मेरी कहानी

मेरी कहानी: 28 साल की उम्र में 45 सर्जरी के बाद भी मैंने अपनी ज़िन्दगी खुल के जी है

तर्कसंगत

सोर्स: ह्यूमन्स ऑफ़ बॉम्बे

December 16, 2018

SHARES

“मैं 12 वर्ष की थी जब मुझे फिशिंग रॉड के साथ खेलते हुए बिजली का झटका लगा। हुआ यूँ कि खेलते हुए रॉड खिड़की से बाहर फिसल गई और इसे पकड़ने की कोशिश करते समय, मैंने रॉड के बजाय एक बिजली का तार पकड़ लिया – 11,000 वोल्ट का करंट मेरे दाहिने हाथ से हो कर गुज़रा। मुझे फ़ौरन आईसीयू में भर्ती कराया गया मैं बुरी तरह से जल चुकी थी और मेरे शरीर के कुछ हिस्से गायब हो गए – एक सप्ताह के बाद, गैंग्रीन को फैलने से रोकने के लिए मेरे दाहिने हाथ को काट दिया गया।

12 साल की उम्र में मुझे क्या हुआ था? मैं इसका अंदाज़ा नहीं लगा पायी – मुझे बस इतना पता था कि मैं फिर से बच्ची बन गयी थी। मेरे माता-पिता और दोस्त उस दौरान मेरे लिए सहारे के रूप में हर वक़्त मौज़ूद थे – असल में, पिताजी ने एक नियम बना दिया था कि जो कोई भी मेरे पास मिलने आता था उसे पहले मुझे चुटकुला सुनाना होता था – और मुझे इससे काफ़ी मदद मिली! मैं हँसने की उम्मीद करने लगी और धीरे-धीरे अपनी नई वास्तविकता के साथ दुनिया का सामना करने के लिए तैयार होने लगी। मेरा पहला काम मेरी कृत्रिम हाथों से लिखना था – यह पहली बार मुश्किल था, लेकिन साथ में मेरा आयुर्वेदिक उपचार जारी रहा, हर रोज मैं कलम को थोड़ा बेहतर पकड़ सकती थी और फिर एक दिन यह हुआ! मैंने अपना पहला शब्द लिखा और इलाज के अंत तक, मैंने पूरी किताब ‘मातील्डा’  – व्हाट ए विक्ट्री’ लिख डाली!

इस तरह बदलाव शुरू हुआ, मैंने संघर्ष पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय, अपनी दूसरी ज़िन्दगी को जश्न के रूप में देखा। जिस दिन से मैंने अपना खुद का बैग ज़िप्प किया था, जिस दिन मैंने अपने कपड़े खुद से पहने थे, पहली बार मैंने दरवाजा बंद कर दिया था या जिस दिन मैंने खुद से अपने परीक्षा लिखा था – सब कुछ एक त्यौहार के जैसा था!

मैंने बीकॉम की पढ़ाई पूरी की और एमबीए की डिग्री भी ली और उन दो सालों  में मैं बिना किसी सहारे के रही – यही वह समय था जब मुझे पता चला कि मेरी अक्षमता सिर्फ मेरे जीवन का एक हिस्सा थे, मगर वह मेरे जीवन को परिभाषित नहीं करते थे!
पहले मैं लंबी आस्तीन के कपड़े, दुपट्टे से जलने के निशान को छिपाया करती थी मैंने शॉर्ट्स भी पहनना छोड़ दिया था लेकिन कुछ  समय के बाद मैंने अपना निशान छिपाना भी छोड़ दिया क्योंकि मुझे अपनी खामियों और निशानों पर गर्व महसूस हुआ … उन्होंने मुझे  वो बनाया जो आज मैं हूं – निडर और सकारात्मक।

28 साल की उम्र में, मेरे 45 सर्जरी हुई है और मेरा दाहिना नहीं है, लेकिन मैंने अपनी ज़िन्दगी को भरपूर जिया है। मैंने उससे शादी की जिससे मैं प्यार करती थी, वो मुझे हमेशा खुश रखता है, मेरे व्यवसाय को मेरे साथ संभालता है, स्काइडाइव, बंजी जंपिंग करता है और हम कई सारे वाटर स्पोर्ट्स खेलते हैं, और वो सब कुछ जो हमारे ज़िन्दगी को खुश रखती है|

 

कहानी: पौलोमी पटेल

 

अगर आपके पास भी दुनिया को बताने के लिए एक प्रेरक कहानी है, तो हमें अपनी कहानी [email protected] पर भेजें

अपने विचारों को साझा करें

संबंधित लेख

लोड हो रहा है...