुपये और 22,229 रुपये (कर्मचारियों और पेंशनरों के क्रमशः) के वार्षिक प्रीमियम पर तय किया गया है।” आदेश में आगे कहा गया कि विश्वविद्यालयों, आयोगों, स्वायत्त निकायों और पीएसयू समेत सभी राज्य सरकारी कर्मचारियों (गज़ेटेड और नॉन गज़ेटेड) के लिए यह अनिवार्य होगा| हालांकि, पेंशनभोगियों के लिए, मान्यता प्राप्त पत्रकार और अन्य के लिए यह नीति वैकल्पिक होगी।

यह स्वास्थ्य बीमा अब 4,00,000 सरकारी कर्मचारियों को कवर करेगा।

 

बीमा अनुबंध पर संदेह

प्रस्ताव के लिए निमंत्रण पहली बार 1 जून, 2018 को जारी किया गया था। हालांकि, होता यह है कि सारे सरकारी टेंडर ऑनलाइन निकाले जाते हैं, मगर इस स्वस्थ्य बीमा के टेंडर के लिए एक प्राइवेट ब्रोकर एम/एस ट्रिनिटी रीइंस्युरेन्स ब्रोकर्स प्राइवेट लिमिटेड  द्वारा केवल कुछ लोकल अख़बार में विज्ञापन दिया गया, जैसा की क्विंट की रिपोर्ट से पता चलता है|

सभी संबंधित दस्तावेज वित्त विभाग की वेबसाइट पर पाए जा सकते हैं।

डेली एक्सेलसियर के रिपोर्ट के अनुसार एम्प्लाइज जॉइंट एक्शन कमिटी  (ईजेएसी) के सदस्यों ने आरोप लगाया है कि राज्य सरकार और आईसीआईसीआई के प्रतिनिधियों के बीच जम्मू-कश्मीर में मेडिक्लेम नीति के कार्यान्वयन के लिए एक बैठक में वार्षिक प्रीमियम 5300 रुपये पर निर्धारित किया गया था, इसके बावजूद रिलायंस इंश्योरेंस के साथ सौदा कर दिया गया।

 

“अनुचित प्रीमियम”

आदेश के मुताबिक, सभी कर्मचारियों को अब सालाना 8,777 रुपये का प्रीमियम देना होगा। एम्प्लाइज जॉइंट एक्शन कमिटी (ईजेएसी) ने दावा किया है कि सभी कर्मचारियों को एक बराबर राशि का भुगतान करने के लिए बाध्य करना  “अनुचित, औचित्य रहित और अस्वीकार्य” है, जैसा कि दैनिक एक्सेलसियर द्वारा रिपोर्ट किया गया। इसका मतलब है कि स्केल IV कर्मचारी से एक सिविल सर्वेंट  तक को समान प्रीमियम देनी होगी भले ही उनके वेतन में कितना भी अंतर हो।

इसके अलावा, 300 रुपये प्रति महीने चिकित्सा भत्ता जिसके राज्य के कर्मचारि हकदार थे, अब बंद कर दिया गया है। इंडियन ट्रेड यूनियनों (सीआईटीयू) के जम्मू-कश्मीर इकाई के राज्य के कोषाध्यक्ष श्याम प्रसाद केसर ने न्यूजक्लिक को बताया, “जम्मू-कश्मीर के राज्य कर्मचारियों को प्रति माह 300 रुपये का चिकित्सा भत्ता मिलता था, जिसे रोक दिया गया है। यह श्रमिकों को दवाओं और डॉक्टरों के दौरे पर अपने छोटे खर्चों में कुछ राहत देने के लिए प्रयोग किया जाता था। वास्तव में, कर्मचारी मांग कर रहे थे कि चिकित्सा भत्ता बढ़ाकर 1000 रुपये कर दिया जाए।”


Contributors

Written by : Vibhansu

Edited by : Vibhansu

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