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पूर्व-सीजेआई दीपक मिश्रा “एक बाहरी दबाव में काम करते थे, रिमोट कंट्रोल से संचालित थे”: न्यायमूर्ति कुरियन जोसेफ

तर्कसंगत

December 5, 2018

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सेवानिवृत्त सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति कुरियन जोसेफ ने अपने हालिया बयान में कहा है कि भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा को कोर्ट के बाहर से नियंत्रित किया जाता था। उन्होंने आगे दावा किया कि मिश्रा कुछ चुने हुए मामलों को राजनीतिक रूप से पक्षपाती न्यायाधीशों को आवंटित किया करते थे। इस मुद्दे पर पहले ही, न्यायमूर्ति जोसेफ और तीन अन्य वरिष्ठ न्यायाधीशों, जस्टिस जस्ती चेलेश्वर, रंजन गोगोई और मदन बी लोकुर ने 12 जनवरी को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित किया था।

 

मिश्रा बाहरी दबाव में काम किया करते थे 

जस्टिस मिश्रा के नियुक्ति के चंद महीनों में क्या बदलाव आये उसे बताते हुए न्यायमूर्ति जोसेफ ने कहा, “ऐसे कई उदाहरण हैं जहाँ सुप्रीम कोर्ट न केवल बाहरी दबाव में काम करता था बल्कि कुछ महत्वपूर्ण केसों को चुनिंदा जजों को ही दिया जाता था, इसके साथ हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के जजों की नियुक्ति भी बाहरी दबाव में होती थी।

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट में कुरियन ने आगे कहा कि चूँकि उन्हें लगा कि मिश्रा बाहरी दबाव में काम कर रहे थे, उन्होंने सीजेआई से “सर्वोच्च न्यायालय की आजादी और महिमा बनाए रखने” के लिए कहा। लेकिन जब उनके प्रयास सफल नहीं हुए, तो उन्हें एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित करना पड़ा।

भारतीय न्यायप्रणाली में पहले कभी न हुए उस ऐतिहासिक प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुख्य न्यायधीश के काम करने के तरीके पर सवाल उठाये गए थे| जज बी एच लोया की संदिग्ध मौत की जांच की मांग करने वाली याचिका पर बेंच के समक्ष चर्चा हुई थी। 19 अप्रैल, 2018 को जज लाया की मौत में किसी भी तरह की संदिग्धता को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज़ कर दिया था|

209 पन्नों में लिखे  रिट आपराधिक याचिका में वकील सतीश महादेरोरो उके ने नागपुर खंडपीठ के समक्ष उन्होनें यह आरोप लगाया कि जज बृजगोपाल हरकिशन लोया दिल की मृत्यु दिल के दौरे से नहीं बल्कि रेडियोएक्टिव आइसोटोप पॉइज़निंग से हुई। उन्होंने अपनी ज़िन्दगी पर मंडरा रहे खतरे की भी शिकायत की थी।

 

 अभूतपूर्व प्रेस कॉन्फ्रेंस

एक अभूतपूर्व प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से 12 जनवरी को न्यायमूर्ति जोसेफ और सर्वोच्च न्यायालय के तीन अन्य वरिष्ठ न्यायाधीशों अपना विद्रोह ज़ाहिर किया। प्रेस कॉन्फ्रेंस में, न्यायाधीशों ने राजनीतिक पक्षपात से ग्रसित जजों को कुछ महत्वपूर्ण केस दिए जाने के फैसले पर चिंता ज़ाहिर की।

29 नवंबर को सेवानिवृत हुए जस्टिस कुरियन ने कहा कि “पहले के चीफ जस्टिस बाहरी दबाव में काम करते थे, वह बाहर से रिमोट कंट्रोल से संचालित थे|”

बिज़नेस स्टैण्डर्ड के अनुसार हालाँकि उनसे यह पूछे जाने पर कि वह “बाहरी दबाव” कौन हैं ? उन्होनें कुछ जवाब नहीं दिया| जस्टिस कुरियन के अनुसार वह प्रेस कांफ्रेंस चारों जजों की सहमति से बुलाई गयी थी| वायर के अनुसार जस्टिस चेलमेश्वर ने उस प्रेस कॉन्फ्रेंस को “असाधारण ” की संज्ञा दी थी|

जस्टिस चेलमेश्वर ने बताया कि “हमनें न्यायधीश मिश्रा को मनाने की कोशिश की कि कुछ चीजें सही नहीं हैं और ठीक करने की जरूरत है। दुर्भाग्य से, हमारे प्रयास विफल रहे। हम सभी का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट को अपनी गरिमा बनाए रखनी चाहिए। न्यायमूर्ति चेलमेश्वर ने कहा, लोकतंत्र मुक्त न्यायपालिका के बिना जीवित नहीं रहेगा।

 

न्यायमूर्ति कुरियन जोसेफ

एक सामान्य पृष्ठ्भूमि से आये न्यायमूर्ति जोसेफ अपने पेशे में दृढ़ संकल्प के साथ आगे बढ़े| अपने करियर में, उन्होंने 1,000 से अधिक डिटेल्ड जजमेंट लिखे हैं और 8,612 मामलों का निपटारा किया है। सर्वोच्च न्यायालय में उनका कार्यकाल पांच साल और आठ महीने का रहा है।

उन्होंने 1979 में 26 साल की उम्र में केरल उच्च न्यायालय में अपना प्रैक्टिस शुरू किया, जहां उनके पिता क्लर्क के रूप में काम किया करते था। उनकी वृद्धि तब शुरू हुई जब 1994 में केरल के एडिशनल अधिवक्ता जनरल नियुक्त किए गए। 1996 में, उन्हें एक वरिष्ठ वकील के रूप में नियुक्त किया गया था।

न्यायमूर्ति कुरियन ने उल्लेख किया कि उनके लिए वह पल काफी गर्व भरा था, जब उन्होनें उसी स्थान पर न्यायाधीश के रूप में शपथ ली जहाँ उनके पिता क्लर्क के रूप में काम किया करते थे। उनके पिता की आय सात बच्चों वाले घर को चलाने के लिए पर्याप्त नहीं थी। उन्होंने कहा, “मैं स्कूल नंगे पांव जाता था और जब मैं कक्षा 7 में था तब मुझे मेरी पहली चप्पलें मिलती थीं। लेकिन हमने शिकायत करने का भी सोचा नहीं क्योंकि कठिनाई जीवन का एक हिस्सा था।”

वह ईश्वर से कोई भी केस लेने से पहले यह प्रार्थना करते हैं कि उनके खुद के ज्ञान में कमी के कारण, और केस की सम्पूर्ण तैयारी के अभाव में कोई न्याय से वंचित न हो जाये| जब भी वह कोई मामला उठाता है तो न्यायमूर्ति जोसेफ के होंठ पर एक ही प्रार्थना होती है कि वह अपने ज्ञान की कमी और अपने हिस्से पर पर्याप्त तैयारी के कारण न्याय को किसी व्यक्ति के लिए कभी भी इनकार नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि वह हर केस की फाइल को पूरी तरह से पढ़ते थे।

 

 

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