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17 गोल्ड मेडल्स जीतने के बाद भी, यह बॉक्सर अपना कर्जा चुकाने के लिये, अब कुल्फी बेचने के लिए मजबूर है

तर्कसंगत

November 1, 2018

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हरियाणा के एक शानदार बॉक्सर, 28 वर्षीय दिनेश कुमार अब एक आइसक्रीम विक्रेता है, जो आइसक्रीम बेचकर जीवन यापन के लिये पैसा जमा कर रहा है. हालांकि उनका मुक्केबाजी का करियर बहुत छोटा था, लेकिन फिर भी दिनेश ने विभिन्न राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में 17 स्वर्ण, एक रजत और पांच कांस्य पदक जीतकर अपनी योग्यता को साबित किया. उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय चैंपियनशिप में भी भाग लिया है. जो दिनेश कुछ साल पहले कभी बॉक्सिंग रिंग के अंदर हुआ करता था, अब अपनी वित्तीय स्थिति के बेहद ख़राब होने के कारण, उसका जीवन पूरी तरह से बदल चुका है.

उनका बॉक्सिंग करियर 2001 में शुरू हुआ जिसके बाद उन्होंने कई मौकों पर अपने राज्य और देश को गौरवान्वित किया. हालाँकि, दिनेश के अंतर्राष्ट्रीय मुक्केबाजी चैंपियन बनने का सपना, उनके परिवार के कर्ज में डूब जाने के कारण चकनाचूर हो गया, जिसने उन्हें अपने पिता के साथ कुल्फी बेचने के लिये मजबूर कर दिया.

 

मजबूरन कुल्फी बेचकर गुजारा करना पड़ा

आज, उन्हें कोई नहीं पहचान पाता है. दिनेश को एक छोटे बॉक्स में कुल्फी (एक प्रकार की आइसक्रीम) बेचते हुए देखा जा सकता है, जिस पर दिनेश कुल्फीनाम लिखा रहता है. तर्कसंगत से बात करते हुए, दिनेश ने कहा कि उनके पिता ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय चैंपियनशिप के लिए भेजने के लिए कर्ज लिया था, एक दुर्घटना जिसने दिनेश को घायल कर दिया और जिसके कारण उनकी आर्थिक स्थिति भी खराब हो गई. बदतर मामलों को सही करने के लिए उनके पिता को उनके इलाज की लागत का भुगतान करने के लिए, एक और ऋण लेना पड़ा.

उसके बाद 20 से अधिक पदकों के होने के बावजूद भी, दिनेश को कर्ज के ब्याज को चुकाने के लिए कुल्फी बेचने के लिए मजबूर किया जाता है – एक अनुमानित अवस्था जिसमे उनके सफलता प्राप्त करने की संभावना नहीं लगती है, क्योंकि वह उससे केवल 250 रुपये से 300 रुपये प्रति दिन निकाल सकते है. दिनेश ने तर्कसंगत को बताया कि उनका आखिरी टूर्नामेंट 2012 में हुआ था, जिसके बाद उन्होंने पूरी तरह से भाग लेना बंद कर दिया. उन्होंने कहा, “मैं खाली पेट बॉक्सिंग नहीं कर सकता. मुझे अपने भोजन के लिए पैसो की जरूरत है.

रिंग में वापस जाने की इच्छा व्यक्त करते हुए, दिनेश ने कहा कि वह खेल के साथ अपना प्रेम अभी भी नहीं खोये हैं, लेकिन अपने पुराने रूप में वापस जाने के लिए बहुत समय, ऊर्जा, प्रयास और सबसे महत्वपूर्ण धन की आवश्यकता होगी.

 

परिवार सारी उम्मीदें खो चुका है

दिनेश, सरकार की तरफ से सभी आशाओं को खो चुके है और उन्हें लगता है कि सरकार उन्हें क्यों वित्तीय सहायता प्रदान करेगी इसलिये वह अब इस बारे में सोचते भी नहीं है. दिनेश ने बताया कि वह अभी भी मुक्केबाजी से नहीं हारे हैं और उनके जैसा एक अच्छा खिलाड़ी बेकार जा रहा है. इसके अलावा, वह बच्चों को बॉक्सिंग की भी कोचिंग देते है.

एक शानदार बॉक्सर के कोच ने सरकार से दिनेश की सहायता करने का आग्रह किया. उन्होंने कहा, “दिनेश एक मुक्केबाज के रूप में बहुत तेज थे. उन्होंने जूनियर वर्ग में बहुत सारे पदक जीते हैं, लेकिन चोट के कारण हार गए और अब कुल्फी (आइसक्रीम) बेच रहे हैं. अगर कुमार की मदद की जाती है, तो वह कर्ज के बोझ से मुक्त हो जाएंगे. अगर सरकार दिनेश की मदद करती है, तो वह भविष्य में सर्वाइव कर जायेगा.”

यह हमारे एथलीटों की दुर्दशा और दर्द को उजागर करने वाली पहली कहानी नहीं है. दिनेश जैसे कई एथलीट हैं जो सरकार की सरासर उदासीनता के शिकार हैं. तर्कसंगत हरियाणा सरकार से दिनेश की पीड़ा को स्वीकार करने और उसे सशक्त बनाने का आग्रह करता है.

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