पर्यावरण

12 साल के बच्चे ने बनाया प्लास्टिक के द्वारा हो रहे वाटर पॉल्यूशन को रोकने के लिए एक अनूठी मशीन

तर्कसंगत

December 15, 2018

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प्लास्टिक बैग की खपत के कारण थाईलैंड के एक पायलट व्हेल की मौत की खबर पर दुखी, वडोदरा से 12 वर्षीय वरुण साइकिया, ने एक मशीन तैयार करने की सोची जो प्रदूषित जल निकायों की सफाई में मदद कर सके। प्लास्टिक के कारण वॉटर पॉल्यूशन के कारणों के बारे में उत्सुक वरुण ने विषय के बारे में अधिक शोध करना शुरू कर दिया। जल्द ही, उन्होंने महसूस किया कि यह पूरे विश्व की पर्यावरण की समस्या थी और कई देश इस मुद्दे से जूझ रहे हैं।

वडोदरा के नवरचना स्कूल के आठवीं क्लास के वरुण बताते हैं कि “मैंने एक मशीन बनाने का विचार किया जो नदियों, तालाबों और झीलों में सभी फ़्लोटिंग प्लास्टिक कचरे को साफ और एकत्र करेगा। प्लास्टिक जल निकायों पर तैरता है जो इसे उठाना और इकट्ठा करना कठिन बनाता है।” बढ़ती प्रदूषण की समस्याओं का मुकाबला करने के लिए उनके मन में यह विचार आया था। उनके इस नए मशीन का नाम ‘मकर’ रखा गया है जो हमारे शहरों के प्रदूषित तालाबों को साफ करने में मदद करेगा। इस मशीन की एक अलग खासियत यह है कि यह पूरी तरह से बैटरी से चलता है जिससे सफाई में आसानी होगी और मैन्युअल एफर्ट कम लगेगा।

 

पर्यावरण के बढ़ते प्रदूषण के बारे में चिंतित, उन्होंने प्रदूषण के परिणामस्वरूप दुनिया भर में प्रतिकूल परिवर्तनों के बारे में पढ़ना जारी रखा। उन्हें ग्रेट पैसिफ़िक वेस्ट पैच के बारे में भी पता चला कि कैसे उससे बड़े पैमाने पर सागर प्रभावित हो रहे थे। वह जल प्रदूषण के बारे में जानने के लिए परेशान थे और अंत में उन्होनें एक उपाय निकालने का फैसला किया जिससे आसपास के इलाकों और प्रदूषित जल निकायों को साफ़ किया जा सके।

 

मकर क्या है?

मकर एक ऐसी कांसेप्ट पर आधारित है जो प्लास्टिक को जमा करने के लिए पानी के फ्लूइड मैकेनिक्स का इस्तेमाल करती है जिस मैकेनिज्म से मशीन को आगे बढ़ाया जाता है उसी मैकेनिज्म से यह पानी में तैर रहे प्लास्टिक को अपनी ओर खींचता है। यह एक सरल मशीन है जो काफी मजबूत भी है। एक साधारण मोटर और रिमोट द्वारा संचालित, इसे हैवी-ड्यूटी मोटर का उपयोग करके और चरखी में बदलाव करके अपनी क्षमता के अनुरूप बढ़ाया भी जा सकता है।

 

इसकी वर्तमान क्षमता के आधार पर, यह एक समय में तीन किलोग्राम फ्लोटिंग कचरा एकत्र कर सकता है। मशीन फ्लोटिंग स्टायरोफोम कप, प्लास्टिक की बोतलें, बैग और मृत कीड़े को पकड़ने के लिए काफी अच्छी है। यह अन्य तालाब और महासागर सफाई मशीनों से अपनी सक्रियता के कारण से अलग है। इस मशीन का एक बड़ा लाभ यह है कि अन्य मॉडलों के विपरीत, प्रदूषित जल निकायों के आसपास इसे स्थापित करने की आवश्यकता नहीं है। स्विमिंग पूल को साफ करने के लिए इसे आसानी से इस्तेमाल किया जा सकता है।

 

वरुण बताते हैं, “यह मॉडल एक मोटर और पुलि  द्वारा संचालित एक पैडल व्हील से बना है। इसे रिमोट का उपयोग करके नियंत्रित किया जा सकता है। पैडल व्हील आगे बढ़ाता है और तैरता कचरा पीछे बंधे नेट में जमा हो जाता है। पीछे बंधा नेट एक टोकरी से जुड़ा  है जिसे जमा कचड़े को निकालने के लिए खोल के हटाया जा सकता है।”

उन्होंने कहा कि ऐसे सरल मॉडल का उपयोग प्रदूषित झीलों और तालाबों से कचरे को साफ़ करने में बड़े पैमाने पर योगदान दे सकता है। इसके अलावा, यह इन प्रदूषित जल निकायों जैसे पास के गंदे तालाबों की सफाई करने वाले नगरपालिका श्रमिकों के लिए भी फायदेमंद होगा है। क्षमता बढाकर, यह मॉडल बड़ी जल निकायों और यहाँ  तक कि महासागरों पर भी काम कर सकता है। यह हमारे समुद्री जीवन को बचाने और जलीय पारिस्थितिक तंत्र को संतुलित करने में मदद कर सकता है। अपनी भविष्य की योजनाओं के बारे में बात करते हुए, वह कहते हैं, “हैवी ड्यूटी मोटर और क्षमता बढ़ाकर इस मॉडल के साथ, इससे तटीय क्षेत्रों को साफ किया जा सकेगा और यह महासागरों पर भी कामयाब हो सकता है। उचित फंडिंग के साथ, मैं इस मॉडल का उपयोग महासागरों को भी साफ करने के लिए करना चाहता हूँ। मैं भविष्य में जलविद्युत उत्पन्न करके इसे ऊर्जा कुशल बनाने की भी योजना बना रहा हूँ।”

उनका लक्ष्य इस मॉडल को विकसित करना है ताकि वह इसे बड़े पैमाने पर इस्तेमाल कर सके। प्रदूषण में वृद्धि के बारे में उनकी जिज्ञासा ने उन्हें एक मॉडल तैयार करने के लिए प्रेरित किया है जो इस समस्या को खत्म करने में मदद करेगा। ऐसे युवा परिवर्तन की हवाओं को आगे बढ़ा रहे हैं।

 

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