मेरी कहानी

मेरी कहानी: उसने मुझे गले लगाया और कहा, ‘धन्यवाद बाबा’ और मेरी सारी परेशानी ग़ुम हो गयी – मुझे लगा जैसे मैं कुछ सही कर रहा था।

तर्कसंगत

December 6, 2018

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यह कहने की ज़रुरत नहीं है कि हर माता-पिता अपने बच्चे को हर संभव संसाधन और अवसर देने के लिए वास्तव में कड़ी मेहनत करते हैं। अपने बच्चे को समृद्ध देखना हर माता पिता का सपना होता है, और इसके लिए वे वह किसी भी हद चाहे इसके लिए अपने सपनों और ज़रूरतों को दबाना पड़े। ऐसा नहीं है कि वे इससे व्यक्तिगत लाभ की उम्मीद करते हैं, लेकिन जब बच्चे उनके बलिदान समझने लगते हैं, तो उनकी खुशी को कोई सीमा नहीं होती है। यह एक ऐसे ही माता-पिता की कहानी है।

“मेरे पिता एक किसान थे-हम बमुश्किल से अपनी ज़रूरतों को पूरा कर पाते थे। जब मैं 18 वर्ष का था, भयंकर सूखा पड़ा था हमारे गांव की झील सूख गई, और हम भुखमरी के कगार पर थे। यही वह समय था जब मैं कुछ पैसे कमाने और अपने परिवार का दखभाल करने के लिए बॉम्बे आ गया था। मुझे एक डाकघर में नौकरी मिल गई और माने घर पर पैसा भेजना शुरू कर दिया। मैंने अपने पूरे जीवन में उस डाकघर में काम किया। मैं कुछ साल पहले सेवानिवृत्त हुआ लेकिन फिर एक चौकीदार के रूप में नौकरी कर ली क्योंकि मेरे 2 बच्चे अभी भी पढ़ रहे हैं और मेरा सबसे बड़ा डर यह है कि उन्हें अपनी पढ़ाई बीच में न छोड़नी पड़े।

हाल ही में, मेरे बेटे को विज्ञान और गणित दोनों में 100 अंक प्राप्त करने के लिए कॉलेज में सम्मानित किया गया था- उन्होंने मुझे बधाई देने के लिए मंच पर भी बुलाया! मैं बहुत फ़क़्र महसूस कर रहा था, मैं अपने आँसू नहीं रोक सका।

समारोह के बाद, उसके दोस्त अपने माता-पिता के साथ एक रेस्तरां में खाने के लिए गए – मुझे शर्मिंदगी महसूस हो रही थी कि मैं अपने बच्चे को कभी भी उस तरह का जीवन नहीं दे सकता- हमारा पैसा फीस और किताबों में ही खर्च हो जाता है। हम सब ने उस रात घर पर ही सामान्य भोजन खाया। मुझे लगता है कि मेरे बेटे को एहसास हुआ कि मैं क्या महसूस कर रहा था, इसलिए रात के खाने के बाद, उसने मुझे गले लगाया और कहा, ‘धन्यवाद बाबा’ और मेरी सारी परेशानी ग़ुम हो गयी – मुझे लगा जैसे मैं कुछ सही कर रहा था। ”

 

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