मेरी कहानी

मेरी कहानी: माँ पापा को हवाई अड्डे पर छोड़ने के बाद सायन तक की टैक्सी का सफर मैं कभी नहीं भूल सकती

तर्कसंगत

December 12, 2018

SHARES

मैं अपने माता-पिता को मुंबई के टी 1 डोमेस्टिक टर्मिनल पर सुबह 5:00 बजे छोड़ने गयी थी, उनकी फ्लाइट मुंबई से 6.30 बजे से गुवाहाटी तक की थी। उन्हें छोड़ने के बाद, मैंने अपने कॉलेज (टीआईएसएस, मुंबई) तक जाने के लिए एक टैक्सी लेने का सोचा। मैंने ओला / उबर की बुकिंग करने के बारे में सोचा लेकिन फिर इसके बजाय काली-पीली टैक्सी लेने का विचार किया और टैक्सी स्टैंड की तरफ चलना शुरू कर दिया। मैंने कुछ लोगों से पूछा, तो उन्होंने कहा कि मुझे टैक्सी लेने के लिए मेन रोड पर जाना होगा या तो मुझे इसे हवाई अड्डे से ही प्री बुकिंग करनी पड़ेगी। हालाँकि, कम से कम एक ऑटो मिलने की उम्मीद में, मैं आगे बढ़ती जा रही थी।

 

तभी एक अधेड़ उम्र का आदमी मेरे पास आया पूछा ‘मैडम टैक्सी?”  मैं आश्चर्यचकित थी लेकिन मैं खुश भी थी कि मुझे हवाईअड्डे के अंदर से ही एक टैक्सी मिल गयी और मैंने उनसे कुछ सवाल पूछा जिसकजा उसने बड़े विनम्रता से जवाब दिया। मैंने उससे कहा “दादा मीटर से जयंगे ना”? उसने हाँ जवाब दिया और फिर उसने मुझे चिंता न करने के लिए कहा क्योंकि वह अपने यात्रियों को धोखा देने में विश्वास नहीं करता है क्योंकि भगवान ऐसे लोगों को माफ नहीं करता है, और मुझे अपने पीछे आने के लिए कहा। मैं उसके साथ 5 मिनट चलती रही और उससे पूछा कि उसने टैक्सी इतनी दूर क्यों पार्क की गई है, तो उसने मुझे हवाईअड्डा नीतियों के बारे में कुछ अजीब से कारण बताये जिसे सुन कर मैं भी अचंभित थी, खैर मैं ज्यादा नहीं सोचना चाहती थी सुबह के 5.20 बजे थे, मेरी आँखें नींद से भारी थीं। एक बार जब मैं टैक्सी के अंदर गयी, तो मैंने एक बार फिर से कहा “दादा मीटर से जायेंगे ना?” और उसने जवाब दिया “हाँ मैडम, आप चिंता बहुत  करती हैं”। जैसे ही उसने कार स्टार्ट की, खूब सारी बातें करना शुरू कर दी, जो की मुझे थोड़ा अजीब लग रहा था।

 

मैंने उसके अजीब व्यवहार से घबरा रही थी लेकिन खुद को शाँत रहने के लिए मैंने खुद से कहा और सोचा कि यह मेरे  अधिक सोचने और घबराने की आदत है। उसने मुझसे पूछा कि मैं कहाँ से थी, मेरे माता-पिता कहाँ थे, मैं मुंबई में क्या कर रही थी और हर बात के बाद वह मुझसे कहता, ‘मैडम आप शांति से सो जाओ जब हम आपके घर जगह पहुँच जायेंगे  तो मैं आपको जगा दूँगा।’ हर बार जब मैं यह सुनती, तो मैं पहले से कहीं ज्यादा सतर्क हो जाती और मुझे पता था कि कुछ गलत था, लेकिन मैंने खुद को शाँत रहने को कहा। वह मुझे देखता और मीटर को देखता, तकरीबन 20 मिनट तक यही चलता रहा। जब हम सायन पहुँचे तो मीटर ने ‘750 रूपये’ दिखाया। मैं पूरी तरह से चौंक गयी, भौंचक्की रह गयी और मुझे मेरी आँखों पर विश्वास नहीं हो रहा था और मैंने उसे इतनी अधिक कीमत के कारण के बारे में पूछना शुरू कर दिया और उसने एक मुस्कुराहट के साथ जवाब दिया: “मैडम इतना ही होता है, शायद आपको नहीं पता”। उस पल में मुझे पता था कि मुझे बेवकूफ़ बना रहा है, लेकिन मैं टैक्सी से नीचे उतर सकती थी क्योंकि सायन के पास 6:00 बजे कोई अन्य टैक्सी या ऑटो नहीं था और अभी भी काफी अंधेरा था जिससे में डरी हुई थी। मैं उस समय अपने आप पर इतनी नाराज हो रही थी और मैं उसके चेहरे पर एक गंदे मुस्कुराहट देख सकती थी जो मुझे परेशान कर रहा था। मैंने खुद को यह कहा कि यह आखिरी बार था जब मैं हवाई अड्डे से काली-पीली टैक्सी ले रही थी और टीआईएसएस परिसर सुरक्षा गार्ड के सामने 1000 सवाल पूछने की योजना बना रही थी।

