मेरी कहानी

मेरी कहानी: मैं देश की ‘पहली महिला जासूस’ बन गई जिसके बारे में किसी ने पहले कभी नहीं सुना था

तर्कसंगत

December 3, 2018

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मैं कॉलेज में थी जब मैंने अपना पहला केस हल किया। मैं अपने कॉलेज के पहले साल में एक ऑफिस क्लर्क के रूप में पार्ट टाइम में काम किया करती थी। मेरे साथ काम करने वाली एक महिला ने मुझे अपने घर में लगातार हो रही चोरी के बारे में बताया। उसे अपनी नयी बहु पर शक़ था मगर सबूत के अभाव में वह किसी नतीजे पर नहीं पहुँच पा रही थी, तब मैंने उसे मदद करने की पेशकश की।

मैं शुरू से जिज्ञासु प्रविर्ती की थी, मेरे पिताजी के सीआईडी में होने के कारण मैंने उनसे पूरी तरह से जांच पड़ताल करने की कला में महारथ हासिल कर रखी थी| मैंने उसके घर आने जाने वाले सब लोगों पर नज़र रखी, और बाद में पाया कि उस महिला का बेटा ही चोर है| जब उससे चोरी के बारे में पुछा गया तो उसने अपना अपराध कबूल कर लिया, और वहाँ से मेरी जासूसी पेशे की शुरुआत हुइ| मैं उस वक़्त केवल 22 साल की थी|

और देखते देखते लोग मेरे बारे में पूछ पूछ कर अपना केस सोल्व करवाने के लिए मेरे घर आने लगे| मुझे न्यूज़ चैनल और अख़बार वालों ने भी संपर्क किया| कुछ ही समय में मैं देश की ‘पहली महिला जासूस’ बन गई जिसके बारे में किसी ने पहले कभी नहीं सुना था| यह एक कठिन काम था, मेरे माता पिता को भी इसके बारे में काफी समय के बाद पता चला|

जब मेरे पिता को पता चला, उन्होनें मुझे आगाह किया कि यह पेशा कितना खतरनाक है- लेकिन अगर वह कर सकते थे, तो मैं भी कर सकती थी|  मैंने अपनी जासूसी ज़ारी रखी। मैंने एक तरह से अपने काम से ही शादी कर ली थी, परिवार शुरू करने की न तो मेरी ईच्छा थी और न ही मेरे पास समय था।

मेरा सबसे कठिन केस एक हत्या के मामले में सबूत जुटाना था। जिसमें पति और बेटे दोनों की हत्या कर दी गई थी, लेकिन इसका कोई प्रमाण नहीं था कि यह किसने किया था? 6 महीने के लिए, मैं एक नौकरानी के रूप में उस महिला के साथ रही जिसपर हत्या का संदेह किया जा रहा था। जब वह बीमार पड़ गई, मैंने उसका ख्याल रखा और धीरे-धीरे उसका विश्वास जीता। लेकिन एक बार, सूनसान स्थिति में, मेरे रिकॉर्डर से ‘क्लिक’ की आवाज़ आई, और तब से उसने मुझ पर संदेह करना शुरू कर दिया वह मुझे घर से बाहर जाने नहीं दिया करती थी।

फिर एक दिन, जिस आदमी को उसने हत्या करने के लिए पैसे दिए थे उससे मिलने आया। मुझे पता था कि यही वह मौका है जब में भाग सकती थी| तो मैंने चाकू से अपना पैर काट लिया और उससे कहा कि मुझे मरहम पट्टी के लिए बाहर जाना पड़ेगा। मैं भाग कर सीधे एक एसटीडी बूथ पर गयी और अपने क्लाइंट को पुलिस के साथ आने को कहा। वे दोनों उस दिन गिरफ्तार हो गए|

मैंने तब से लगभग 80,000 मामले हल किए हैं। मैंने दो किताबें लिखी हैं, अनगिनत पुरस्कार जीते हैं और समाचार चैनलों पर मेरे इंटरव्यू भी आये हैं। मुझे यहाँ वहाँ से जान से मारने की धमकियां भी मिलीं  – लेकिन मेरा काम साफ है, मेरा दिमाग स्पष्ट है और मेरा साहस अविश्वसनीय है। लेकिन सबसे अधिक … मैं एक घरेलु, देसी शेरलॉक होम्स हूँ – एक शुरुआत के लिए मेरा बॉयोडाटा कैसा लगा ?

“I was in college when I solved my first case. I worked part time in my first-year as an office clerk. A woman who I…

Posted by Humans of Bombay on Tuesday, 30 October 2018

 

#SuperhumansOfBombay

 
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