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तमिलनाडु: ऑनर किलिंग सर्वाइवर और एंटी कास्ट एक्टिविस्ट, कौशल्या ने कोयंबटूर में पुनर्विवाह किया

तर्कसंगत

Image Credits: Times Of India

December 13, 2018

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रविवार को, ऑनर किलिंग और एंटी कास्ट एक्टिविस्ट  कौशल्या शंकर ने तमिलनाडु के कोयंबटूर में थंथाई पेरियार द्रविड़र कज़ागम प्रधान कार्यालय में एक परई (भारत में ड्रम का सबसे पुराना रूप) कलाकार शक्ति के साथ विवाह किया। मार्च 2016 में, कौशल्या ने अपने पति को खो दिया था  जो दलित जाति के थे, उडुमलपेट में, कौशल्या के पिता के आदेश पर तीन लोगों ने उनपर और उनके पति पर हमला किया था, कौशल्या तो बच गयीं मगर शक्ति की जान चली गयी, कौशल्या के पिता सामाजिक रूप से प्रमुख थेवर समुदाय से संबंधित थे।

 

कौशल्या ने अपने माता-पिता की इच्छाओं के खिलाफ शंकर से विवाह किया था। हत्या से आठ महीने पहले उनका विवाह हुआ था।कौशल्या के माता-पिता ने बहुत प्रयास किया कि  उन दोनों को अलग किया जाए यहाँ तक कि वह कोर्ट में भी गए। लेकिन, कुछ भी उपयोगी नहीं था। तब उन्होंने उन्हें मारने की योजना बनाई।

 

“आत्म सम्मान विवाह समारोह”

द न्यूज़ मिनट  के रिपोर्ट में कौशल्या जो अपने पति की मृत्यु के बाद एक्टिविस्ट में बदल गईं, ने कहा कि उनके घर के दरवाजे हमेशा अंतर-जाति शादी करने वाले जोड़ों के लिए खुले रहेंगे, जो एक-दूसरे से प्यार के लिए शादी करते हैं। दोनों ने वचन लिया, “समाज के कल्याण के लिए काम कर रहे पेरियारिस्ट, अम्बेडकरवादी और मार्क्सवादी लोग का हमेशा हमारे घर में स्वागत है।”

काले शर्ट और पैंट पहने हुए दूल्हे और दुल्हन दोनों ने थंथाई पेरियार द्रविड़र कज़ागम संस्थापक कोलाथुर मणि, महासचिव के रामकृष्णन, विदुथलाई चिरुथिगल काची, उप महासचिव वन्नियारासु और दलित कार्यकर्ता एविडेंस कथिर की उपस्थिति में विवाह किया था। शंकर का परिवार, जिसके साथ कौशल्या 2016 की घटना के बाद से रह रही थी, समारोह में वह भी उपस्थित थे, हालाँकि शक्ति के माता-पिता ने अपनी शादी पर विरोध किया और इसमें शामिल नहीं होने का फैसला किया।

मीडिया से बात करते हुए, समारोह के बाद, कौशल्या ने कहा, “शक्ति ने मुझे मोरल सपोर्ट दिया है। उन्होंने मेरे दुःख को कम किया है और कास्ट सिस्टम को ख़त्म करने के मेरे प्रयास में मेरे साथ खड़े रहे हैं। इसलिए, मैंने उससे शादी करने का फैसला किया।”

27 वर्षीय शक्ति, वेल्लालूर से एमबीए स्नातक हैं और एक परई कलाकार भी हैं, जो आठ साल से  वाद्य यंत्र सीखा रहे हैं। उन्होंने कौशल्या को भी प्रशिक्षित किया है, जो अब पहले पति के गाँव में बच्चों को भी सिखाती हैं। विवाह समारोह के दौरान, दोनों ने प्रतिज्ञा की, शक्ति ने वचन दिया कि वह कौशल्या के राजनीतिक करियर में कभी भी बाधा नहीं डालेगा और किसी भी संकट पर उसे पिता के रूप में मार्गदर्शन करेगा।

 

घटना जिसने बहुत कुछ बदल दिया

उडुमलपेट में अपने पति शंकर की हत्या के बाद एक्टिविस्ट बनीं कौशल्या ने बाद में मीडिया को बताया कि वह “ऑनर किलिंग” के खिलाफ एक अलग कानून के लिए अपनी लड़ाई जारी रखेंगी।

12 दिसंबर, 2017 को, तमिलनाडु के तिरुपुर में प्रधान जिला और सत्र अदालत ने मंगलवार को कौशल्या के पिता सहित छह लोगों को मौत की सजा सुनाई। कौशल्या की माँ को सभी आरोपों से बरी कर दिया गया है। इस मामले को “ऑनर किलिंग” के रूप में माना गया है।

दिसंबर 2017 में, उनके पिता समेत छह लोगों को तिरुपुर जिला अदालत ने मौत की सजा सुनाई थी। वर्तमान में, उसके माता-पिता समेत 11 लोग कोयंबटूर सेंट्रल जेल में हैं। कौशल्या ने अदालत में अपने पिता के खिलाफ गवाही दी।

 

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