मेरी कहानी

मेरी कहानी: उसकी एक मुस्कान के लिए मैं सारे तनाव और परेशानी से गुज़र सकती हूँ|

तर्कसंगत

December 4, 2018

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जिस दिन हमें पता चला कि हम माँ बाप बनने वाले हैं उस दिन हमारी खुशी का ठिकाना न था| हम दोनों काफी उत्साहित थे अपने पहले बच्चे के लिए| हमनें उसका नाम ‘शौर्य’ रखा वह काफी प्यारा बच्चा था| लेकिन जल्द ही मुझे एहसास हुआ कि कुछ ठीक नहीं है| वह काफी रोता था और ख़ुद से खा भी नहीं पाता था| मैं परेशान और असहाय महसूस कर रही थी, जबकि लोग मुझे समझा रहे थे कि मैं बेकार में ही परेशान हो रही थी| मगर मुझे मालुम था कि कुछ तो सही नहीं है| मैं बस सब्र से इस समय के गुज़र जाने का इंतज़ार कर रही थी|

मेरे पति ने इस पूरे वक़्त मेरा काफी साथ दिया| मैं जब भी परेशान होती वह मुझसे अपनी परेशानी उनपर निकालने को कहते चाहे जिस किसी भी रूप में| हमारा बच्चा माइक्रोसेफाली नाम के बिमारी से ग्रस्त था जिसका मतलब था डिलेड ग्रोथ मतलब कि वह बाद बाकि बच्चों के समान तेज़ी से नहीं बढ़ पायेगा| मुझे विश्वास नहीं हो रहा था| एक अच्छे समय तक में शर्म, क्रोध और चिड़चिड़ेपन  से जूझ रही थी| मेरा बस एक ही सवाल था “मैं ही क्यों ?”

मैंने हर किसी को दोषी ठहराया खुद को, अपनी गर्भावस्था को, डॉक्टर को, सड़के के गड्ढों को या मेरी खुद की तनावपूर्ण ज़िन्दगी जिसके कारण यह सब हुआ| इस पूरे समय में मेरे पति ने मुझे उस परिस्थति को स्वीकार करने के लिए बराबर प्रेरित करते रहे| वह काफी सकारात्मक सोच रखते थे और उन्होंने मुझे भी विश्वास बनाये रखें को कहा| मैंने उस परिस्थति को गुज़र जाने दिया|

पहले तो काफी मुश्किल था| लोग आ कर मुझसे पूछते थे कि “उसे क्या हुआ है?” एक बार तो टैक्सी ड्राइवर उसके रोने से परेशान हो कर चिल्ला बैठा “इसको चुप कराओ”! लोग मुझे तरह तरह की नसीहत भी देते थे कि उसे क्या खिलाऊँ जिससे कि उसके दिमाग़ी बिमारी ठीक हो सकें|

मगर जब हम उसके फिजियोथेरेपी के लिए गए तो हमारी सोच बदल गयी, हमें एक नया नजरिया मिला| हमने देखा कि दूर दूर से माँ  बाप अपने बच्चों को लेकर आते थे, कुछ उम्र में काफी बड़े थे, कुछ की स्थति हमसे भी ख़राब थे| तब मुझे लगा कि मैं इतनी शिकायत क्यों कर रही थी?

तब हमने इस बात को स्वीकार किया की हमारा बेटा शौर्य स्पेशल है| कई लोगों को लगता है कि स्पेशल का मतलब है अबनॉर्मल, मगर इसका केवल यह मतलब है कि शौर्य की देखभाल वीआईपी की तरह की जाए| वह काफी संतुष्ट बच्चा है जिसे मैं जानती हूँ| वह हमेशा मुस्कुराता रहता है| जब उसकी तबियत ठीक न हो या हम किसी और काम में व्यस्त हो तब भी वह खुश रहता है और दूसरों को भी खुश रखता है| निःस्वार्थ भाव से दूसरों को प्यार करने की उसकी क्षमता हमें प्रेरित करती है| उसकी एक मुस्कान के लिए मैं सारे तनाव और परेशानी से गुज़र सकती हूँ|

मैंने उन लोगों को अनदेखा कर दिया जो मुझसे उसकी बिमारी के बारे में पूछते थे, या मुझे बेवजह की सलाह देते थे| मुझे गर्व है कि मेरा बेटा स्पेशल है और हो भी क्यों न ? ऐसे ही लोग हैं जो दुनिया में सबसे अलग हैं और दुनिया उन्हें पहचानती है| शौर्य छः साल का है| हम उसके मुंह से निकलने वाले पहले शब्द का इंतज़ार कर रहे हैं|  मेरे पति कहते हैं कि वो ‘पापा’ बोलेगा मगर मुझे मालुम है कि वह पहले ‘मम्मा’ ही बोलेगा|

 

“We both were on top of the world when we found out that we were going to have our first child! We named him Shourya –…

Posted by Humans of Bombay on Sunday, 18 November 2018

 

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