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पाकिस्तान की जेल में 6 साल की सज़ा काटने के बाद, हामिद अंसारी वापस भारत आये

तर्कसंगत

Image Credits: Indian Express

December 18, 2018

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पाकिस्तानी खुफिया एजेंसियों के गिरफ्त में छह साल रहने के बाद, 33 वर्षीय भारतीय राष्ट्रीय हामिद निहाल अंसारी को पाकिस्तानी जेल से रिहा कर दिया गया है और 18 दिसंबर को मंगलवार को घर लौट आये हैं।

 

पाकिस्तान ने भारतीय इंजीनियर को रिहा किया 

फर्जी पहचान और जासूसी के आरोप में पकड़े जाने के बाद, 33 वर्षीय निहाल को 2012 में गिरफ्तार कर लिया गया था और 15 दिसंबर 2015 को सेना की अदालत द्वारा सजा सुनाये जाने के बाद उन्हें पेशावर सेंट्रल जेल में रखा गया था। जबकि उनकी तीन साल की जेल की अवधि 15 दिसंबर 2018 को समाप्त हो गई थी, अंसारी पाकिस्तान छोड़ने में असमर्थ थे क्योंकि उनके कानूनी दस्तावेज अभी तक तैयार नहीं थे।

अंसारी, मुंबई से एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं, उन्होनें उत्तर-पश्चिम पाकिस्तान में अवैध रूप से प्रवेश किया, वह भी अपनी एक महिलामित्र को उसकी ज़बरन हो रही शादी से बचाने के लिए, उस महिला से उनकी ऑनलाइन दोस्ती थी। अफगानिस्तान के तरफ से पेशावर पाकिस्तान में घुसते समय 12 नवंबर, 2012 को, उन्हें पाकिस्तानी सेनाओं ने पकड़ा था।

समाचार एजेंसी आईएएनएस के अनुसार, पाकिस्तान-भारत पीपुल्स फोरम फॉर पीस एंड डेमोक्रेसी (पीआईपीएफपीडी) के महासचिव जतिन देसाई ने कहा, “हाँ, यह वाकई बहुत अच्छी खबर है। अंसारी को जेल से रिहा कर दिया गया है और बाद में मंगलवार को वाघा सीमा से भारत को सौंप दिया जाएगा।” अंसारी का न केवल अपने माता-पिता और परिवार के सदस्यों द्वारा स्वागत किया जाएगा बल्कि भारत-पाकिस्तान दोस्ती कार्यकर्ताओं, अधिकारियों और राजनीतिक व्यक्तित्वों का भी स्वागत किया जाएगा। फर्स्टपोस्ट ने सूचना दी।

हामिद अंसारी की माँ फौजिया ने कहा, “वह नेक इरादे के साथ गया था लेकिन शुरुआत में गायब हो गया और बाद में पकड़ा गया और उस पर आरोप लगाया गया। उसे वीजा के बिना नहीं जाना चाहिए था। उनकी रिहाई मानवता के लिए एक जीत है।”

इंडियन एक्सप्रेस ने नई दिल्ली में सूत्रों की सूचना दी है कि पाकिस्तानी सरकार को नोट्स वर्बेल (राजनयिक नोट) के माध्यम से 96 बार याद दिलाने के बाद भी, पाकिस्तानी सरकार ने कंसुलर पहुँच की अनुमति नहीं दी थी। रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तानी सरकार ने पिछले साल अंसारी को माँ के साथ एक फोन कॉल की अनुमति दी थी। अधिकारियों ने दावा किया है कि अंसारी का मामला कंसुलर रिलेशंस पर वियना सम्मेलन का उल्लंघन था।

हिंदुस्तान टाइम्स ने कानूनी विशेषज्ञों को यह कहते हुए पाया कि अंसारी को पहले ही मुक्त कर दिया जाना चाहिए था क्योंकि उन्हें जो सजा सुनाई गई थी वो उन्होंने जेल में पहले ही बिता लिए थे। इसके अतिरिक्त, पेशावर उच्च न्यायालय ने अंसारी के प्रत्यावर्तन के लिए औपचारिकताओं को जल्द ख़त्म करने के लिए पाकिस्तान सरकार को एक महीने की समयसीमा भी दी थी। रिपोर्ट के अनुसार, अदालत ने उनके वकील द्वारा अंतिम अपील सुनने के बाद यह फैसला लिया।

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