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पत्नी को छोड़ कर जाने वाले 33 एनआरआई के पासपोर्ट सरकार ने रद्द किये

तर्कसंगत

Image Credits: NDTV,Indian Express

December 14, 2018

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महिला एवं बाल विकास मंत्रालय (डब्ल्यूसीडी) मंत्रालय ने 12 दिसंबर को कहा कि सरकार ने अपनी पत्नियों को त्यागने वाले 33 अनिवासी भारतीयों (एनआरआई) के पासपोर्ट रद्द कर दिए हैं।

 

मंत्रालय का विस्तृत प्रस्ताव

डब्ल्यूसीडी मंत्रालय के सचिव राकेश श्रीवास्तव की अध्यक्षता में एकीकृत नोडल एजेंसी (आईएनए) इस मामले को देख रही है और एनआरआई विवाह के मामले में फरार पतियों को ढूंढने के लिए लुक-आउट सर्कुलर जारी कर रही है। एनडीटीवी ने बताया कि एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा है कि अब तक आठ लुक-आउट सर्कुलर जारी किए जा चुके हैं और 33 पासपोर्ट विदेश मंत्रालय द्वारा कैंसिल कर दिए गए हैं।

डब्ल्यूसीडी मंत्रालय ने कहा कि एक विस्तृत प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है जिसमें एनआरआई व्यक्ति द्वारा विवाह किये जाने पर एक हफ्ते के भीतर विवाह को पंजीकृत करवाना अनिवार्य होगा और गैर-पंजीकरण की स्थिति में उसके फलस्वरूप परिणामों की सूचि तैयार कर के, मंत्रिमंडल के समक्ष इसकी मंजूरी के लिए रखा जाएगा। प्रस्ताव में पासपोर्ट नियमों में बदलाव लाने की भी सिफारिश रहेगी, जिसके अनुसार फरार लोगों के पासपोर्ट रद्द किया जा सकेगा, और विदेश मंत्रालय की समर्पित वेबसाइट पर सम्मन किए गए लोगों की सूचि भी ज़ारी की जाएगी।

 

डब्ल्यूसीडी क्या कहना है

“डब्लूसीडी मंत्रालय और एनसीडब्ल्यू (महिलाओं के लिए राष्ट्रीय आयोग) एनआरआई विवाह में महिलाओं की रक्षा के लिए हर संभव कदम उठा रहे हैं। हम समर्पित ईमेल पते [email protected] पर महिलाओं से प्राप्त शिकायतों के लिए संपर्क के लिए नोडल बिंदु के रूप में कार्य करते हैं और निवारण प्रणाली का समन्वय करते हैं “, डब्ल्यूसीडी मंत्रालय ने ट्वीट किया।

 

ये प्रस्ताव इस बढ़ती समस्या को हल करने की दिशा में कारगर साबित होंगे। समस्या की सीमा इस तथ्य से समझी जा सकती है कि पंजाब राज्य महिला आयोग के अनुसार 30,000 से अधिक कानूनी मामले ऐसे हैं जिसमें एनआरआई पतियों द्वारा अपनी पत्नियों को छोड़ कर चले जाने के मामले लंबित हैं।

डब्ल्यूसीडी ने एक और ट्वीट में लिखा है “एनआरआई विवाह में महिलाओं को छोड़ने की समस्या एक गंभीर मुद्दा है। पहली बार, डब्ल्यूसीडी मंत्रालय, विदेश मंत्रालय और गृह मंत्रालय, अनिवासी भारतीयों को उनके विवाह में समस्याओं का सामना करने वाली महिलाओं को समन्वय समर्थन प्रदान कर रहा है।”

चाहे वह किसी के द्वारा माता-पिता या पत्नी को छोड़ना हो, चाहे वह अनिवासी भारतीयों द्वारा किया जाए या भारत के निवासियों द्वारा किया जाए, यह एक अपराध के रूप में माना जाने वाला एक अधिनियम है। तर्कसंगत  इस तरह के अत्याचारों को होने से रोकने के प्रयास के लिए डब्ल्यूसीडी की सराहना करता है।

 

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