सप्रेक

पहली बार, दिल्ली से 26 वर्षीय ट्रांसमेन पुरुषों की श्रेणी में बॉडीबिल्डिंग चैंपियन बने

तर्कसंगत

Image Credits: Aryan Pasha/ Facebook

December 12, 2018

SHARES

1 दिसंबर को, दिल्ली के 26 वर्षीय आर्यन पाशा ने भारत में राष्ट्रीय बॉडीबिल्डिंग चैम्पियनशिप में एक पुरस्कार प्राप्त करके इतिहास बनाया। बेशक, आज के जिम-जाने वाली युवाओं के लिए, बॉडीबिल्डिंग प्रतियोगिता में भाग लेना और जीतना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन पाशा के लिए यह एक अलग बात थी।

 

पहला ट्रांसमैन जिसने बॉडीबिल्डिंग प्रतियोगिता जीती है

“मसलमेनिआ 2018” भारत की मेंस फीज़ीक (शार्ट) केटेगरी में दूसरे पुरस्कार के विजेता के रूप में, पेशे से वकील पाशा, ऐसा करने वाले देश के पहले ट्रांसमेन बन गये हैं। उनकी हाल की उपलब्धि जिम में घंटों कसरत, सख्त दिनचर्या और उनकी  कठोर जीवनशैली का परिणाम है।

तर्कसंगत से बात करते हुए  आर्यन, जो 27 वर्ष के हैं , ने कहा कि वह हमेशा खेल और एथलेटिक्स की सभी चीजों में रुचि रखते हैं। “मैं स्कूल में एक स्पीड स्केटर था और फिर मैंने कुछ समय बास्केटबाल खेला,” उन्होंने कहा। बॉडीबिल्डिंग में  हमेशा से उनकी रूचि रही है और 2014 में, उन्होंने जिम जाना शुरू किया था। हालाँकि, चैंपियनशिप में भाग लेने का तब कोई इरादा नहीं था।

अपने दुबले शरीर को आकर्षक बनाने के प्रयास के रूप में जो शुरू हुआ वह धीरे-धीरे एक जुनून में बदल गया जिसके बिना जीवित नहीं रह सकता था। वह पहले तो संयुक्त राज्य अमेरिका में ट्रांस-फ़िटकॉन नामक एक ऑल-ट्रांस बॉडीबिल्डिंग प्रतियोगिता में भाग लेना चाहते थे। हालाँकि, वीजा न मिलने के कारण उन्होनें “मसलमेनिआ 2018” में भाग लिया।


महीनों की  कड़ी मेहनत

उन्होंने कहा, “2017 में, मैं मसलमेनिआ में भाग लेना चाहता था, हालाँकि, जब मैं प्रशिक्षण कर रहा था, मुझे डेंगू हुआ और इसलिए मुझे एक साल वापस बैठना पड़ा।” अपने दुबले शरीर के पुनर्निर्माण का संघर्ष और भी चुनौतीपूर्ण था। हालांकि, जिम में घंटों के कड़ी मेहनत के बाद अंत में उनके लिए उपयोगी परिणाम सामने आया। कर्मठ  आर्यन ने अपने सपने को आगे बढ़ाने के लिए एक वकील के रूप में अपनी आकर्षक नौकरी छोड़ दी।

महीनों के प्रशिक्षण के बाद भी, उसकी तुलना में परिणाम मिलने में अधिक समय लग रहा था। उन्होनें कहा, “मैं पहले निराश हो गया, मेरे शरीर में कोई अंतर नहीं आ  रहा था, हालाँकि, मैं आगे बढ़ रहा था और मायूस नहीं हो रहा था।”

 

चार महीने तक, उन्होंने जिम में हर दिन छः घंटे बिताए, एक ऐसे शरीर को बनाने के लिए प्रशिक्षण किया जिसका वह सपना  देखा करते थे । यहाँ तक कि उनके साथियों ने उनसे कहा कि वह तैयार नहीं थे, लेकिन आर्यन को, गहराई से पता था कि यही वह समय था। हालाँकि, चैंपियन बनने की उनकी  यात्रा में एक और मुश्किल थी। मसलमेनिआ एक प्राकृतिक बॉडीबिल्डिंग प्रतियोगिता है जो टेस्टोस्टेरोन समेत हार्मोन की खुराक के उपयोग को मान्यता नहीं देती है – जिसे पाशा को सर्जरी के बाद हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी के हिस्से के रूप में हर 21 दिनों में लेना पड़ता था। आयोजकों ने उन्हें पुरुषों की श्रेणी में प्रतिस्पर्धा करने की इजाजत दी, लेकिन उन्होंने प्रतियोगिता से पहले अंतिम खुराक छोड़ने के लिए कहा।

