पर्यावरण

रेन वॉटर हार्वेस्टिंग: मात्र 3 घंटे की बारिश में चेन्नई के अपार्टमेंट में 1 लाख लीटर पानी जमा किया जाता है

तर्कसंगत

November 30, 2018

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चेन्नई के एक अपार्टमेंट कॉम्प्लेक्स के निवासियों ने बारिश के केवल तीन घंटे में लगभग 1,00,000 लीटर पानी इकट्ठा करके रेन वॉटर हार्वेस्टिंग की प्रभावशीलता को उजागर किया है।

शोलिंगानल्लूर में सबरी टेरेस कॉम्प्लेक्स के चार ब्लॉक के छप्पन फ्लैट्स के लोगों ने रेन वॉटर हार्वेस्टिंग अभियान में शिरक़त करते हुए अपने टेरेस से बारिश के पानी को पाइप के द्वारा 1 लाख लीटर की क्षमता वाले एक भूमिगत जलाशय में जमा करने की योजना पर काम किया। निवासियों की अपेक्षाओं से बढ़कर, केवल 29 अक्टूबर से 31 अक्टूबर तक तीन दिनों की कुल बारिश जो तीन घंटे दर्ज की गई, इतने ही समय में 1 लाख लीटर की क्षमता वाला टैंक पूरी तरह से भर गया। सबरी टेरेस रेसिडेंट्स एसोसिएशन के सचिव हर्ष कोडा ने तर्कसंगत  को आगे बताया कि, “अब तक, हम लगभग दो सप्ताह में कुल 6 लाख लीटर इकट्ठा करने में सक्षम हुए हैं।”

 

पहले से प्रचलित समस्या

चेन्नई शहर मुख्य रूप से भूजल पर निर्भर है, जिनका स्तर अनियोजित उपयोग के कारण गिरता जा रहा है। हर्ष कोडा बताते हैं “इसलिए अब सभी बिल्डरों को प्रत्येक अपार्टमेंट परिसर में कम से कम दो रेनवॉटर रिचार्ज पिट्स, बनाना  ज़रूरी है, परन्तु वास्तविकता है, कि अधिकांश अपार्टमेंट में, बिल्डरों ने इन गड्ढे में कचड़ा डंप कर दिया। इसलिए, उन्हें  रेन वॉटर हार्वेस्टिंग (वर्षा जल संचयन) के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है|”

कोडा बताते हैं “सबरी टेरेस अपार्टमेंट के मामले में, छप्पन फ्लैट्स के लगभग 300 निवासियों ने इस प्रोजेक्ट को पूरा किया, जिनमें ज्यादातर युवा आईटी पेशेवर शामिल थे जो पूरी तरह से निजी टैंकों द्वारा पीने वाले पानी और घरेलू उद्देश्यों के लिए पानी पर निर्भर थे। एक दिन में, पानी का उपयोग 40,000 लीटर तक पहुंच गया, जबकि पानी पर व्यय 1 लाख रूपये प्रति माह था। दूषित पानी को ट्रीटमेंट प्लांट में ले जाया जाता था और उन्हीं रीसाइकल्ड पानी से हमारे बागों को सींचा जाता था।”

 

परियोजना के बारे में

कोडा बताते है, “पिछले कुछ सालों से चेन्नई में दिवाली से पोंगल तक की सामान्य बारिश के अलावा जून-जुलाई में भी काफी अच्छी  बारिश हुई है।” इस प्रकार, आरडब्ल्यूएच नेटवर्क की योजना काफी हद तक हमारे ज़ेहन में थी। लेकिन, आरडब्ल्यूएच परियोजना में योगदान करने के लिए निवासियों को मनाना आसान नहीं था, मुख्य रूप से क्योंकि वे पहले से ही पानी पर भारी मात्रा में खर्च कर रहे थे। हर्ष कोडा और उनकी पत्नी प्रभा कोडा 2017 के बाद से रेन वॉटर हार्वेस्टिंग के मुख्य क्रूसेडर रहे हैं, उन्होनें विभिन्न चरणों में आरडब्ल्यूएच संरचनाओं का निर्माण शुरू किया तथा साथ ही कुछ निवासियों के संदेह को भी दूर करके अपनी परियोजना का हिस्सा बनाया।

