पर्यावरण

वेस्ट मैनेजमेंट हमारे देश की सबसे बड़ी समस्या है, दो नए एंटरप्राइज हमें इनसे निपटने के नए और अनूठे तरीके बता रहे हैं

तर्कसंगत

December 3, 2018

SHARES

हमारा देश बड़ी ही तेज़ी से 21वीं सदी में खुद को सुपर पावर बनते हुए देखने के सपने की तरफ दौड़ रहा है, और उसमें ऐसा करने की पूरी क्षमता भी है| मगर इसके साथ साथ हमें अपने अरबों की आबादी वाले जनसँख्या के बीच पनप रहे कुछ मूल मुद्दों और परेशानियों को सुलझाने की तरफ भी कदम उठाने की आवश्यकता है| अभी सबसे प्रबल और गहन समस्या जो हमारे बीच खड़ी है वह है ‘वेस्ट मैनेजमेंट’ यानी के हमारे खुद के द्वारा उत्पन्न किये गए कचड़े का प्रबंधन| एक रिपोर्ट के अनुसार भारत हर दिन 1 लाख मीट्रिक टन सॉलिड वेस्ट उत्पन्न करता है। भारत में सॉलिड वेस्ट प्रबंधन शहरी स्थानीय निकाय यानि के अर्बन लोकल बॉडी (यूएलबी) की ज़िम्मेदारी है, हाँलाकि वित्तीय बाधाओं और आधारभूत कमियों के कारण, वे इस मुद्दे से प्रभावी ढंग से निपटने से चूक जाते हैं। यह समस्या केवल बढ़ती ही जाएगी जब तक कि हम इससे निपटने का ठोस तरीका न ढूंढ लें।

कुछ भी अच्छा करने का एक स्मार्ट तरीका क्या है? हमारे समाज को परेशान करने वाले सभी मुद्दों को हल करने के लिए पूरी तरह से सरकार पर भरोसा करने के बजाय, हम इन समस्याओं के लिए कारगर और टिकाऊ समाधान बनाएं। सम्पूर्णअर्थ और ग्रीनसोल ऐसे दो स्टार्टअप हैं जो हमारे बाजार की अर्थव्यवस्था का लाभ उठा रहे हैं ताकि हमारे बीच  #RecycleMoreWasteLess  की सोच को प्रोत्साहित किया जा सके।

मुंबई स्थित स्टार्टअप सम्पूर्णअर्थ, हमारे कचड़ों को रीसायकल कर के दोबारा से उपयोग में लाये जाने वाले संसाधन बनाने की कोशिश कर रहा है, वह भी पर्यावरण या हमें कोई क्षति पहुंचाए बिना। इसके संस्थापक देवब्रथा, जयंत और ऋत्विक हमारे देश में वेस्ट मैनेजमेंट के तरीके को बदलने की कोशिश कर रहे हैं। न केवल वेस्ट मैनेजमेंट, बल्कि वे एक ऐसी दुनिया की कल्पना करते हैं जिसमें कचड़ा उठाने वालों को हमारे समाज में योग्य सम्मान दिया जाए।

इंजीनियरिंग और सामाजिक उद्यमिता में मास्टर्स डिग्री के साथ, इसके संस्थापक जीरो वेस्ट मॉडल की कल्पना की प्राप्ति के दिशा में काम कर रहे हैं। सम्पूर्णअर्थ घर, सोसाइटी, कॉर्पोरेट कंपनी, टाउनशिप, स्कूलों, कॉलेज परिसरों से कचड़ा इकठ्ठा करता है। वे कचरे को बायोगैस और अन्य उपयोग करने योग्य संसाधनों में परिवर्तित करते हैं। इसके अलावा, वे रैग पिकर्स (कूड़ा, रद्दी उठाने वालों) को वेस्ट मैनेजर्स में बदल रहे हैं और उन्हें गरिमा के साथ सम्मानजनक आजीविका प्रदान करते हैं।

 

Recycle More Waste Less

India produces 1 lakh metric tonnes of solid waste daily. As traditional methods prove ineffective, Sampurn(e)arth, a DBS Bank supported start-up has come up with an innovative solution to revolutionize waste management in our country. #RecycleMoreWasteLess

Posted by The Logical Indian on Wednesday, 24 October 2018

 

 

दूसरी ओर, ग्रीनसोल के सह-संस्थापक रमेश और श्रीयांस को अच्छाई करने का एक अनोखा तरीका मिला है। उनकी अभिलाषा है कि हर पैर में जूते पहनाये जाएँ। इसके लिए वह हमारे फटे पुराने जूतों को उपयोग में लाते हैं जिन्हें हम उपयोग नहीं करते हैं और फिर इसे नएईको फ्रेंडली जूते में बदल देते हैं। वे वर्ल्ड हेल्थ आर्गेनाईजेशन की हालिया रिपोर्ट से प्रेरित थे, जिसके अनुसार दुनिया भर में 1.5 अरब लोग वैसी बीमारियों से संक्रमित हैं जिन्हें जूते पहन कर बचा जा सकता है। इसके अलावा, हर साल दुनिया भर में अनुमानित 350 मिलियन जोड़े जूते फ़ेंक दिए जाते हैं। ज़रूरतमंदों को जूते उपलब्ध कराने के लिए उन सभी फेंके हुए जूतों को संभावित रूप से अपग्रेड किया जा सकता है।

 

New Footwear From Discarded Shoes

Over 1.5 billion people are barefoot in the world making them susceptible to diseases. On the other hand, over 350 million discarded shoes end up in landfills every year. Greensole, a DBS Bank supported enterprise has taken up the noble cause to bridge this gap.#RecycleMoreWasteLess

Posted by The Logical Indian on Friday, 26 October 2018

ग्रीनसोल के सह-संस्थापकों को एहसास हुआ कि स्पोर्ट्स शूज के सोल से हम ग्रामीण स्कूलों और गांवों में लोगों के लिए चप्पल बना कर बाँट सकते हैं। उनकी इस पहल से उन्होंने अभी तक 72,000 जोड़े चप्पल जरूरतमंदों को मुहैया करा चुके हैं और उनका उद्देश्य 2018 में इसे 1 लाख तक बढ़ाने का लक्ष्य है। इसके अलावा, इस पर्यावरण के अनुकूल उद्यम से उन्होनें अनुमानित 3,60,000 पाउंड्स कार्बन डाइऑक्साइड एमिशन रोका है।

डीबीएस बैंक सामाजिक प्रभाव पैदा करने के पारंपरिक तरीके को दोबारा से उपयोग में लाना चाहता है, सामाजिक उद्यमी जैसे कि ग्रीनसोल और सम्पूर्णअर्थ  को पोषित और उनका मार्गदर्शन करके जो स्थायी रूप से एक समाज के निर्माण में योगदान दे रहे हैं। इस क्षेत्र के कई सामाजिक उद्यमों के लिए उत्प्रेरक होने के नाते डीबीएस बैंक अपने ब्रैंड के आचार “लिव मोर, बैंक लेस” के माध्यम से समाज में बदलाव लाने के सपने को साकार कर रहा है।

तर्कसंगत सम्पूर्णअर्थ , ग्रीनसोल और डीबीएस बैंक की सराहना करता है कि वह अपने सकारात्मक विचारों और कार्यों से समाज को  #RecycleMoreWasteLess के लिए इसी तरह से प्रोत्साहित करता रहे|

 

 

 

 

 

 

 

 

अपने विचारों को साझा करें

संबंधित लेख

लोड हो रहा है...