 

बदलाव से पहले का  जीवन

1991 में जन्मे आर्यन का नाम नायला था, बचपन से ही उन्हें यह एहसास हुआ कि वह एक लड़की की तरह महसूस नहीं करते। उन्होंने कहा, “मेरे पास हमेशा लड़कियों की तुलना में अधिक पुरुष मित्र होते हैं और मैं लड़कों के कपड़े पहनता था।” आर्यन के साथ अच्छी बात यह थी कि उनके माता-पिता का प्यार और समर्थन जो बाद बाकि लोगों को नहीं मिलती थी। यद्यपि अपने किशोरावस्था में उन्हें दिक्क्तें हुईं, मगर उनके परिवार के प्यार और भावनात्मक समर्थन ने आर्यन को अविश्वसनीय शक्ति प्रदान किया। एक समय जब भारत में खुले तौर पर ट्रांसमैन स्वीकार्य नहीं थे, दिल्ली में रहने वालीं  आर्यन की मां ने सेक्सुअल रीअसाइनमेन्ट सर्जरी (एसआरएस) के विचार को पेश किया।

 

उन्होंने कहा, “मैं 17 वर्ष का था, जब मैंने एक वर्ष तक शोध किया और भारत में अन्य ट्रांसमेन लोगों से मिला। मेरे परिवार ने भी मेरे परिवर्तन को शुरू करने के लिए डॉक्टरों की तलाश की।” आखिरकार उनकी पहचान बदलने का काम उनके, 18 वर्ष की उम्र में शुरू हुआ।

लड़कों की बास्केटबाल टीम में खेले जाने वाले आर्यन को अपनी पहचान पहले छिपानी पड़ी। उनके कोच के सिवाय  कोई नहीं जानता था कि वह कौन था। उन्हें डराए जाने या धमकाने का लगातार डर बना रहता था। खुद को बदलने के बाद, आर्यन ने अंततः स्वतंत्र महसूस किया। एक आदमी के रूप में उनकी नई पहचान ने उन्हें अपने सपने को आगे बढ़ाने का विश्वास दिया।

 

आर्यन की सक्रियता

अपने परिवर्तन के बाद, आर्यन अन्य ट्रांसमेनों के लिए एक वकील और आशा की किरण बन गए। उन्होंने और उनके परिवार ने आर्यन जैसे अन्य लोगों के लिए अपने घर के दरवाज़े  खोले हैं , जिन्हें भावनात्मक समर्थन और सर्जरी के बाद की देखभाल की आवश्यकता थी। उन्होनें कहा, “मेरे जैसे कई लोग मेरे घर आते हैं। उनके पास उनके परिवारों का समर्थन नहीं है जैसा मुझे मिला।”

समावेश और समानता के लिए एक वकील के रूप में आर्यन ने सरकार से सभी समावेशी खेल टूर्नामेंटों के समर्थन और बढ़ावा देने का आग्रह किया – कुछ ऐसा जो भारतीय और अंतरराष्ट्रीय खेलों में काफी कमी है। वह विश्व स्तर पर अपने समुदाय का प्रतिनिधित्व करने के लिए कड़ी मेहनत करने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा, “साथ आइये, मैं ट्रांसमैन और पुरुषों की श्रेणियों में अंतर्राष्ट्रीय बॉडीबिल्डिंग और फिटनेस फेडरेशन (आईबीएफएफ) में प्रतिस्पर्धा करूँगा।”

कड़ी मेहनत और दृढ़ दृढ़ता के साथ, आर्यन पाशा कई लोगों को प्रेरित करते हैं । तर्कसंगत की  कम्युनिटी उनकी उपलब्धियों की सराहना करता है और उनके भविष्य के प्रयास के लिए उन्हें शुभकामनाएं देता है।

 

अपने विचारों को साझा करें

संबंधित लेख

लोड हो रहा है...