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पानी के संकट से प्रेरित किसान के बेटे ने बिना बिजली से चलने वाली फ़िल्टर बनाई

तर्कसंगत

December 10, 2018

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लगभग पाँच साल पहले, जब इंजीनियरिंग छात्र जितेंद्र ने अपने मित्र के साथ राजस्थान का दौरा किया, तो वह पानी के संकट की गंभीरता को देख कर चिंतित थे। जितेंद्र तर्कसंगत को अपना अनुभव बताते हैं और कहते हैं कि  “मैंने देखा कि लोग एक खाट पर बैठकर स्नान करते थे और नीचे एक बर्तन रखते थे। फिर उसी पानी को कपड़ों को धोने, पौधों या अन्य घरेलू कामों पुन: उपयोग किया जाता था”। पानी की भारी कमी को देखते हुए, उन्हें यह समझ में आया कि मनुष्य पानी के निर्माण में असमर्थ हैं। यह एक अमूल्य संसाधन है जिसे केवल रीसायकल और पुन: उपयोग किया जा सकता है। वह हमेशा से नए डिजाइन खोजने के इच्छुक रहे हैं, इसलिए “सबसे युवा वैज्ञानिक” पुरस्कार से सम्मानित जीतेन्द्र ने एक कम लागत वाली किन्तु प्रभावी वॉटर फ़िल्टर तैयार किया है जो गंदे पानी को साफ़ कर सकता है और भारत में सूखे प्रभावित गांवों के लिए समाधान हो सकता है जहाँ बिजली की भी सुविधा न हो।

 

रखरखाव का खर्च हर साल केवल 540 रुपये है

अनुमान बताते हैं कि पीने और खाना पकाने में हमारे पानी के उपयोग का केवल 20% हिस्सा ही काम आता है, जबकि बाकी 80% का उपयोग धुलाई, सफाई, स्नान, फ्लशिंग आदि के लिए किया जाता है। जितेंद्र का उपकरण “शुधम” ऐसा पहला पानी फ़िल्टर है जो प्रति दिन 500 लीटर गंदे पानी को फ़िल्टर कर के, इसे पीने या खाना पकाने के अलावा सभी घरेलू उद्देश्यों के लिए उपयुक्त बनाता है। रखरखाव के साथ मशीन की कीमत 7000 रुपये से भी कम है, जो प्रति वर्ष केवल 540 रुपये तक आता है।

 

 

फिल्टर कैसे काम करता है
इतना ही नहीं, “शुधम” पूरी तरह से मैकेनिकल है और इसलिए कोई बिजली खर्च नहीं होता है। गुरुत्वाकर्षण इस मशीन के पीछे मूल सिद्धांत है जहाँ, साफ़ पानी फ़िल्टर प्रक्रियाओं की एक श्रृंखला से गुज़रने के बाद सबसे नीचे के भाग से निकलता है। एक्टिव कार्बन अल्ट्राफिल्टरेशन के बाद ग्रैनुलर सीविंग पानी को पुन: उपयोग के लिए मिनटों में तैयार करता है। इसके अलावा, मशीन को एंटी-चोक तंत्र के साथ लगाया जाता है जो शुद्ध पानी के साथ प्रवाह या गंदगी को पानी में मिलने से रोकता है।

शुधम छह महीने में नब्बे हजार लीटर पानी तक रीसायकल कर सकता है, जिसके बाद फिल्टरिंग ग्रैन्यूल को बेहतर प्रभावशीलता के लिए बदलने की आवश्यकता होती है।

निम्नलिखित वीडियो शुधम जल फ़िल्टर के पूरे कार्य प्रणाली  को दर्शाता है।

 

 

आविष्कार को एक पेटेंट का इंतजार है

मध्य प्रदेश के रतलाम के एक दूरस्थ गांव से रहने वाले जितेंद्र चौधरी एक छोटे पैमाने पर किसान परिवार से आते हैं। पैसा चार लोग के मेहनती परिवार के लिए हमेशा बाधा रही है, लेकिन जितेंद्र ने एक इंजीनियर के रूप में प्रमुखता प्राप्त करके अपनी प्रतिभा साबित कर दी है। 25 वर्षीय प्रतिभाशाली ने पहले से ही एक से अधिक पेटेंट दायर कर चुके हैं , जिसमें एक वॉटर फ़िल्टर – शुधम भी शामिल है। वर्तमान में उज्जैन में अपने कॉलेज में एक शोध सहायकके रूप में जितेंद्र काम कर रहे हैं और उन्होनें अपने कॉलेज परिसर के साथ-साथ आसपास के पड़ोसी गाँव में भी उस मशीन का नवीनतम प्रोटोटाइप स्थापित किया है। एक बार उनके पेटेंट को मंजूरी मिलने के बाद उनकी टीम राजस्थान और आसपास के सूखे क्षेत्रों में विस्तार करने की योजना बना रही है और मशीन को व्यावसायिक रूप से बेचने की भी तैयारी कर रही है।

 

 

सभी के लिए संदेश

आव्श्यक्ता ही आविष्कार की जननी है। फिर भी, आज भारत में, कई युवाओं को मुख्य रूप से आत्मविश्वास और सकारात्मक प्रेरणा की कमी के कारण लगातार समस्याओं के लिए नए समाधान खोजने से दूर भागते हैं। एक उत्साही जितेंद्र आग्रह करते हैं , “मैं सभी को अपने रचनात्मक विचारों के साथ आगे आने के लिए प्रोत्साहित करता हूं ताकि एक साथ हम अपनी मातृभूमि को रहने के लिए एक बेहतर जगह बना सकें।” वह उम्मीद करते हैं कि उनकी कहानी कई युवा पुरुषों और महिलाओं को कम आय वाले पृष्ठभूमि से अपने सपने को आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित करेगी।

 

भारत में पानी की कमी खतरनाक स्तर तक बढ़ रही है साथ ही जलवायु परिवर्तन के साथ, ग्रामीण कृषि आबादी की समस्याओं में वृद्धि देखि जा सकती है। जितेंद्र के ‘शूधम’ जैसे मॉडल में भारत के सूखाग्रस्त इलाकों और जो क्षेत्र गरीबी से भी पीड़ित है के लिए टिकाऊ समाधान प्रदान करने की हर क्षमता है। तर्कसंगत जितेंद्र के ईमानदार प्रयासों की सराहना करता है ऐसे ही अन्य आविष्कारों के लिए शुभकामनायें देता है।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

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