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“हनुमान एक जनजातीय थे” फिर “हनुमान एक दलित थे” हमारे नेता इस देश को कहाँ ले कर जायेंगे ?

तर्कसंगत

November 30, 2018

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राजस्थान से इस बार एक राइट विंग समूह ने हिंदू भगवान हनुमान को दलित के रूप में संबोधित करने के लिए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को कानूनी नोटिस भेजा है। कानूनी नोटिस में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री से उनकी हानिकारक टिप्पणियों के लिए तीन दिनों के भीतर माफ़ी मांगी है।

बिजनेस स्टैंडर्ड के रिपोर्ट के अनुसार, इसके अलावा कांग्रेस ने भी चुनाव आयोग (ईसी) और राजस्थान के मुख्य निर्वाचन कार्यालय से 29 नवंबर को भगवान हनुमान पर टिप्पणी के लिए शिकायत दर्ज कराई है। कांग्रेस के जनरल सुशील शर्मा ने बिजनेस स्टैंडर्ड द्वारा रिपोर्ट की पुष्टि की है। कांग्रेस ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी की टिप्पणी सांप्रदायिक सद्भाव को बाधित कर सकती है।

 

“हनुमान वंचित और एक दलित थे “
द इंडियन एक्सप्रेस द्वारा रिपोर्ट के अनुसार 27 नवंबर को अलवर जिले राजस्थान में मालाखेड़ा में एक चुनाव अभियान रैली के दौरान आदित्यनाथ ने भगवान हनुमान को वनवासियों के रूप में बताकर सभा को संबोधित किया। “हनुमान एक वनवासी, वंचित और दलित थे। बजरंग बली ने सभी भारतीय समुदायों को एक साथ उत्तर से दक्षिण और पूर्व से पश्चिम तक जोड़ने के लिए काम किया”।

योगी आदित्यनाथ ने आगे कहा कि हनुमान ने समुदायों को जोड़ने पर काम किया क्योंकि यह भगवान राम की इच्छा थी, उन्होंने लोगों से भी ऐसा करने के लिए कहा। उन्होंने आगे कहा कि जिले में मतदाता ‘राम भक्त’ के लिए अपना वोट डालेंगे, न कि ‘रावण’ के लिए।

आदित्यनाथ के बयान के बाद, राजस्थान सर्व ब्राह्मण महासभा के अध्यक्ष सुरेश मिश्रा ने सीएम आदित्यनाथ को कानूनी नोटिस भेजा, इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार उन्होनें 7 दिसंबर को विधानसभा चुनावों से पहले योगी आदित्यनाथ पर  राजनीतिक लाभ के लिए हनुमान की जाति का उपयोग करने का आरोप लगाया।

मिश्रा के नोटिस में आदित्यनाथ ने बयान के द्वारा राजनीतिक लाभ लेने का प्रयास करने का आरोप लगाया गया। उन्होनें आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री ने कई भक्तों की धार्मिक भावनाओं को आहत कर दिया। “उनके बयान ने कई भक्तों की धार्मिक भावनाओं को नुकसान पहुँचाया है। जो लोग वंचित हैं उन्हें बाधाओं से लड़ने की ताकत मिलती है। मिश्रा ने कहा, “चुनाव में राजनीतिक लाभ लेने का यह एक बड़ा प्रयास है।”

कांग्रेस ने बीजेपी को दोहरी राजनीति का दोषी ठहराया और सांप्रदायिक तनाव पैदा करने के मुख्यमंत्री सीएम योगी पर आरोप लगाते हुए ईसी के सामने उनके खिलाफ शिकायत दर्ज कराई।

प्रमोद तिवारी, कांग्रेस नेता ने सीएम की टिप्पणियों की आलोचना करते हुए कहा कि भाजपा ने अतीत में व्यक्तियों और समाज को बाँटने के बाद जाति द्वारा देवताओं को विभाजित करना शुरू कर दिया है|