संयोग से, रेन सेंटर के डॉ शेखर राघवन के मार्गदर्शन के साथ, प्रभा कोडा द्वारा सम्प की ओर जाने वाले पाइपों के नेटवर्क के लिए डिजाइन की संकल्पना की गई थी।

तर्कसंगत से बात करते हुए, हर्ष कोडा ने बताया कि पूरी परियोजना दो भाग में बँटी हुई थी। पहले चरण में, अपार्टमेंट के चार ब्लॉक के छतों से बारिश का पानी पाइप के द्वारा दो टैंकों में जमा की जाती है जहां सेडीमेंटशन होता है, और पानी के साथ बह कर आयी गंदगी साफ़ हो जाती है। फिर यह पानी 1 लाख लीटर क्षमता वाले भूमिगत सम्प में जमा करते हैं जहाँ से दूसरे चरण की शुरुआत होती है। तब पानी को एक ट्रीटमेंट प्लांट की तरफ घुमाया जाता है, जहां इसे रीसायकल कर फिर से उपयोग के लिए सुरक्षित बनाकर व्यक्तिगत फ्लैटों पर पंप किया जाता है।

 

 

गिरते भूजल स्तर को रोकना 

सबरी टेरेस में बनाये गए सम्प क्षेत्र के भूजल स्तर में वृद्धि को भी सुनिश्चित करते है। छत के चार कोनों से चार पाइप निकलते हैं, जिनमें से तीन सम्प नेटवर्क से जुड़े होते हैं जबकि चौथा भूजल को रिचार्ज करने के लिए पानी को सोखने वाले पिट में डाल दिया जाता है। वास्तव में, कभी-कभी सम्प से अतिरिक्त पानी निकलने की अवस्था में वाल्व का प्रयोग कर के अतिरिक्त पानी को भी सोक पिट में डाल दिया जाता है।

परियोजना के लिए हुए खर्च के बारे में कोडा ने खुलासा किया कि कुल 2.5 लाख रुपये खर्च किए गए हैं, और उसमें से बीते एक साल में ही  50,000 रुपये की बचत हुई है जो पहले टैंकर को दिए जाते थे| निवासियों ने स्वीकार किया कि परियोजना ने टैंकरों से खरीदे गए पानी पर उनकी निर्भरता को कम कर दिया है।

 

रखरखाव एक जरूरी पहलु है

“मुझे निश्चित रूप से हमारे हाउसकीपिंग टीम द्वारा किए गए अद्भुत प्रयासों को स्वीकार करना चाहिए जो हर दिन छत को साफ करते हैं, यह सुनिश्चित करते हुए कि हमें जलाशय में स्वच्छ वर्षा जल प्राप्त करें।”कोडा बताते हैं, “हम हर पाइप और स्टोरेज टैंक को हर 60-90 दिनों में साफ करते हैं।”

 

तर्कसंगत का तर्क

एक समय जब पानी की कमी अत्यधिक बारिश वाले क्षेत्रों समेत पूरे भारत में एक समस्या है, रेन वॉटर हर्वेस्टिंग (वर्षा जल संचयन) एक प्रभावी कदम हो सकता है, जिसके ज़रिये हम इस परेशानी से उबर पायें। हालाँकि, उचित जानकारी और योजना के अभाव में कई आरडब्ल्यूएच परियोजनाएं निष्क्रिय हो जाती हैं। सबरी टेरेस निवासियों द्वारा निर्धारित उदाहरण को अन्य लोगों और अपार्टमेंट्स द्वारा दोहराया जा सकता है। तर्कसंगत चेन्नई के नागरिकों द्वारा की गई इस पहल की सराहना करता है और आशा करता है कि अधिक लोगों को इसका महत्व पता चल सके।

 

 

 

 

 

 

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