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महाराष्ट्र: 750 किलो प्याज़ के उचित मूल्य न मिलने के विरोध में, किसान ने सारे पैसे प्रधानमंत्री रिलीफ फण्ड में जमा कर दिए

तर्कसंगत

December 3, 2018

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खुले बाजार में प्याज की कीमतों में तेज गिरावट के साथ, देश भर में इस नष्ट होने वाले वस्तु को उपजाने वाले किसान संकट में हैं। कुछ ने ट्वीट करके इस परिस्थति को प्रधान मंत्री के संज्ञान में लाने की कोशिश की है, वहीँ महाराष्ट्र के एक प्याज उपजाने वाले किसान ने इससे एक कदम आगे बढ़कर चौंका देने वाला काम किया है।

 

किसान कम लागत पर प्याज बेचने के लिए मजबूर हैं 

नाशिक जिले के निफाद तहसील के निवासी संजय साठे ने इस सीजन में 750 किलोग्राम प्याज का उत्पादन किया था। पिछले सप्ताह साठे को निफाद थोक बाजार में केवल 1 रुपये प्रति किलो की दर से उनसे प्याज़ ख़रीदने की पेशकश की गई थी। एनडीटीवी ने बताया कि साठे ने पीटीआई से अपने अनुभव साझा किये काफी देर तक सौदेबाज़ी के बाद उन्होंने 750 किलोग्राम प्याज 1,064 रुपये बेचे। तब जाकर प्रत्येक किलोग्राम प्याज़ की कीमत 1.40 रुपये मिली|

उन्होंने उस पैसे के साथ जो किया उसने मीडिया का ध्यान अपनी ओर खिंचा। गिरते खरीद दामों के विरोध के रूप में, साठे ने पीएमओ के आपदा राहत कोष में पूरी राशि दान कर दी। उन्हें 29 नवंबर को मनी ऑर्डर द्वारा भेजने के लिए 54 रुपये अतिरिक्त राशि का भुगतान करना पड़ा।

“मैं किसी भी राजनीतिक दल का प्रतिनिधित्व नहीं करता हूं। लेकिन मैं अपनी पीड़ाओं के प्रति सरकार की उदासीनता के कारण नाराज हूं, “उन्होंने कहा।

 

संजय साठे ने पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति ओबामा से बातचीत की

दिलचस्प बात यह है कि, जब पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने 2010 में भारत का दौरा किया, तो केंद्रीय कृषि मंत्रालय ने साठे को कुछ ‘प्रगतिशील किसानों’ में से एक के रूप में चुना था, जिनके पास अमेरिकी राष्ट्रपति से बातचीत करने का अवसर था।

लंबे समय तक, साठे किसानों के लिए वॉयस-आधारित सलाहकार सेवा का उपयोग कर रहे हैं, जिसका उपयोग वे मौसम परिवर्तनों पर जानकारी प्राप्त करने के लिए करते हैं, जिससे समग्र उत्पादन के वृद्धि में मदद मिलती है। रिपोर्ट के अनुसार, उन्हें स्थानीय रेडियो स्टेशनों पर अपने कृषि प्रयोगों के बारे में बात करने के लिए भी आमंत्रित किया गया है, जिसे देखते हुए कृषि मंत्रालय ने उन्हें सेंट जेवियर्स कॉलेज, मुंबई के समिप एक स्टॉल स्थापित करने की इजाजत दी| जब अमेरिकी राष्ट्रपति ने दौरा किया तब उन्होनें बराक ओबामा से एक इंटरप्रेटर की मदद से संक्षेप में बात भी की।

 

भारत में प्याज उपजाने वाले किसानों की दुर्दशा

नासिक में भारत में उत्पादित कुल प्याज का 50% हिस्सा उगाया जाता है। प्याज की कीमतों में हालिया गिरावट भारत के किसानों के लिए संकट का कारण बन गई है। 1 दिसंबर को किसानों ने प्याज की कीमतों में गिरावट के खिलाफ मुंबई-आगरा राष्ट्रीय राजमार्ग पर विरोध प्रदर्शन किया था। कुछ किसानों ने भी विरोध के निशान के रूप में अपने सिर भी मुंडवाए थे।

किसानों ने दावा किया कि पिछले दो हफ्तों में प्याज की कीमतें फिसल रही हैं और सरकार इसे रोकने में असमर्थ रही है।

इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार किसानों ने उप-मंडल अधिकारी को अपनी मांगों का एक ज्ञापन भी प्रस्तुत किया। उन्होंने राज्य सरकार से मांग की है कि कम दाम मिलने के कारण हुए घाटों की भरपाई सरकार लाभकारी दामों में खरीद कर करे।

सिर्फ महाराष्ट्र में ही नहीं, बल्कि कर्नाटक के बेलगावी जिले के प्याज के किसानों ने पहले भी इसी तरह के विरोध का मंचन किया था और कीमतों में अचानक गिरावट के बाद कृषि उत्पादन विपणन समिति (एपीएमसी) के मुख्य द्वार को भी ताला लगा कर बंद कर दिया था।

इस गंभीर मुद्दे को सामने लाने के लिए संजय साठे का प्रयास केवल उन किसानों की दुर्दशा दिखाने का प्रयास है जिन्होंने प्याज पैदा करने के लिए चार महीने लगाए मगर उन्हें उचित मूल्य न मिल पाया। शीर्ष पर बैठे लोगों को इस मुद्दे पर ध्यान देना चाहिए और उचित पारिश्रमिक या समाधान प्रदान करके किसानों को उनके दुख से बाहर निकालना चाहिए।

 

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