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बैंगलोर के इस कंपनी ने 900 से अधिक दिव्यांग को नौकरी दी है

तर्कसंगत

December 15, 2018

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एक देश जहाँ 2.68 करोड़ जनता दिव्यांग हो वहाँ भला इशारों की भाषा और सकरात्मक सोच के साथ कंपनी चलाने के बारे में कोई कैसे सोच सकता है? लेकिन बैंगलोर की एक बिज़नेस प्रोसेस आउटसोर्सिंग (बीपीओ) विंध्य इ इन्फॉमिडीया प्राइवेट लिमिटेड ने ऐसा कर दिखाया है| उसने यह दिखा दिया है कि हर कोई बदलाव ला सकता है| कंपनी के 1600 कर्मचारियों में से 62% कर्मचारी दिव्यांग है, जो 2006 से कंपनी में काम कर रहे हैं|

यह अनूठी कंपनी पवित्रा वाई सुंदरेशन और उनके पति अशोक गिरि डी के मेहनत लगन और सकारात्मक सोच का नतीजा है, जो अब अपनी इस कंपनी को “एक बड़े खुशहाल परिवार” के रूप में देखते हैं ।

तर्कसंगत से बात करते हुए पवित्रा ने कहा, “मैं समाज और मेरे पति के लिए कुछ करना चाहती थी, और साथ ही, बिज़नेस लाइन में कुछ करना चाहती थी – विंध्य के साथ हम इन दोनों काम को करने में सफल रहे हैं।”

 

शुरुआत कैसे हुई ?

उन्होंने एक ऐसी घटना सुनाई जिसने दिव्यांग लोगों के प्रति उनका दृष्टिकोण बदल दिया। “एक दिन व्हीलचेयर पर एक जवान लड़का मेरे कार्यालय में नौकरी माँगने आया। उसकी प्रोफ़ाइल देखने के बाद, मैंने उसे जवाब के लिए कुछ दिनों तक इंतजार करने के लिए कहा और इमारत में किसी भी रैंप या लिफ्टों की अनुपलब्धता के बारे में भी बताया जिससे उसे पहली मंजिल पर ऑफिस जाने में दिक्कत हो सकती है। लड़के ने उत्साहपूर्वक कहा कि वह अपनी क्षमता साबित कर सकता है और मुझे ऊपर की सीढ़ियों पर चढ़ने के लिए कहा। तब मुझे एहसास हुआ कि यह शारीरिक क्षमताओं के बारे में नहीं है, यह काम करने की लगन है और जीवन के प्रति आपके नज़रिये के बारे में है जो “मायने रखता है”, पवित्रा ने कहा।

 

 

कंपनी ने दो कर्मचारियों के साथ शुरुआत की थी अब 1600 से अधिक लोगों को रोजगार देता है। मूक बधिर से ग्रसित 100 से अधिक लोगों के साथ बातचीत कर पाना एक मुद्दा था मगर यह भी थोड़े समय में ख़त्म हो गयी, जब एक बधिर व्यक्ति नौकरी की तलाश में आया, उसने पवित्रा को साइन लैंग्वेज सिखाने की इच्छा व्यक्त की और बदले में पवित्रा से नौकरी में प्रशिक्षण पाने की इच्छा ज़ाहिर की।

कंपनी का पहला ग्राहक एक छोटा सा बुटीक था जो अपने डेटाबेस को व्यवस्थित करने के लिए  एक कंपनी की तलाश में था। विंध्य ने अपनी कंपनी की क्षमता साबित करने के लिए एक छोटी पायलट परियोजना चलायी, और तब से, कभी पीछे मुड़ कर नहीं देखा। कंपनी ने अपने कड़ी मेहनत और समर्पण के माध्यम से बार-बार साबित किया है। अब, विंध्य ई इन्फोमीडिया के क्लाइंट सूची में विप्रो, वीडियोकॉन डीटीएच और कई जानी मानी  माइक्रो फिनांस कंपनियाँ शामिल हैं।

 