इसी प्रकरण में एक अन्य बदलाव सामने आया है, अनुसूचित जनजातियों (एनसीएसटी) के राष्ट्रीय आयोग के अध्यक्ष नंद कुमार साईं ने कहा कि भगवान हनुमान एक जनजातीय नहीं थे। “आदिवासी लोगों में एक हनुमान गोत्र है जैसे कि ‘गीधा’ गोत्र या ‘रीक्ष’ है। एक ‘तिग्गा’ गोत्र भी है जिसमें ‘तिग्गा’ का अर्थ है वानर या बंदर। विभिन्न जनजातीय समुदायों में अलग अलग गोत्र हैं। जब वे युद्ध में गए तो ‘गरुड़’ और ‘रीक्ष’ जैसे गोत्र भगवान राम की सेना का हिस्सा थे। द टाइम्स ऑफ इंडिया द्वारा रिपोर्ट में साईं ने कहा, हनुमान निश्चित रूप से दलित नहीं थे।

 

इससे पहले की घटनाएं
हालांकि, यह योगी आदित्यनाथ के लिए पहली बार नहीं है कि उनके बयान से विवाद उत्पन्न हुआ हो| मध्यप्रदेश चुनाव में भी उन्होनें भाजपा पक्ष से हनुमान और कांग्रेस पक्ष से अली के बीच चुनाव को लड़ाई के रूप में बताकर खलबली मचाई थी । एक वीडियो पर प्रतिक्रिया करते हुए जहां कांग्रेस नेता मुस्लिमों से अल्पसंख्यक समुदाय से 90% वोट सुनिश्चित करने के लिए कह रहे थे, सीएम योगी ने कहा, “अपने अली को रखें, बजरंग बली हमारे लिए पर्याप्त है,” एनडीटीवी की रिपोर्ट के अनुसार।

टाइम्स ऑफ इंडिया द्वारा रिपोर्ट के अनुसार छत्तीसगढ़ अभियान में भी आदित्यनाथ ने हनुमान को “सबसे प्रमुख जनजातीय में से एक” होने का दावा किया। उन्होंने कहा कि हनुमान ने वहाँ रहने वालों को राक्षसों से बचा कर उनकी मदद की और इसी तरह, बीजेपी राज्य में सकुशल और सुरक्षित राम राज्य लाने की कोशिश कर रही है।

आदित्यनाथ चुनाव अभियानों में पिछले बीस दिनों से कई जगहों पर जा रहे हैं, जिसमें अधिकांश अभियान में भीड़ को आकर्षित करने के लिए धार्मिक भावनाओं का उपयोग करते हैं। ऐसे पक्षपातपूर्ण अभियानों के बयान के लिए उनकी लगातार आलोचना की जा रही है।

 

तर्कसंगत का तर्क 

भारत, मानव संसाधन, गहन ज्ञान, प्रतिभा और बुद्धि से भरे पुरे देशों में से एक होने के बावजूद अभी भी एक विकासशील देश के रूप में गिना जा रहा है और विकसित देशों के समूह में जगह पाने के लिए बहुत लंबे समय से कोशिश कर रहा है। भारत न केवल एशिया में बल्कि दुनिया में महाशक्ति के रूप में उभरने की एक बड़ी इच्छा को बरकरार रखता है। यह केवल तभी संभव है जब इस दिशा में केंद्रित प्रयास किए जाएं। हमारे नेता, यदि उनके पास इच्छा है, तो यह संभव बना सकते हैं। उस समय जब कई भारतीय राज्य में चुनाव होने वाले हैं, तो चुनाव पक्षों का मुख्य एजेंडा विकास होना चाहिए। हालांकि, हमारे राजनेता अभी भी जनता के बीच धार्मिक और जाति से संबंधित भावनाओं को फ़ैलाकर लाभ प्राप्त करने की कोशिश कर रहे हैं। यह न केवल अनैतिक है और अराजकता फैलाने की क्षमता है, लेकिन यह निषिद्ध भी है। विशेष रूप से, जन प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 123 (3) के तहत, धर्म, जाति, इत्यादि के आधार पर अपील और विभिन्न वर्गों के बीच शत्रुता की भावनाओं के प्रचार भ्रष्ट अभ्यास को सम्मिलित करते हैं और इसी कारण से उन्हें चुनाव  याचिका द्वारा जवाबदेह भी बनाते हैं।

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