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महाराष्ट्र विधानसभा ने मराठों के लिए 16% आरक्षण को पारित किया, जो अब कुल मिलाकर 68% हो चूका है, सुप्रीम कोर्ट के निर्देश से 18% अधिक

तर्कसंगत

November 30, 2018

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29 नवंबर को, महाराष्ट्र विधानसभा ने सर्वसम्मति से बिल पारित किया जो अब मराठा समुदाय को राज्य में 16 प्रतिशत आरक्षण प्रदान करेगा। मराठा समुदाय महाराष्ट्र में राजनीतिक रूप से एक प्रभावशाली समुदाय है जिन्हें आरक्षण प्रदान किया गया है, जो सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़ा वर्ग (एसईबीसी) अधिनियम, 2018 के अधीन आते हैं| नयी आरक्षण व्यवस्था सभी राज्यों में आरक्षण के लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित 50 प्रतिशत के मानक से कुल 18% अधिक है। अब तक राज्य में 52 प्रतिशत आरक्षण था, नए 16 प्रतिशत आरक्षण के साथ यह 68 फीसदी तक पहुंच गया है। बिल को अब ऊपरी सदन में भेजा गया है।

 

आरक्षण एक संवैधानिक अधिकार है

द इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने आज शीतकालीन सत्र में बिल पेश किया। उन्होंने विधानसभा में महाराष्ट्र राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग (एमएसबीसीसी) पर सिफारिशों की रिपोर्ट-एक्शन टेकन रिपोर्ट (एटीआर) भी प्रस्तुत की। लाइवमिंट के अनुसार पिछड़े वर्गों के लिए राज्य आयोग ने 15 नवंबर को मराठा मांगों पर एक अनुकूल रिपोर्ट प्रस्तुत की थी। कमीशन 2016 में स्थापित की गयी थी, जब मराठा समुदाय की आरक्षण की मांग बढ़ी थी।

आयोग द्वारा सिफारिशों के मुताबिक, मराठों को आरक्षण मिलना चाहिए। सिफारिश समुदाय ने कहा कि मराठा समुदाय के पास राज्य में नौकरी क्षेत्र में पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं है। यह कहा गया है कि मराठा समुदाय को अनुच्छेद 15 (4) (धर्म, जाति, लिंग या जन्म स्थान पर भेदभाव का निषेध) और 16 (4) (भारतीय संविधान के अनुसार सार्वजनिक रोजगार में अवसर की समानता) जैसे संवैधानिक प्रावधानों के तहत आरक्षण लाभ प्राप्त करने का हकदार है।

मराठा वर्ग राज्य की आबादी का 32-35 प्रतिशत हिस्सा है जो लंबे समय से आरक्षण की मांग कर रहा है। इस साल की शुरुआत में, मराठा समुदाय ने आरक्षण की मांग के कई विरोध प्रदर्शन किए थे। प्रारंभिक रूप में शांतिपूर्ण रहने वाले विरोध प्रदर्शन आगे चल कर कुछ स्थानों पर हिंसक हो गए। कुछ जगहों पर प्रदर्शनकारियों ने सड़कों और रेलवे लाइनों को अवरुद्ध कर दिया था। विरोध प्रदर्शन ‘मराठा क्रांति मोर्चा’ के बैनर के तहत आयोजित किया गया था, जिन्होंने मुंबई में बंद का भी आह्वान किया था।

 

लम्बे समय से मांग 

विरोध प्रदर्शनों को ध्यान में रखते हुए देवेंद्र फडणवीस की अगुआई वाली राज्य सरकार ने समुदाय को आश्वासन दिया कि उनकी मांग पूरी की जाएगी। श्री फडणवीस ने कहा, “समुदाय के लिए आरक्षण के लिए एक कानून बनाया गया था, लेकिन यह बॉम्बे हाईकोर्ट द्वारा रोक दिया गया था।

द टाइम्स ऑफ इंडिया के रिपोर्ट के अनुसार इस साल जुलाई में मराठा आरक्षण के बारे में मीडिया के लोगों से बात करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “हम एक बात के बारे में स्पष्ट हैं। मराठों को आरक्षण देते समय, कोई अन्य कोटे को छुआ या कम नहीं किया जाएगा। अलग से आरक्षण दिया जाएगा।”

मराठा समुदाय जो मुख्य रूप से कृषि समुदाय से संबंधित हैं, ने दावा किया कि राजनेताओं ने भी उनके लिए बहुत कुछ नहीं किया है। उन्होंने कहा कि आरक्षण के साथ एससी और एसटी समुदाय की स्थिति में सुधार हुआ है, यही कारण है कि वे भी इसकी मांग कर रहे थे। इससे पहले, 2014 में, कांग्रेस की अगुवाई वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) सरकार ने भी मराठा को 16 प्रतिशत कोटा दिया था। हालांकि, इसे बाद में अदालत ने खारिज़ कर दिया था।

 

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