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भारतीय सरकार के लिए ख़ुशख़बरी-ब्रिटेन के कोर्ट ने माल्या के प्रत्यर्पण का आदेश दिया

तर्कसंगत

Image Credits: Indian Express

December 11, 2018

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लंदन से भारत सरकार के लिए अच्छी खबर आयी है, लंदन में वेस्टमिंस्टर मजिस्ट्रेट्स कोर्ट ने शराब बैरन विजय माल्या को प्रत्यर्पित करने का आदेश दिया है। बिज़नेस टाइकून माल्या भारत में लोन धोखाधड़ी के मामले में दोषी पाए गए हैं, जो कि अनुमानित 9000 करोड़ रुपये की राशि के बराबर है। भारत की शीर्ष जाँच एजेंसी, केंद्रीय जाँच ब्यूरो (सीबीआई) ने इस फैसले का स्वागत किया है। इस फैसले के खिलाफ अपील करने के लिए  माल्या के पास अब 14 दिन का समय है|

इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, माल्या के भारत में प्रत्यर्पण के आदेश के दौरान, यूके के मुख्य मजिस्ट्रेट न्यायाधीश एम्मा अर्बुथनोट ने कहा कि पहली बार केस को देखने से यह साफ़ ज़ाहिर है कि यह विजय माल्या के खिलाफ धोखाधड़ी, षड्यंत्र और मनी लॉंडरिंग का मामला है। अदालत के फैसले के बाद, माल्या के पास अब अपने प्रत्यर्पण आदेश के खिलाफ अपील दायर करने के लिए 14 दिन हैं। प्रत्यर्पण का मामला अब यूनाइटेड किंगडम होम ऑफिस (गृह मंत्रालय के ब्रिटिश समकक्ष) को भेजा जायेगा, जहां गृह सचिव साजिद जाविद मजिस्ट्रेट कोर्ट के फैसले के आधार पर एक आदेश पारित करेंगे।

“द इंडियन एक्सप्रेस द्वारा रिपोर्ट के अनुसार इस बीच, सीबीआई ने माल्या के प्रत्यर्पण आदेश का स्वागत किया है। इस कदम का स्वागत करते हुए, एक सीबीआई प्रवक्ता ने कहा, “हम जल्द ही उन्हें लाने और इस मामले को समाप्त करने की उम्मीद करते हैं। सीबीआई की अपनी अंतर्निहित शक्तियां हैं। हमने इस मामले पर कड़ी मेहनत की। हम कानून और तथ्यों पर मजबूत हैं और प्रत्यर्पण प्रक्रिया का पालन करते समय हमें विश्वास था।

 

माल्या वापस भुगतान करने की पेशकश कर चुके हैं

इससे पहले, 5 दिसंबर को, माल्या, जो विदेश में प्रत्यर्पण ट्रायल से गुजर रहे थे, ने बैंक के लोन का 100 प्रतिशत भुगतान करने की पेशकश की थी। यूके की अदालत के माल्या के प्रत्यर्पण मामले पर फैसले देने के सिर्फ पाँच दिन पहले, ट्वीट्स के द्वारा माल्या ने भारत सरकार से अपने पैसे ले लेने को कहा था। माल्या के ट्वीट्स उस वक़्त आये जब ब्रिटेन के “बिचौलिये” क्रिस्चियन मिशेल को ऑगस्टा वेस्टलैंड वीवीआईपी हेलिकॉप्टर सौदे में कथित भूमिका के लिए प्रत्यर्पित कर दिया था।

भारतीय बैंकों को भुगतान करने की पेशकश करते हुए माल्या ने कहा, “एयरलाइंस उच्च एटीएफ कीमतों के कारण आर्थिक रूप से संघर्ष कर रही थी। किंगफिशर एक फैब एयरलाइन थी जिसने 140 डॉलर प्रति बैरल की सबसे ज्यादा कच्ची कीमतों का सामना किया। घाटे बढ़ गए और यही वजह है जहाँ बैंक के पैसे गए थे।”

उन्होंने आगे कहा कि “उनका प्रत्यर्पण का मामला अलग है और अपना समय लेगा”। लोगों के पैसे को महत्व देने की बात करते हुए वह भारत सरकार से सभी पैसे लेने की पेशकश करते हैं। वह कहते हैं, “सबसे महत्वपूर्ण बात सार्वजनिक धन का है और मैं 100% वापस भुगतान करने की पेशकश कर रहा हूँ । मैं विनम्रतापूर्वक बैंकों और सरकार से यह अनुरोध करता हूँ कि वह पैसा वापस ले लें।”

 

पैसा जो कभी वापस ही नहीं 

एनडीटीवी के अनुसार, 62 वर्षीय विजय माल्या ने कई बैंकों से भारी ऋण लिया था। 2016 में, कुछ बैंक मिलकर एक साथ सुप्रीम कोर्ट पहुँचे और 9,000 करोड़ रुपये से अधिक की बकाया राशि वसूलने के लिए माल्या के खिलाफ कानूनी कार्यवाही शुरू की।

द टाइम्स ऑफ इंडिया भारत छोड़ने के बाद, माल्या ने पहले दावा किया था कि वह देश छोड़ने से पहले वित्त मंत्री अरुण जेटली से मिले थे, हालाँकि, उन्होंने बाद में अपने बयान से पीछे हटकर कहा कि उनके और जेटली के बीच कोई औपचारिक बैठक नहीं हुई और मंत्री से संसद में केवल इत्तेफ़ाक़ से मुलाक़ात हुई थी।

पिछले साल फरवरी में, भारत ने औपचारिक रूप से माल्या के प्रत्यर्पण के लिए कहा था। इस साल की शुरुआत में, “लंबी चुप्पी तोड़ने के बाद” माल्या ने प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र लिखा था कि वह बैंकों को उनकी बकाया राशि देने के लिए अपनी तरफ से प्रयास कर रहे हैं। हालाँकि, उन्हें मीडिया चैनलों द्वारा बैंक डिफ़ॉल्ट का  “पोस्टर बॉय” बना दिया गया और सार्वजनिक क्रोध का सामना करना पड़ा था। उन्होंने आगे कहा कि उन्हें अपने पत्र का सरकार से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली है।

 

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