मेरी कहानी

मेरी कहानी: हम एक पीढ़ी थे जिसने कमी देखी थी, कड़ी मेहनत, नैतिक मूल्यों से पैदा हुई थी, इसके अलावे और कुछ नहीं था

तर्कसंगत

December 11, 2018

SHARES

मेरी बेटी और मेरे अपनी अलग अलग राय हैं और हमारी अपनी वैचारिक भिन्नता है। उदाहरण के लिए, अगर हम बाहर हैं, तो कई बार चीजें काफी अजीब हो जाती हैं, उदाहरण के लिए, अगर मैं अपनी बेटी के साथ हवाईअड्डे में प्रवेश कर रही हूँ और यदि एयरलाइन कर्मचारि और एक परेशान यात्री के बीच कोई बहस हो रही है, तो मुझे लगता है कि मुझे हस्तक्षेप कर मामलों को हल करना चाहिए। मेरी बेटी मुझे हमेशा ऐसी परिस्थितियों से दूर ले जाती है, ‘माँ, यह तुम्हारी लड़ाई नहीं है, यह पर्सनल नहीं है। मुझे वादा करो कि आप शामिल नहीं होंगे ‘। मैं नई पीढ़ी की इस तरह की प्रतिक्रिया से परेशान और भ्रमित हो जाती हूँ। क्या यह उदासीनता है या हम निरंकुश होते जा रहे हैं ? मेरी पीढ़ी को सिखाया गया था कि ऐसी चीजें हमेशा व्यक्तिगत होती हैं।

घर पर और काम पर युवा पीढ़ी को देखने के बाद, मुझे लगता है कि हम मानव ‘रेवोलुशन टू एवोलुशन ‘ के चरण से आगे बढ़ रहे हैं। हम एक पीढ़ी थे जिसने कमी देखि थी, कड़ी मेहनत, नैतिक मूल्यों से पैदा हुई थी, इसके अलावे और कुछ नहीं था। हर दिन एक संघर्ष था, हर कारण व्यक्तिगत था और हर मील का पत्थर माउंट एवरेस्ट पर चढ़ने के रूप में महान उपलब्धि की अनुभूति कराता था। जैसे ही हमारे खिलाफ बाधाएं खड़ी थीं; चाहे वह एक बड़े संयुक्त परिवार में एक जवान लड़की के रूप में हो, चाहे वह नर-वर्चस्व वाले ऑफिस में एक युवा महिला के रूप में हो, एक युवा कामकाजी माँ जो कई कामकाज करने की क्षमता रखती हो – आपको खुद के अस्तित्व के लिए हर दिन लड़ना पड़ता था की लोग को हमारी मौजूदगी का एहसास हो ! हमें सलाहकार, नेताओं, नायकों की तलाश करने के लिए प्रोग्राम किया गया था|

नई उम्र के साथ, लगभग सब कुछ बदल गया है। आज की आधुनिक,आत्मनिर्भर,आत्मविश्वास पीढ़ी को खुद के जवाब ढूंढने के लिए या अपनी आवाज़ उठाने के लिए अब सहारे की ज़रूरत नहीं है। वे आत्म-सम्मान से भरे हैं उन्हें, गाइड या सलाहकार की तलाश नहीं है: खुद की सहायता करना उनके लिए हर प्रॉब्लम का सोल्युशन है। कॉरपोरेट सीढ़ी पर चढ़ना, या बॉस द्वारा तारीफ़ पाना उनके लिए पर्याप्त नहीं है। यह सब गलत नहीं हो है लेकिन यह उन्हें समाज और अपनों से दूर करता है। नई पीढ़ी के पास काम करने का अपना तरीका है। वे अपने स्वयं के लक्ष्यों पर काम कर रहे हैं, अपने स्वयं के लक्ष्यों को स्थापित कर रहे हैं, अपने भविष्य को बना रहे हैं, और अधिक उद्यमी और जोखिम ले रहे हैं।

वे खुद पर विश्वास करते हैं। वे खुद से नए ज़माने को शक्ल दे रहे हैं, लेकिन एक नार्सिस्ट रूप में नहीं, बल्कि आत्म-जुनूनी तरीके से और सकारात्मक, प्रगतिशील तरीके से।

इसीलिए, जेनेरशन एक्स, पुराने जनरेशन के साथ जुड़ने में कठिन संघर्ष करते रहते हैं। पीढ़ियों से हमें जो कुछ मापदंड और मूल्य सौंपे गए हैं, इस नए जनरेशन से उसे चुनौती मिल रही है। मिलेनियल जनरेशन कारों या घरों या गहने के मालिक नहीं बनना चाहते थे, वह सबसे पहले मिलने वाले अमीर साथी के साथ घर बसाने को भी तैयार नहीं रहते थे ; न ही वे बहुराष्ट्रीय कंपनियों की नौकरी छोड़ कर खुद का कुछ शुरू करने की चाह नहीं रखते थे।

यह समय है कि जनरल एक्स  यह समझ जाए कि व्यक्तिगत नहीं है, बाहर एक अलग दुनिया है और यह समय है कि हम इसे गले लगाएं। मिलेनियल पीढ़ी हमारी बनाई हुई एक शानदार रचना है,और मुझे इस पर गर्व है। माता-पिता को आमतौर पर इस जनरेशन एक्स के साथ तालमेल बैठाने में परेशानी आती है। हमें इस अंतर को ख़त्म करने का एक तरीका ढूंढना होगा।

मैंने अपनी बेटी को हाल ही में ‘मैडम तुसाद’ ले कर गयी। मैंने उसे उत्साहित हो कर कहा, “तुम अपने पसंदीदा नायक के साथ एक तस्वीर खिंच सकती हो ” वह वास्तव में भ्रमित दिखी और मुझसे कहा, “माँ, मैं खुद अपने जीवन की नायक बनना चाहती हूँ।” और फिर मैंने दोबारा से पुनर्मूल्यांकन किया – यह पीढ़ी हमारी सफलताओं के साथ जीना नहीं चाहती, वे स्वयं अपना रास्ता बनाएंगे।”

 

कहानी: मनीषा गिरोत्रा

 

अगर आपके पास भी दुनिया को बताने के लिए एक प्रेरक कहानी है, तो हमें अपनी कहानी [email protected] पर भेजें

 

अपने विचारों को साझा करें

संबंधित लेख

लोड हो रहा है...