मेरी कहानी

मेरी कहानी: मैं सभी से अनुरोध करती हूँ कि लोगों को पैसे न दें, बल्कि उन्हें भोजन दें।

तर्कसंगत

December 12, 2018

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मैं कलकत्ता मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में एक मेडिकल की छात्रा हूँ। मैं स्वर्णमोय गर्ल्स हॉस्टल में रहती हूँ जो कॉलेज कैंपस में है। हमारे हॉस्टल में, एक सिस्टम था कि जहाँ  पढ़ाई के बावजूद दूसरे वर्ष में पढ़ रहे दो छात्रों को अनिवार्य रूप से मेस की ड्यूटी करनी होती थी। जिसमें, न केवल हमें हॉस्टल की मेस से खाने वाले छात्रों से पैसा इकट्ठा करना था, बल्कि मेनू के संबंध में मेस स्टाफ को भी बताना रहना था, और रोजाना भोजन की मात्रा और क्वालिटी की निगरानी करनी होती थी। इसके अलावा, हमें खाना परोसना भी पड़ता था|

इस काम मेरी पार्टनर  मेरा दोस्त तानिया थी, 2014 में हमें यह ड्यूटी मिली थी। लगभग 200 छात्रों और मेस स्टाफ के लिए खाना पकाया जाता था, इसलिए कुछ खाना बच जाया करता था जो बर्बाद होता था। यह देखकर मैं वास्तव में इसके बारे में कुछ करना चाहती  थी।

एक दिन, हमारे पास मेन्यू में नूडल्स, सूप और मंचूरियन थे। जब हर किसी ने खा लिया और कोई भी आसपास नहीं था, तो मैंने अपनी दोस्त से कहा, हमें बाहर जाना चाहिए और यह खाना जरूरतमंदों को देना चाहिए। वह एक बार में मान गई। हम एक ही समय में डरे  और उत्साहित दोनों ही थे। डर इसलिए रहे थे क्योंकि रात के 11 बजे थे और अगर किसी ने हमें उन बड़े बर्तनों को ले जाते देख लिया तो वे कई सवाल पूछेंगे। वैसे भी, हम भाग्यशाली थे कि किसी ने नहीं देखा। हमने सूर्य सेन स्ट्रीट के फुटपाथ पर गरीब बच्चों के समूह को नूडल्स दिए। वे नूडल्स खाने के लिए बहुत उत्साहित थे। उन्होंने हमें धन्यवाद दिया। यह सब देखकर मेरे दोस्त और मुझे बहुत ख़ुशी मिली।

2-3 दिन बाद, जब पर्याप्त मात्रा में खाना बच गया, तो हम भूखे बेघर बच्चों को खाना देने के लिए फिर से गए। बच्चों के ग्रुप ने हमें देखा और वह दोबारा नूडल्स की उम्मीद कर रहे थे। हालाँकि, उस दिन हमारे पास पनीर और चावल था, लेकिन वे उसे भी खा कर खुश थे। फिर हमने एक रिक्शा खींचने वाले को देखा, जो अपने अंतिम यात्री को छोड़ने के बाद लौट रहा था। जब हमने उसे चावल की पेशकश की, तो उसके थके हुए चेहरे पर राहत दिखा। उसने हमें आशीर्वाद दिया।

मुझे याद है कि वहीं पर कुछ लड़के थे जो हमारी तस्वीर क्लिक करने की कोशिश कर रहे थे। इसे “ईव टीजिंग” समझ कर, हम डर गए, चूँकि मैं अकेली नहीं थी, लेकिन मेरे दोस्त के साथ, मुझे हिम्मत मिली और उनसे फोटो को हटाने के लिए कहा। हालाँकि,ऐसा नहीं था वे सिर्फ गरीब लोगों की मदद करते हुए हमारी एक वीडियो बनाना चाहते थे। वे पास के कॉलेज से थे, उन्होंने अपना परिचय दिया और अनुमति मांगी और कहा कि अगर वे वीडियो बना कर यूट्यूब पर डालेंगे तो इससे दूसरों को प्रेरणा मिलेगी। एक बार, मैंने खेद व्यक्त किया कि हमें कोई दिलचस्पी नहीं है, क्योंकि मैं नहीं चाहती थी कि इस कहानी के बारे में किसी और को मालुम पड़े, जैसा कि मैं सोचती थी कि किसी को अपने अच्छे कर्मों की घोषणा नहीं करनी चाहिए। लेकिन अब मैं चाहती हूँ कि लोग इसे पढ़ने के लिए प्रेरित हों। हमारे एक महीने के मेस ड्यूटी में, हम बेघर लोगों को भोजन देने के लिए कई बार गए। जब वो हमें धन्यवाद देते तो यह हमेशा अच्छा लगाता था। मैं सभी से अनुरोध करती हूँ कि लोगों को पैसे न दें, बल्कि उन्हें भोजन दें। मैंने प्रेरित होने के लिए दूसरों के लिए अपनी कहानी शेयर करने का विचार किया।

 

कहानी: रिया अग्रवाल

 

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