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जम्मू-कश्मीर: इस हिंदू बहुमत गाँव ने मुस्लिम आदमी को ‘पंच’ के रूप में चुना

तर्कसंगत

Image Credits: The Greater Kashmir

December 12, 2018

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जम्मू-कश्मीर में लगभग 450 घरों वाले एक छोटे से गाँव ने चौधरी मोहम्मद हुसैन को पंच के रूप में चुना। यह काफी असामान्य था क्योंकि हुसैन, हाँगा गाँव में एकमात्र मुस्लिम परिवार से आते हैं। हिंदू आबादी वाले समुदाय ने उन्हें 4 दिसंबर को चल रहे पंचायत चुनावों में पंचायत प्रमुख के रूप में निर्विरोध चुना।

द ग्रेटर कश्मीर की रिपोर्टके अनुसार  54 वर्षीय हुसैन एक गुज्जर है जो मवेशी पालने वाले परिवार से सम्बन्ध रखते हैं। वह हाँगा  पंचायत के भेलान-खारोथी गाँव में अपनी पत्नी, पाँच बेटों और बहू के साथ रहते हैं।

द टेलीग्राफ को हुसैन बताते हैं कि “ग्रामीणों ने मुझे चुनाव लड़ने के लिए कहा, और सर्वसम्मति से फैसला किया कि कोई अन्य व्यक्ति चुनाव नहीं लड़ेगा ताकि मैं निर्विरोध रूप निर्वाचित हो जाऊँ|  

 

सांप्रदायिक सद्भाव का एक उदाहरण

एक स्थानीय निवासी, दीन चंद ने पीटीआई को बताया कि वह जानते हैं कि यह ध्रुवीय और सांप्रदायिक रूप से प्रेरित समाज में विचित्र है, लेकिन वे अपने भाईचारे पर गर्व महसूस करते हैं। हुसैन को पूरे समुदाय द्वारा सर्वसम्मति से चुना गया, क्यूँकि उनका समुदाय देश में सामंजस्यपूर्ण और सहअस्तित्व का एक उदाहरण स्थापित करना चाहता था।

उन्होंने यह भी कहा कि हुसैन के माध्यम से वे इस संदेश को देश में फैलाना चाहते हैं और वह आश्वस्त करना चाहते हैं कि उनका समुदाय अच्छे और बुरे समय में भी हुसैन के साथ खड़ा रहेगा। चांद ने कहा “धर्म के नाम पर ध्रुवीकरण और विभाजन की कहानियों ने हमारी इस धारणा को नहीं डिगाया है कि हम एक ही परिवार का हिस्सा हैं। अगर इस अवधि में हमारी एकता को नष्ट नहीं किया गया है, तो आगे भी अब यह नहीं होगा”।

गाँव के इस साहसिक निर्णय ने गाँव के छात्रों के लिए भी एक उदाहरण स्थापित किया है। भेलान गाँव के बच्चे वहाँ भाग्यशाली महसूस करते हैं। वे आशा करते हैं कि पारस्परिक विश्वास और एकता में लोगों के विश्वास को पुनर्निर्माण के लिए यह एक बड़ा कदम होगा।

 

लोगों का विश्वास-हुसैन का प्रोत्साहन

चुनाव के माध्यम से गाँव के लोगों ने जो उनपर विश्वास दिखाया है वह इस चीज़ से काफी खुश हैं। वह अपने गाँव के सुधार के लिए घंटों काम कर रहे हैं और गाँव सभी मुद्दों को हल करने के लिए काम कर रहे हैं।

द इंडियन एक्सप्रेस से हुसैन ने कहा, “हम पूर्ण सद्भाव में रह रहे हैं और उन्होंने कभी मुझे महसूस नहीं होने दिया कि मैं उनके गाँव में एकमात्र मुस्लिम रह रहा हूँ”। उन्होंने आगे कहा कि उन्हें ग्रामीणों और उनके प्यार और समर्थन के लिए ऋणी महसूस होता है क्यूँकि गाँव वालों ने उन्हें अप्रत्याशित जीत दिलाई है।

हुसैन की सर्वोच्च प्राथमिकता गाँव के लिए सड़क कनेक्टिविटी है। उन्होंने कहा, “मैं न केवल उनकी उम्मीदों पर जीने के लिए अपना सर्वश्रेष्ठ प्रयास करूँगा बल्कि जो भी संभव हो, उससे आगे बढ़ कर करूँगा।”

जम्मू-कश्मीर के कभी न खत्म होने वाले संघर्षों के साथ जहाँ सांप्रदायिक मुद्दों पर हजारों लोगों ने अपनी जान गँवा दी है, इस गाँव का निर्णय एक साहसी कदम है और देश को एक संदेश देता है। तर्कसंगत गाँव के लोगों के विनम्र निर्णय और उनके देश की लुप्त हो रही धर्मनिरपेक्षता को फिर से स्थापित करने के उनके प्रयास की सराहना करता है।

 

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