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नाबालिक लड़की के अदम्य साहस ने उसे मानव तस्करों से बचाया, माँ बाप ने पैसों की ख़ातिर बेच डाला था

तर्कसंगत

Image Credits: India.com

December 10, 2018

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बिहार की एक नाबालिक लड़की ने अपनी साहस और सूझबूझ से मानव तस्करों के चँगुल से भाग निकली, जिसे 1.5 लाख रुपये के लिए उसी के माँ बाप ने 50 साल के बुज़ुर्ग को बेच दिया था। बिहार के नवादा जिले की रहने वाली लड़की को बाद में कैमूर में अपने विवाहित चचेरे भाई के यहाँ भेजा गया, जहाँ उसने अपने ही माता-पिता के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई।

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार सब डिविज़नल पुलिस अफसर (एसडीपीओ), अजय प्रसाद के अनुसार, उन्हें और नवादा जिले के एसपी को सूचित करने के बाद पीड़ित के माता-पिता और दो अन्य सहयोगियों के खिलाफ लड़की के बयान के आधार पर शून्य प्राथमिकी (ज़ीरो एफआईआर) दर्ज की गई है।

 

मानव तस्करी का मामला 

15 वर्षीय पीड़िता का दावा है कि, उसके माता-पिता ने उसे झारखंड में शादी के लिए एक आदमी को बेच दिया। उसने आरोप लगाया कि उसके माता-पिता और चाचा ने भी उससे झूठ बोला था, क्योंकि उन्होंने उसे आश्वासन दिया था कि ख़रीददार केवल उसे अपने साथ रखेगा और उसकी आगे की पढ़ाई का ख़्याल रखेगा। लड़की ने आगे कहा कि, विरोध करने पर उसे बेहोश कर दिया गया और गिरिडीह में बलपूर्वक ले जाया गया, जहाँ उस आदमी ने उससे बलात्कार करने का प्रयास किया।

हिंदुस्तान टाइम्स के अनुसार लड़की ने बयान दिया है कि “मेरे माता-पिता के अलावा, मेरे दो चाचा ने मुझे बेचने से पहले मुझे बेहोश किया। जब मैं होश में आयी, तो मैंने विरोध किया और दूल्हे के साथ जाने से इनकार कर दिया। लेकिन मेरे माता-पिता और चाचा ने मुझे धोखा दिया, कहा कि वह आदमी मुझसे शादी करने का कोई इरादा नहीं रखता है|”

पीड़िता कक्षा 9 की छात्रा है, वह तस्करों के हाथ से भागने में कामयाब रही मगर जब वह अपने घर पहुँची तो उसके माता-पिता ने उसे पीटा और कहा कि उसके लिए उनके घर में कोई जगह नहीं, उसे अब केवल “अपने पति” के घर में ही जगह मिलेगी।

 

बचाव अभियान

लड़की के मुताबिक, अपराधी (उसके पति) ने उसे पुणे में 6 लाख रुपये में बेचने की योजना बनाई थी और उसे ट्रेन से पुणे ले जा रहा था, उसने अपने भागने की योजना खुद बनाई और उसमें सफल रही।

किसी तरह से वह इलाहाबाद स्टेशन पहुँची, और मदद के लिए हताश और परेशान थी, उसने अपने साथ बीती घटना वहाँ उपस्थित कुछ ट्रांसजेंडर लोगों को बताया, जिन्होने आगे उसकी मदद की और उसे पंडित दीन दयाल उपाध्याय स्टेशन ले जाया गया जहाँ से वह अपने विवाहित चचेरे भाई के घर बेयर गांव (कैमूर जिले) में लायी गयी।

 

ट्विस्ट

जैसे ही लड़की की माँ को घटना के बारे में पता चला, वह बेयर गाँव पहुँची और लड़की को अपने “पति” के घर लौटने के लिए मनाने की कोशिश करने लगी। हालाँकि, लड़की ने ऐसा करने से साफ़ इनकार कर दिया।

इसके बाद, माँ ने नाबालिग लड़की का अपहरण करने के लिए लड़की के देवर बब्बू पांडे समेत अन्य रिश्तेदारों पर आरोप लगाने का फैसला किया। रिपोर्टों के मुताबिक, नवादा पुलिस इस मामले की जाँच कर रही है, और विभिन्न वक्तव्यों की पुष्टि की जा रही है, पोस्को और बाल विवाह अधिनियमों के तहत कार्रवाई किये जाने की उम्मीद है।

 

तर्कसंगत का तर्क 

बिहार राज्य कुख्यात रूप से बाल तस्करी का पर्याय बन गया है, और संख्याएं एक गंभीर तस्वीर प्रकट करती हैं – ह्यूमन लिबर्टी नेटवर्क जो एक सोशल ग्रुप है जो बचाव और पुनर्वास में मदद करता है, उसके अनुसार, लगभग 2000 बच्चे हर साल राज्य से गायब हो जाते हैं। अकेले 2015 में, बिहार ने देश में तीसरे सबसे ज्यादा ऐसे मामलों (332) की घटनायीं देखी हैं, एशियन ऐज की रिपोर्ट।

इस अपराध के खिलाफ लड़ाई ज़ोर पकड़ रही है – 2017 में भारत-नेपाल सीमा पर सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) के कर्मियों ने 160 गिरफ्तारियों कीं और 560 लोगों को बचाया गया।

तर्कसंगत का मानना है कि समस्या की गंभीरता सार्वजनिक जागरूकता के साथ सरकार से सख्त उपायों और प्रयासों की माँग करती है, जो कि देश में बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का एकमात्र  तरीका है।

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