एक साथ बाधाओं का सामना करना

पवित्रा ने उस समय को याद किया जब विंध्य प्रारंभिक काल में वित्तीय संकट से गुजर रहा था। 2006 में, इसकी पहली बड़ी सफलता मिलने से पहले, स्थिति इतनी खराब थी कि कंपनी को अपने कर्मचारियों से ब्रेक लेने के लिए कहा गया था। उन्होंने कहा, “हमने उन्हें बताया कि हम उनके वेतन का भुगतान नहीं कर पाएंगे”।

लेकिन कर्मचारियों ने छोड़ने से इंकार कर दिया और भुगतान के बिना काम करने का फैसला किया क्यूँकि उनके पास सर छुपाने की जगह थी। हर रात 7 बजे के बाद, कर्मचारी एक कॉन्फ्रेंस रूम में सोते थे, और आस-पास रहने वाले लोग भोजन ला कर देते थे। उनका मानना है कि यह टीम के प्रयास और कंपनी के लिए उनका प्यार था जिसने उस कठिन दौर से मदद की।

 

सकारात्मक दृष्टिकोण ही सफलता की चाबी है

जब भर्ती की बात आती है तो कंपनी की एक बुनियादी आवश्यकता है। पवित्रा ने टिप्पणी की, “हम अपने कर्मचारियों में सभी को कम्युनिकेशन स्किल और ‘कैन डू इट’ वाली सोच चाहते हैं|

द हिंदू बिजनेसलाइन के साथ एक साक्षात्कार के दौरान पवित्रा के पार्टनर और जीवन साथी अशोक ने कहा, “हम अपने एम्प्लाइज़ को उच्चतम प्रशिक्षण देना चाहते हैं और यह सुनिश्चित करते हैं कि अपने ग्राहकों को बेहतर सेवा प्रदान कर सकें, ताकि हम उन्हें खो न दें। पिछले 12 वर्षों में हमने एक भी ग्राहक नहीं खोया है।”

विंध्य न केवल दिव्यांग लोगों को रोजगार देता है बल्कि उनमें गर्व, आजादी और जिम्मेदारी का भाव भी जगाता है। आपने कंपनी का नाम विंध्य क्यों चुना? पवित्रा ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया, “दो कारण हैं, पहली हमारी बेटी का नाम और दूसरा क्योंकि विंध्य का अर्थ है एक बढ़ता हुआ पहाड़”। उन्होंने कहा कि वह विंध्य को भी लगातार बढ़ने और विंध्य पर्वत के रूप में स्थिर और दृढ़ होते देखना चाहती हैं।

 

विंध्य के लिए बड़े सपने

बैंगलोर में कंपनी को सफलतापूर्वक चलाने के बाद, अब वह हैदराबाद में एक बड़ा परिसर स्थापित करना चाहती है, खासकर दिव्यांग लोगों के लिए। तर्कसंगत से बात करते हुए पवित्रा ने गर्व से कहा, “हम चाहते हैं कि विंध्य को भारत की शीर्ष कंपनियों में से एक के रूप में पहचाना जाए।” विंध्य के लिए उज्ज्वल भविष्य के साथ, उनका लक्ष्य अधिक विशेष रूप से दिव्यांग लोगों को रोजगार प्रदान करना है।
वह महिलाओं और बाल विकास और फेसबुक मंत्रालय की पहल के तहत “100 वीमेन अचीवर्स अवार्ड्स” के विजेताओं में से एक रही है और उन्हें भारत के राष्ट्रपति के साथ दोपहर के भोजन के लिए राष्ट्रपति भवन में आमंत्रित किया गया था। उन्हें 2016 में भारत की 12 ट्रांसफॉर्मिंग महिलाओं में से एक के रूप में चुना गया है।

तर्कसंगत पवित्रा को दिव्यांग लोगों को सशक्त बनाने के लिए सराहना करता है, न केवल जीविका का साधन उपलब्ध कराया बल्कि इनमें जिम्मेदारी की भावना भी प्रदान की।

 

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