मेरी कहानी

मेरी कहानी: “पैसा ख़ुशी खरीद सकता है और पैसे ने ख़ुशी ख़रीदी। अगर आप गरीब होंगे तब इस चीज़ को महसूस कर पायेंगे|”

तर्कसंगत

December 10, 2018

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मेरे घर के बगल में एक सुंदर पार्क है। यहाँ हर साल दुर्गा पूजा मनाई जाती है। आसपास के मोहल्लों के बहुत से लोग देवी की पूजा करने आते हैं। बहुत सारे गेम स्टॉल, फूड स्टॉल और यहां तक ​​कि गारमेंट सेल स्टॉल भी लगते हैं। बच्चों के लिए कई मनोरंजन झूले भी हैं। मेरी दोस्त कुहू अवस्थी और मैं जायंट व्हील के पास खड़े अपने बचपन की यादें ताज़ा कर रहे थे। बच्चे बहुत ज़ोर से चिल्ला रहे थे। उनकी खुशी को सिर्फ देखा ही नहीं सुना भी जा सकता था। जब हम यह सब देखकर संतुष्ट हुए, तो हमने घर वापस आने का फैसला किया। जैसे ही हम घर जाने को घूमे, हमने वहीं पर खड़ा एक छोटा बच्चा देखा।

वह बस बिना हिले खड़े होकर सबसे बड़े झूले को घूर रहा था। बच्चे जायंट व्हील पर चढ़ते और उतरते रहे, लेकिन इस बच्चे के पास वास्तव में सवारी के लिए न तो साहस था न ही पैसे थे| वह मंज़र मेरे लिए काफी दुःख देने वाला था। उसके कपड़े फटे थे, बाल में गंदगी थी, लेकिन उसकी आँखें … उसकी आँखें निर्दोष मासूम थीं। एक पल के लिए मैंने सोचा, वह क्या सोच रहा होगा? लेकिन जब तक कि मैं यह सोच रही थी, कुहू आगे बढ़ी और उससे पूछा, “क्या तुम झूले के उपर जाना चाहते हो?”

मैं और वह लड़का दोनों ही अचंभित हो गये थे। वह बुत की तरह खड़ा था शायद वह समझ में नहीं पाया, या शायद वह उम्मीद नहीं करता था कि कोई उसे नोटिस करेगा।

कुहू ने फिर से पूछा, “क्या तुम झूले के उपर जाना चाहते हो?”

इस बार, उसने हाँ में जवाब दिया।

उसने बच्चे का हाथ पकड़ा और उसे जायंट व्हील के पास ले गयी। उसने झूले के मालिक को पैसे दिए और उस बच्चे को जायंट व्हील पर बैठाने को कहा, वह भी अचंभित था मगर चूँकि  उसे उसके पैसे मिल गए थे उसने हमसे कुछ सवाल नहीं किया।

बच्चा डर गया था। वह इतना पतला था कि 2 और बच्चे एक ही केबिन में बैठ सकते थे। कुहू ने उसे कस के पकड़ने का निर्देश दिया और उसने ठीक वही किया जो उसे बताया गया था। व्हील ने घूमना शुरू कर दिया और एक चक्कर लगने के बाद भी वह डरा हुआ था। हम चिंतित हो गए और सोचा कि हमें उसे नीचे ले आना चाहिए। लेकिन दूसरे चक्कर के बाद हमने अपना सोच बदल दिया। वह हँस रहा था, बहुत खुश था, उसकी आंखें यह सब कह रहीं थीं। शायद अब उसे यह एहसास होने लगा था कि वह वास्तव में उस झूले पर था। शायद आखिरकार उसने विश्वास किया कि वह सिर्फ झूला देख नहीं रहा था, बल्कि वह इसमें सवारी कर रहा था। वह अन्य बच्चों की तरह चिल्ला रहा था। हमने उसकी तरफ देख कर हाथ हिलाये और उसने भी एहि किया। उसकी खुशी की कोई सीमा नहीं थी और हम भी हमारे अंदर ऐसा ही महसूस कर रहे थे।

लोग कहते हैं, “पैसा खुशी नहीं खरीद सकता!”
मैं कहती हूँ , “पैसा ख़ुशी खरीद सकता है और पैसे ने ख़ुशी ख़रीदी। अगर आप गरीब होंगे तब इस चीज़ को महसूस कर पायेंगे|”

मेरी इच्छा है कि, किसी दिन, मेरे देश के बच्चों को वह चीज़ देखने को न मिले जो वह नहीं खरीद सकते।
मेरी इच्छा है कि किसी दिन, इस देश के बच्चों को सड़कों पर भीख़ न माँगनी पड़े …
मेरी इच्छा है कि, किसी दिन, हम अमीर और गरीबों के बीच समानता प्राप्त कर पायें।

मेरी इच्छा है कि किसी दिन हर बच्चे को कम से कम अपने बचपन में रहने का मौका मिलता।
किसी दिन!

 

कहानी: मेघना अथवाणी

 

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