 

थोड़ी देर आगे जाने के बाद उसने अचानक अपनी टैक्सी को रोक दिया और कहा कि “मेरे पास पेट्रोल नहीं है, कृपया मुझे मेरा पैसा दें और नीचे उतरें।”  मैं उस समय काफ़ी गुस्से में थी क्योंकि उसने मुझे धोखा देने की कोशिश की थी और फिर एक ही समय मेंमुझसे बदसलूकी कर रहा था। मैंने कहा “दादा मैं यहाँ से कैसे जाऊँगी, जिस पर उसने जवाब दिया, “मुझ नही पता मुझे मेरे पैसे दे दो और निकलो”। एक व्यक्ति जो कुछ मिनट पहले इतने प्यारा होने का नाटक कर रहा  था मेरे परिवार और मेरे बारे में मुस्कुराते हुए बात कर रहा था अचानक से उसका व्यवहार बिल्कुल बदल गया था। इस तरह की सभी घटनाएं जिन्हें मैंने पहले सुना था मुझे याद आ गयीं मैं बहुत डर गयी थी। फिर उसने खुद 5 सेकंड के भीतर कहा, “ठीक है, मैं आपको थोड़ा आगे ले जाऊंगा” और इससे पहले कि मैं समझ सकूँ कि क्या हो रहा था, कार आगे बढ़ा दिया और 5 मिनट के भीतर रोक दिया और कहा “बस हो गया”। जब उसने कार को पहली बार पाँच मिनट पहले रोका था तब मैंने उसे 1000 रुपये दिया था और मीटर में  किराया 800 दिखा रहा था। इसलिए मैंने उनसे 200 रुपये वापस देने के लिए कहा।वह मेरे ऊपर बुरी तरह चिल्लाया और कहा, “मैं खाली गाड़ी एयरपोर्ट ले जाऊंगा तो उसका पैसा कौन देगा तेरा बाप?”। मैं लड़खड़ा गयी और कहा “ये तो गलत है, ऐसा नही करना चाहिये”। वह फिर मुझ पर चिल्लाया और कहा, “क्या आप मुझे पैसे दे रहे हैं या नहीं”। मैं इतना डर ​गयी थी कि मैंने उसे 300 रूपये और दे दिए, तो कुल मिलाकर ‘मुंबई डोमेस्टिक हवाई अड्डे से सायन’ तक के 1300 रुपये दिए। जैसे ही मैंने उसे पैसा दिया, उसके चेहरे पर एक अजीब मुस्कुराहट थी और उसने मुझे बोलै “मैं सामान उतारने में आपकी मदद करूँ?”, उसकी अजीब सी  मनोरोगी के तरह की मुस्कुराहट देख कर लग रहा था कि 3 मिनट पहले कुछ हुआ ही नहीं था। इससे पहले कि मैं ठीक से उतर सकूँ, उसने कार स्टार्ट की और जैसे ही मैंने दरवाजा बंद कर दिया, वह तेज़ी से निकल गया।

 

कहानी: मोईत्राई दास

 

अगर आपके पास भी दुनिया को बताने के लिए एक प्रेरक कहानी है, तो हमें अपनी कहानी [email protected] पर भेजें

 

अपने विचारों को साझा करें

संबंधित लेख

लोड हो रहा है...