मेरी कहानी

मेरी कहानी: हमने हमारे ओला ड्राइवर को कार में सोने के बजाये होटल के कमरे में रहने को कहा

तर्कसंगत

Image Credits: Arti Madhusudan/Facebook

December 14, 2018

SHARES

हम ऐसे समय में रह रहे हैं कि हमारे लिए ओला या उबर के बिना चलना मुश्किल है। हम लगभग हर दिन सवारी बुक करते हैं। कुछ लोग ड्राइवर के साथ बात करना पसंद करते हैं, और कुछ चुप रहना बेहतर समझते हैं। बातचीत शुरू करने का प्रयास करते समय भी कई बार ड्राइवरों को नजरअंदाज कर दिया जाता है। कभी-कभी ड्राइवरों द्वारा बुकिंग कैंसिल करने पर हम आसमान सर पर उठा लेते हैं और उन्हें उनका काम सिखलाने लगते हैं। हम में से कुछ ड्राइवरों के जीवन में ज्यादा रुचि नहीं रखते हैं, यहाँ एक महिला और उसके ओला ड्राइवर के बारे में एक कहानी है और कैसे एक छोटा सा व्यवहार काफी अंतर पैदा कर सकता है।

लोगों को एक समान मानना चाहिए क्योंकि वे एक समान होते हैं। मैं अपने माता पिता के साथ सड़क द्वारा चिदंबरम जा रही थी और इसलिए हमने ओला आउटस्टेशन कैब बुक की थी, हमारे गाड़ी के ड्राइवर का नाम  एलुमालाई था वह बड़ा शांत स्वाभाव का कम बोलने वाला व्यक्ति दिख रहा था लेकिन सामने की सीट में मेरे बैठे होने के कारण, वह ज़्यादा देर तक शांत नहीं रह सकता था मैं उसके बारे में उससे कई सवाल पूछे जा रही थी उसके जीवन और उसके गाँव और बच्चों के बारे में मेरे करोड़ों सवालों के जवाब देने के अलावा उसके पास और कोई चारा नहीं था।
वह उसी सुबह तिरुपति से लौटा था और चूँकि उसे बैंक का लोन चुकता करना था उसने कोई भी सवारी नहीं छोड़ी थी। हमने शहर में सबसे अच्छे होटल में अपना कमरा बुक किया था। मुझे मालूम नहीं था कि क्या ओला भी अपने ड्राइवरों के लिए इंतज़ाम करती है या नहीं लेकिन मुझे महसूस हो गया कि वो ऐसा कुछ भी नहीं करते। ज्यादातर ड्राइवर गाड़ी में ही सोते हैं।  6 घंटे की लंबी ड्राइव के बाद, किसी को भी आराम की जरूरत होती है इसलिए मैंने फैसला किया और एलुमालाई के लिए उसी होटल में एक और कमरा बुक कर दिया।

हम शाम 6 बजे पहुँचे, मंदिर में थोड़े समय गए और वापस आकर जल्दी ही सो गए और तय किया की अगली सुबह 5.30 तक जल्दी जाग जायेंगे, हमनें उससे भी यही कहा। अगली सुबह मैंने उसके कमरे में जा कर देखा कि गर्म पानी था या नहीं, कमरा आरामदायक था, पंखे काम कर रहे थे कि नहीं मैंने उसे साथ में नाश्ता करने को बुलाया। उन्होंने भावनात्मक रूप से मुझे बताया कि उसने हफ्तों से रात की नींद अच्छे से नहीं ली थी और न ही अच्छे से आराम किया था, यह काफी समय के बाद अच्छी नींद थी। उसके आँखों में आँसू थे और मेरे भी …. … कई लोगों की ज़िन्दगी कठिनाई से भरी होती है। हम इस पर ध्यान नहीं देते  संवेदनशील, दयालु होना अच्छी बात है  … यह एक शानदार अवसर है। मैं इसके लिए आभारी हूँ कि होटल के कर्मचारियों ने यह सुनिश्चित करने में बहुत ध्यान दिया कि एलुमालाई को उनके किसी अन्य ग्राहक की तरह ही सारी सुविधा दी जाए। क्योंकि वह किसी से अलग नहीं था।

 

Treating people as equal because they are. So my road trip to Chidambaram with my parents had us driving with Elumalai…

Posted by Aarti Madhusudan on Wednesday, 12 December 2018

 

कहानी: आरती मधुसूदन

 

अगर आपके पास भी दुनिया को बताने के लिए एक प्रेरक कहानी है, तो हमें अपनी कहानी [email protected] पर भेजें

अपने विचारों को साझा करें

संबंधित लेख

लोड हो रहा है...