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एक समय पर दो ट्रैन पैर के टुकड़े कर गुज़र गए, मगर ज़िन्दगी जीने के ज़ज़्बे के टुकड़े न कर पाए

तर्कसंगत

December 16, 2018

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बिहार के बेगूसराय जिले के ढकजारी गांव के देव मिश्रा, इंडियाज़ गॉट टैलेंट के एक प्रतियोगी हैं। उनके असाधारण मूनवॉक ने जजेज़ को ऑडिशन के पहले दिन काफी प्रभावित किया। उनके द्वारा किया गया मूनवॉक औरों की तरह नहीं था। उन्होनें अपने हाथों से मूनवॉक कर के दिखाया।

देव का जन्म वंदना देवी और राज कुमार मिश्रा के घर हुआ था और तीन भाई बहनों में वे सबसे छोटे थे। वो एक सामान्य जीवन जी  रहे थे, जब तक कि एक दुर्भाग्यपूर्ण दिन ने उनकी ज़िन्दगी बदल कर रख दी|

देव की कहानी केवल मूनवॉक के बारे में नहीं है, यह हमें शक्ति देता है और साथ ही खुद पर भरोसा रखने की सीख भी|

 

देव का बचपन

जब देव सिर्फ 6 महीने के थे, तो उनके पिता लंबे समय से बीमार होने के बाद चल बसे| एक भूमिहीन मजदूर और डोमेस्टिक हेल्प, के रूप में उनकी माँ ने परिवार चलाने के लिए दिन-रात काम किया। उनके सारे पैसे देव के पिता के इलाज पर खर्च हो चुके थे।

तर्कसंगत से बात करते हुए देव बताते हैं कि “जब मैं लगभग 10 वर्ष का था, मैंने अपनी माँ की मदद करने के लिए कड़ी मेहनत की, लेकिन मैं बहुत छोटा था। मुझे याद है कि उन्हें कितनी पीड़ा उठानी पड़ती थी, लेकिन उन्होनें कभी शिकायत नहीं की। मैंने कभी भी किसी को भी उतनी मेहनत करते नहीं देखा, वह इस बात का हमेशा ख्याल रखती थी कि उनके बच्चे भूखे पेट न सोयें। हालांकि, मुझे नौकरी के लिए स्कूल छोड़ना पड़ा।”

ज़िंदगी की इस उतार चढ़ाव के साथ, देव का जीवन चल रहा था। लेकिन उन्हें नहीं पता था कि एक दिन उनकी ज़िन्दगी हमेशा के लिए बदल जाएगी।

 

वह हादसा जिसने उनकी ज़िन्दगी पलट कर रख दी

एक वेल्डर के रूप में काम करने वाले 22 वर्षीय देव, 1 जून, 2015 को हैदराबाद में एक ठेकेदार के लिए काम करने के लिए जाने वाले थे। वह बरौनी स्टेशन पर ट्रैन पकड़ने के लिए पहुँचे।

देव ने बताया “मैं ट्रेन की प्रतीक्षा कर रहा था और भीड़, हमेशा की तरह, एक दूसरे को धक्का दे रही थी। मेरे पीछे की भीड़ ने धक्का दिया और मैं रेल की पटरियों पर गिर गया था। ट्रेन इतनी करीब थी कि मुझे खुद को सम्भालने का मौका नहीं मिला|”

ट्रेन उनके पैरों पर चढ़ती हुई निकल गई, जांघों नीचे से उनके पैर के दो टुकड़े हो गए। वह दर्द में चिल्ला रहे थे और लोगों से मदद माँग रहे थे, लेकिन कोई भी आगे नहीं आया। इससे पहले कि वह तय करते कि क्या करें, दूसरी ट्रेन भी उनके पैरों के ऊपर से गुज़र गई।

“तीन घंटों के लिए, मैं वहाँ बैठा रहा और लोगों को मदद के लिए पुकारता रहा। दर्द और भी बढ़ता जा रहा था, लेकिन एक भी व्यक्ति मेरी मदद करने के लिए आगे नहीं आया। ऐसा लग रहा था कि वे मुझे छूने से डर रहे थे। मैंने देखा कि लोग मेरी तस्वीरें ले रहे हैं। मैंने अपने जीवन में इतना असहाय कभी महसूस नहीं किया था ” उन्होंने कहा।

उनका एक दोस्त उसी स्टेशन पर था, और जब उसने देव की हालत देखी, तो वह सुन्न हो गया। अपनी दुर्घटना के छह घंटे बाद, अपने दोस्त की मदद से देव अंततः अस्पताल पहुँचे।

