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गुजरात: सर्जन ने 32 किलोमीटर दूर बैठ कर रोबोटिक पद्धति से हार्ट सर्जरी की

तर्कसंगत

Image Credits: News18

December 6, 2018

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द हिंदू की सूचना के अनुसार चिकित्सा विज्ञान के इतिहास में पहली बार, अहमदाबाद के सर्जन डॉ तेजस पटेल ने 5 दिसंबर को रोगी से 32 किलोमीटर दूर बैठ कर एक सफल टेलीरोबॉटिक सर्जरी की। डॉक्टर पटेल ने गांधीनगर के अक्षरधाम मंदिर में बैठकर ह्यूमन टेलीरोबॉटिक कोरोनरी इंटरवेंशन के ज़रिये इस प्रक्रिया को अंजाम दिया|

 

रोबोटिक सर्जरी 

मध्यम आयु वर्ग की महिला, जिसे पहले दिल का दौरा किया था इस सर्जरी का हिस्सा बनने के लिए खुद से तैयार हुईं। मुख्य कार्डियोलॉजिस्ट तेजस पटेल ने टेलीरोबॉटिक पद्धति की मदद से इस सर्जरी को ‘एपेक्स हार्ट इंस्टीट्यूट’ के ऑपरेशन थियेटर में लेटे रोगी पर सफ़लतपूर्वक ऑपरेशन किया। टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार, कुछ दिनों पहले महिलाओं ने एंजियोप्लास्टी करवाई थी, और अब सर्जन ने रोबोटिक प्रक्रिया के माध्यम से दूसरे धमनी से भी ब्लॉकेज हटा दिया है।

 

चिकित्सा विज्ञान में अविस्मरणीय उपलब्धि 

यह चिकित्सा पद्धति आगे चल कर इलाज़ का रुख बदल सकती है और ग्रामीण इलाकों में अस्पतालों में बिताए गए समय को कम कर सकती है। “इस तकनीक के साथ, हमने 32 किमी दूर से ऑपरेशन करना शुरू किया लेकिन जल्द ही हम उन रोगियों का इलाज कर सकते हैं जो 300 या 3000 किमी की दूरी पर हैं। डॉ पटेल अहमदाबाद मिरर से कहते हैं, “इस तकनीक में दूरदराज के इलाकों को शामिल किया जाएगा और इससे अस्पताल में रहकर इलाज़ करवाने वाले समय में कटौती आएगी।”

डॉ पटेल को 2015 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया था और उन्होनें गुजरात के अहमदाबाद में ‘द एपेक्स हार्ट इंस्टीट्यूट’ की स्थापना की जो अमेरिका से बाहर पहला अस्पताल है जहाँ यह सुविधा उपलब्ध है कि  टेलीरोबॉटिक पद्धति से हार्ट का ऑपरेशन किया जा सके। दुनिया की पहली शल्य चिकित्सा ‘कोर पैथ’ द्वारा एक पेटेंट प्रौद्योगिकी के माध्यम से की गई थी, जिसे एक अमेरिकी कॉर्पोरेट, कॉर्ंडस वास्कुलर रोबोटिक्स इंक द्वारा विकसित किया गया था।

 

रोबोटिक सर्जरी क्या है?

प्रति सेकंड इंटरनेट नेटवर्क के सौ मेगाबाइट्स के उपयोग के साथ, उन्होंने चिकित्सा इतिहास में एक उपलब्धि बनाई है। पूरे प्रक्रिया का खर्च 15 लाख़ के आसपास का होता है साथ ही कार्डियोलॉजिस्ट की खुद की कुशलता जो उसे सही फैसला लेने में मदद करती है। डॉ तेजस पटेल और डॉ संजय शाह दोनों ने  इस पूरी प्रक्रिया को साथ में अंजाम दिया, डॉ शाह मुख्यतः स्टंट लगाने की प्रक्रिया में मदद कर रहे थे।

रोबोटिक प्रणाली में तीन भाग होते हैं – एक कैथ लैब जहां एक इंटीग्रेटेड आर्म स्थापित की जाती है, दूसरा कॉकपिट जहां से डॉक्टर जॉयस्टिक से रोबोट को कमांड करते हैं और तीसरा एक कनवर्टिबल कैसेट की सहायता से , चिकित्सीय सामग्री को कंट्रोल किया जाता है  करता है। इसके अलावा, अस्पताल में स्थापित कोर पैथ के जीआरएक्स के रोबोटिक स्टेंटिंग मानव सर्जन के 5-10 मिमी के बजाय उप-1 मिमी की शुद्धता की सुविधा प्रदान करता है।

तर्कसंगत सफलतापूर्वक सर्जरी करने के लिए डॉ तेजस पटेल को बधाई देता है। हमें आशा है कि ऐसी तकनीक भौगोलिक बाधाओं को तोड़ के देश के सुदूर इलाकों में सर्जरी की सुविधा प्रदान करेंगे, जहां बुनियादी चिकित्सा स्वास्थ्य देखभाल अभी भी कम है।

 

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