सचेत

सामाजिक प्रयोग से ले कर यथार्थ तक : बोतलबंद ताज़ी हवा अब ऑनलाइन भी उपलब्ध है

तर्कसंगत

December 3, 2018

SHARES

आप कुछ समय के लिए ताज़ी हवा में साँस लेने के लिए कितना खर्च करना चाहते हैं? 12.50 रुपये प्रति साँस या दस लीटर की बोतल के लिए 550 रुपये? अब जब कि बढ़ते प्रदूषण ने हमारी स्वच्छ और शुद्ध हवा में साँस लेने की आज़ादी को लूट लिया है, भारत में और यहां तक कि दुनिया भर में कुछ कम्पनी ऐसी भी हैं  जो ‘बोतलबंद ताजा हवा’ के कारोबार में प्रवेश कर रहे हैं।

 

गेल द्वारा प्रायोजित स्वच्छ वायु अभियान

2016 में प्रदुषण से दम घोंटती दिल्ली को निजात दिलाने के लिए गैस अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (गेल) ने एक अभियान प्रायोजित किया था जो एक प्रसिद्ध “एयर सेलर” के यूट्यूब वीडियो से प्रेरित था। यह एक सामाजिक प्रयोग था जिसके अनुसार दिल्ली में ताजा पैक की गई हवा बेचने का विचार पेश किया गया था। रिपोर्ट के अनुसार, सोशल क्लाउड वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड के सामाजिक उत्साही लोगों ने सामूहिक प्रयासों के साथ वायु गुणवत्ता के स्तर को बदलने का लक्ष्य अभियान शुरू किया था|

 

 

हालाँकि, यह केवल एक सामाजिक प्रयोग था, परन्तु आज एक पूर्ण वास्तविकता बन गई है जहाँ ऐसा लगता है ताज़ी हवा में साँस लेना, सचमुच एक एक घंटे की आवश्यकता बन गई है।

यहाँ यह कहने की भी ज़रूरत नहीं की ताज़ी हवा में सांस लेना हमारा जन्मसिद्ध अधिकार है मगर समय और परिस्थिति ने कुदरत से मिली नैमत को भी अधिकार के रूप में देखने और लड़ने के लिए तैयार कर दिया है| बड़े पैमाने पर औद्योगिकीकरण और पेड़ों की कटाई के कारण आज हम इस परिस्थिति से जूझ रहे हैं| भारतीय शहरों में विशेष रूप से दिल्ली एनसीआर क्षेत्र में वायु गुणवत्ता सूचकांक या एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) लाल रंग में ही रहता है। भारत और यहां तक कि दुनिया भर में कई कंपनियों ने इस हालात को भी अपने पैसा कमाने का साधन बना लिया है।

 

अब आप बोतलबंद साफ हवा भी खरीद सकते हैं

रिपोर्ट के अनुसार, उत्पाद तैयार होने के बाद से ही चीन के बाज़ार में बोतलबंद ताज़ी हवा के बिक्री में वृद्धि आयी है, हालाँकि भारतीय बाजारों में यह प्रवृत्ति भी बढ़ रही है। ‘वायटिलिटी एयर’ की सफलता के बाद, कनाडा स्थित स्टार्ट-अप जिसने 2016 में कनाडाई रॉकी से भारतीय उपभोक्ताओं तक डिब्बाबंद प्राकृतिक हवा बेची, साथ ही अन्य कंपनियों ने जल्द ही ताज़ी हवा के लिए इस नव निर्मित बाजार में अपनी पकड़ मज़बूत बनाने में जुट गयी। 2015 में एक स्टार्ट अप के रूप में शुरू होने वाली ‘वायटिलिटी एयर’ ने अपने उत्पादों को भारत में 3 लीटर और 8 लीटर के डिब्बे में 1,450 रुपये से 2,800 रुपये के मूल्य से बेचना शुरू किया है।

 

इस चीज़ को समझने के लिए हम शेयरकेयर के रिपोर्ट का सहारा लें तो हमें समझ आएगा कि एक सामान्य आदमी दिन के एक मिनट में 7 से 8 लीटर की हवा का खपत करता है जीवित रहने के लिए, जो की दिन भर में 11000 लीटर तक जा सकती है, अब अगर इन्हीं 11000 लीटर हवा के लिए आपको पॉकेट से पैसे निकालने पड़े तो आप सोच सकते हो की यह आपको कितना महंगा पड़ेगा|

 

 

स्वच्छ हिमालयी हवा
एक अन्य कंपनी, ‘प्योर हिमालयन एयर’ उत्तराखंड, चमोली, के पहाड़ों से ताजा हवा बेचने का दावा करते है। वे यह करते कैसे हैं? उनकी वेबसाइट में ऐसा लिखा है कि, “कोल्ड प्रेस कम्प्रेशन के उच्चतम मानकों का उपयोग करके, हम व्यक्तिगत कंटेनरों को सीधे स्थान पर भरते हैं।”

 

स्रोत :प्योर हिमालयन  एयर

 

वह आगे लिखते हैं “हमारी बोतलबंद हवा पहाड़ी स्रोत से बनी है और ऑक्सीजन, नाइट्रोजन, कार्बन के रूपों और अन्य स्वाभाविक रूप से पाए गए तत्वों का संयोजन है”। 10 लीटर की बोतल की कीमत 550 रुपये है, जिसे 160 बार साँस लिया जा सकता है।

 

 

स्रोत :प्योर हिमालयन  एयर

 

 

यह व्यापार यहीं तक सिमित नहीं इन दो कम्पनियों के अलावा ‘ऑज़ एयर’ नाम की एक ऑस्ट्रेलियाई कम्पनी भी है जो ऑस्ट्रेलिया की  ‘पोल्युशन फ्री एयर’ बेचने का दावा करती है| दूसरे कम्पनियों की तरह यह भी ऑनलाइन मार्किट में मिल सकती है| इनके 15 लीटर बोतल का दाम 2352 रूपये है जो डिस्काउंट कर के 1999 पर बेचीं जा रही है| नए ज़माने के व्यापार की तरह अब ताज़ी हवा ऑनलाइन बिक रही है|

 

स्रोत ऑज़एयर

 

 

द टाइम्स ऑफ़ इंडिया  के एक रिपोर्ट के मुताबिक ज़ेहरीली हवा से जूझ रहे दिल्ली वासियों के लिए राजधानी के सिनेमा घर और होटेल्स अपने ग्राहकों को एयर प्यूरीफायर के ज़रिये साफ़ हवा भी दे रहे हैं|

 

तर्कसंगत का तर्क 

स्वच्छ पानी, ताज़ी हवा यह सब कुदरत के तरफ से दी गयी पृथ्वी पर रह रहे सभी जीव जंतु के लिए एक उपहार है मगर, अपनी औद्योगीकरण और विलासिता की दौड़ में हमनें, पहले पानी को दूषित किया जिसका नतीजा रहा कि अब हम बोतलबंद मिनरल वॉटर पी रहे हैं या पीने को विवश हैं और साथ ही अब हम इस मुक़ाम तक आ गए कि साँस लेने वाली हमारी हवा भी इतनी दूषित हो गयी कि अब हम बोतलबंद हवा से साँस लेना पड़ सकता  है| हमें इस समस्या की गंभीरता को जल्द समझना होगा ताकि हम अपने आने वाले पीढ़ियों को दूषित पानी और हवा के खतरों से बचा सकें|

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

अपने विचारों को साझा करें

संबंधित लेख

लोड हो रहा है...