वह एक महीने से अधिक समय तक अस्पताल में रहे, और उनकी माँ हर संभव कोशिश कर के उनके इलाज के लिए पैसे जुटाती रही। डॉक्टरों ने कहा कि वह ज़िंदा नहीं बचेगा, लेकिन एक चम्तकार की तरह वह ज़िंदा बच गए।

“घर लौटने के बाद मेरी माँ ने मेरा ख्याल रखा। उसने कभी मेरा साथ नहीं छोड़ा” उन्होंने कहा।

 

देव के बड़े भाई ने परिवार छोड़ दिया 

अंदर से पहले ही टूट चुके,  देव के लिए उनके परिवार का ही सहारा था।

“मुझे अपने बड़े भाई पर सबसे ज़्यादा भरोसा था। जो भी पैसा मैं कमाता, मैं घर आकर उसे सौंप देता था। मैंने उन पर भरोसा किया और अपने जान से ज्यादा उन्हें प्यार किया। लेकिन जीवन ने मुझे सिखाया है कि जब आप बेकार हो जाते हैं, तो कोई भी आपको छोड़ कर जा सकता है।”

देव के जीवन के सबसे कठिन समय के दौरान, जब उन्हें अपने भाई की सबसे ज्यादा आवश्यकता थी, तो उनके भाई ने उन्हें कुछ ऐसा कहा जिससे उन्हें शारीरिक दर्द से ज्यादा आघात पहुँचा।

“मेरे भाई, जिसने मेरे दुर्घटना से पहले विवाह किया था, उसने मुझसे कहा कि मैं कभी भी अपने जीवन में कुछ भी नहीं कर पाऊँगा। चाहे मैं मर जाऊँ या जिंदा रहूँ, मुझे उसी पर निर्भर रहना होगा। वह कोई परेशानी नहीं लेना चाहता था, उसने मुझे और मेरे परिवार को छोड़ दिया। मुझे इस चीज़ से ज़्यादा चोट नहीं पहुँची की उसने मुझे छोड़ दिया, चोट इस चीज़ से लगी कि उसने हमारी माँ को अकेला छोड़ दिया था, जिन्होंने हमें खिलाने और पालने के लिए जो बन पड़े सब कुछ किया था।

लेकिन देव ने अपने ऊपर विश्वास रखा। उन्होनें अपने जीवन में कुछ करने का फैसला किया।

 

कृत्रिम पैर और कुछ काम पाने के लिए देव का संघर्ष

देव जयपुर गए क्योंकि किसी ने उन्हें बताया था कि वहाँ उनका अच्छा इलाज हो सकता है। उन्होंने जिन डॉक्टरों से परामर्श किया, उन्हें बताया कि वह कृत्रिम पैरों को पाने में सक्षम नहीं होंगे क्योंकि ऑपरेशन के लिए उनके पैर ट्रैन से कटने के कारण काफी छोटे थे।

जयपुर रेलवे स्टेशन से, उन्होंने बिना कुछ सोचे समझे मुंबई के लिए ट्रैन पकड़ ली। सपनों के शहर में, वह फुटपाथ पर अपनी हाथों के सहारे रहते थे और बचा खुचा जूठा खाना खाया करते थे। उन्होनें कई लोगों से काम माँगा, लेकिन उन्होंने मना कर दिया। किसी ने नहीं सोचा कि उनके जैसे कोई व्यक्ति कुछ कर सकता है।

सड़क पर किसी ने एक बार उनसे पूछा कि वह कहाँ जाना चाहते हैं । “मैं खुद से खड़ा होना चाहता हूं, लेकिन मुझे नहीं पता कि मेरा  होगा” देव ने कहा।

“सलमान खान से मिलना मेरा सबसे बड़ा सपना था। इसलिए नहीं कि मैं उनका फैन हूँ, लेकिन क्योंकि मैंने बच्चों और जरूरतमंदों की मदद करने के बारे में बहुत कुछ सुना था, और मैंने सोचा कि वह मुझे भी कुछ काम खोजने में मदद कर सकते हैं। मैं एक महीने के लिए उनके घर के बाहर, गर्मी में और बारिश में इंतजार करता था, लेकिन उन्हें कभी नहीं देखा।उनके घर के आसपास के सभी लोगों ने मुझे देखा था। उनके सिक्योरिटी मुझसे कहते रहे कि वो घर पर नहीं हैं” उन्होंने कहा।

इसके बाद, वह जैकी श्रॉफ और टाइगर श्रॉफ के घर के चारों ओर घूमते रहे, और उनकी खुशी के लिए, जैकी श्रॉफ ने उनसे मुलाकात की, उन्हें कुछ खाना खिलाया और 5,000 रुपये दिए।

