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सरकार ने कहा कि राफ़ेल समझौते पर सुप्रीम कोर्ट में दिए गए सीएजी रिपोर्ट में कुछ गलतियां थी

तर्कसंगत

December 17, 2018

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राफ़ेल सौदे के मामले में शुक्रवार को जब सर्वोच्च न्यायालय ने सरकार के पक्ष में फैसले सुनाया तब यह मामला शान्त होता दिख रहा था। हालांकि, कांग्रेस और बीजेपी के बीच सर्वोच्च न्यायालय द्वारा किए गए इस फैसले के बाद भी बहस जल्द खत्म होती नहीं दिख रही है। टाइम्स नाउ समाचार के मुताबिक, विपक्षी दल ने आरोप लगाया है कि इस बड़े सौदे से संबंधित महत्वपूर्ण रिपोर्ट के द्वारा सरकार ने अदालत को गुमराह करने की कोशिश की है|

 

तनाव क्यों है?

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को राफ़ेल सौदे के संबंध में सभी याचिकाओं को खारिज कर दिया था। निर्णय का आधार यह था कि सरकार ने अदालत को आश्वासन दिया कि इस सौदे के बारे में विवरण नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (सीएजी) के साथ साझा किया गया था, जिन्होंने रिपोर्ट को लोक लेखा समिति (पीएसी) को भेज दिया था। हालांकि, विपक्षी दल के मुताबिक, रिपोर्ट पीएसी विभाग में किसी ने भी नहीं देखी है, जिससे रिपोर्ट सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कराई जा सके।
कांग्रेस ने सरकार पर इस तरह की कोई रिपोर्ट जमा नहीं करने का आरोप लगाया है और मानना ​​है कि इसमें भारी धोखाधड़ी शामिल है। मल्लिकार्जुन खड़गे, जो पीएसी की अध्यक्षता करते हैं, ने ऐसी कोई रिपोर्ट नहीं देखी है। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी इस मामले पर चुप नहीं रहे और ऐसी कोई रिपोर्ट है तो रिपोर्ट को जारी करने की मांग की। “सीएजी रिपोर्ट कहाँ है? हमें दिखाओ? शायद यह फ्रांस संसद को दिखाया गया था? शायद पीएमओ में प्रधानमंत्री मोदी का अपना पीएसी है क्योंकि उन्होंने हर संस्थान को तो नष्ट कर दिया है, “राहुल ने एनडीटीवी को एक रिपोर्ट में बताया।

 

सरकार की प्रतिक्रिया
इन आरोपों के जवाब में, सरकार ने यह कहते हुए जवाब दिया है कि पहले दायर हलफनामे का गलत अर्थ निकाला जा रहा है। अब उनके द्वारा दायर नए हलफनामे में, सरकार ने केवल रिपोर्ट दर्ज करने की प्रक्रिया का उल्लेख किया है न कि रिपोर्ट जमा हो जाने की पुष्टि की है। इस मामले में हालिया गतिविधी से लगता है कि पूरा मामला अभी तक शांत नहीं हुआ है, और विपक्ष इस मुद्दे पर सरकार को वापस से संसद में घेरने की तैयारी में है।

 

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