“उन्होनें मुझे बताया कि वह मेरे लिए कुछ काम तलाश करेंगे। मुझे उनकी यह बात छू गयी, “देव ने कहा।

अक्षय कुमार समेत कुछ अन्य हस्तियों के घरों के बाहर मदद की उम्मीद में उन्होंने इंतज़ार किया, लेकिन उन्हें कोई नहीं मिला।

उन्होंने कहा, “इतने सारे लोग मुझसे पूछते थे कि मेरे साथ क्या हुआ था, लेकिन किसी ने भी मदद नहीं की।”

 

ज्वेलरी डिजाइनर फराह खान अली के साथ देव की मुलाक़ात 

उनके जीवन में फिर से एक बदलाव आया, लेकिन इस बार उनके बेहतर जीवन के लिए, ज्वेलरी डिजाइनर फराह खान अली के साथ उनकी मुलाकात हुई।

“ख़राब किस्मत के बावजूद भी आज मैं जो कुछ भी हूँ  वह फराह मैडम के कारण ही। जब मैंने उन्हें अपनी कहानी सुनाई, तो उन्होनें कुछ लोगों के संपर्क की मदद से मुझे एक तीन पहिये वाली साइकिल दिलवाई। उन्होनें मुझे मेरे खर्चों के लिए 10,000 रुपये दिए, मुझे रहने के लिए घर दिलाया, और तब से मेरा पूरा ख्याल रखा है। वह मेरे जीवन में एक फ़रिश्ते की तरह हैं” देव ने बताया।

इतना ही नहीं फराह ने देव को कृत्रिम पैर दिलाने के लिए लाखों रूपये भी खर्च किए।

 

डांस की दुनिया में देव का सफर

इस अवसर का फायदा उठाते हुए, देव ने अपने ऊपरी शरीर को मज़बूत बनाने का काम शुरू कर दिया, क्योंकि उनके शरीर का लगभग सारा वजन उनके हाथों पर आता था। कार्टर रोड पर, वह कालिस्थेनिक्स का अभ्यास करते थे।

इन अभ्यास सत्रों में से एक के दौरान, 10 महीने पहले, डांस डायरेक्टर विशाल पासवान ने उन्हें देखा।

“विशाल सर ने मुझे डांस करने के लिए प्रशिक्षण देना शुरू किया, लेकिन मुझसे कोई पैसा नहीं लिया। उन्होंने मुझे प्रेरित किया, मुझे प्रेरित किया और मुझे विश्वास दिलाया कि मैं अपने लिए कुछ करने में सक्षम हूँ, “देव ने कहा।

देव ने कई सारे स्टेज शो में प्रदर्शन किया, और आखिरकार इंडियाज़ गॉट टैलेंट के लिए ऑडिशन करने का फैसला किया। उन्होंने जजों को अपने नृत्य के साथ प्रभावित किया और अब वह ऑडिशन के दूसरे दौर की तैयारी कर रहे हैं। वह अगले फरवरी में कक्षा 12 की परीक्षा में शामिल होने जा रहे हैं।

“फराह मैडम ने मुझे आवास दिया मैं उसकी में रहता हूँ। मैं अपने लिए जो कमाता हूँ उसका एक हिस्सा रखते हुए, मैं बाकी को अपनी माँ को भेज देता हूँ। इंडियाज़ गॉट टैलेंट पर मुझे देखने के बाद, जिस भाई ने हमें छोड़ दिया था, उसने मुझे बधाई देने के लिए फ़ोन किया, मैंने उनसे कहा है कि मुझे कभी दोबारा फोन न करें। “उन्होंने कहा।

जब उनसे पूछा गया कि क्या वह अभी भी सलमान खान से मिलना चाहते हैं, तो उन्होंने कहा, “मैं फिर से उनके पास नहीं जाऊँगा। वह अब मेरे पास आएंगे और मेरी कहानी सुनेंगे। मैं वहाँ पहुँचा हूँ जहाँ मैं चाहता था। लेकिन मैं अभी भी जीवन में बहुत कुछ करना चाहता हूँ |”

 

तर्कसंगत देव मिश्रा को उनके दृढ़ संकल्प, कड़ी मेहनत और सकारात्मक दृष्टिकोण के लिए सलाम करता है। उनसे जीवन से सीख  कठिन समय में भी आदमी अगर अपने ऊपर विश्वास रखे तो किस्मत उस पर वापस मेहरबान हो सकती है|

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