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रघुराम राजन: क़र्ज़ माफ़ी किसानों की समस्या का स्थायी समाधान नहीं है

तर्कसंगत

Image Credits: FT.COM

December 18, 2018

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आरबीआई के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने 14 दिसंबर को कहा कि किसानों की क़र्ज़ माफ़ी उनके परेशानियों की स्थायी समाधान नहीं हो सकती है। उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र को अधिक से अधिक जीवंत उद्योग बनाने की आवश्यकता है,  बजाय इसके कि  “हम उसे स्थानांतरित कर के आगे बढ़ाने की सोचें”। राजन ने कहा कि उन्होंने चुनाव आयोग को भी लिखा है कि वह क़र्ज़ माफ़ी के प्रावधान को हटा दें।

 

“क्या यह उन किसानों तक पहुँचता है जिन्हें वास्तव में इसकी आवश्यकता है?”

हिंदू बिजनेस लाइन के रिपोर्ट के अनुसार रघुराम राजन ने दिल्ली में एक समारोह में यह बातें कहीं, वह “भारत के लिए एक आर्थिक रणनीति” शीर्षक समारोह में चर्चा कर रहे थे जहाँ, उनके साथ 13 अर्थशास्त्रियों का एक समूह था।

उन्होनें कहा की निश्चित ही किसानों की समस्या के बारे में हमें सोचना चाहिए और उनके समाधान के लिए कदम उठाने होंगे, लेकिन क्या क़र्ज़ माफ़ी ही इसका एकमात्र उपाय है? और क्या यह क़र्ज़ माफ़ी का फायदा उन किसानों को मिल पता है जिन्हें इनकी सबसे ज़्यादा ज़रूरत है?

उन्होनें इस बात पर बहस करने के लिए ज़ोर दिया कि किसानों को दिए जाने वाली क़र्ज़ माफ़ी की ज़रूरत है कि नहीं? रघुराम द्वारा दिए गये व्यक्तव्य पर सोचने की ज़रूरत है तब जब अभी हर राजनितिक पार्टी क़र्ज़ माफ़ी को अपने चुनावी घोषणापत्र में महत्वपूर्ण स्थान देती है, उन्होनें कहा कि क़र्ज़ माफ़ी बड़ा आसान सा तरीका है यह दिखाने के लिए कि सरकार किसानों की चिंता करती है जबकि इसका समाधान ज़्यादा व्यापक और दूरदर्शी होना चाहिए| उन्होनें यह भी कहा कि क़र्ज़ माफ़ी के कारण से सार्वजानिक कार्य में काम आने वाले पैसों को दूसरी जगह खर्च करना पड़ता है और राज्य के वित्तीय कोष पर ज़्यादा भार बढ़ता है|

रिपोर्ट लिखने वाले अर्थशास्त्रियों के इस समूह का राजन भी एक हिस्सा हैं, उनके अलावा अभिजीत बनर्जी, ई सोमनाथ, अमर्त्य लाहिरी और कार्तिक मुरलीधरन शामिल थे, उन्होंने रायथू बंधु योजना का समर्थन किया। जिसके अनुसार किसानों को बुवाई के समय अग्रिम नकद दिया जाता है, यह मॉडल अभी केवल तेलंगाना राज्य में लागू किया जा रहा है, जिसके तहत 4,000 रुपये प्रति एकड़ जमीन के मालिकों को सौंप दिया जाता है।

टाइम्स ऑफ इंडिया के रिपोर्ट के अनुसार मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कार्यभार लेने के तुरंत बाद किसानों के 2 लाख रूपये तक के क़र्ज़ माफ़ कर दिए। कमलनाथ ने कहा, “मुख्यमंत्री के रूप में प्रभारी होने के बाद, मैंने वह फाइल सबसे पहले हस्ताक्षर किये, जिसमें प्रत्येक किसान को 2 लाख रुपये की क़र्ज़ माफ़ी दी गयी है, जैसा कि मैंने किसानों से वादा किया था।”

 

शिक्षा, बैंकों का निजीकरण और अन्य मुद्दे

13 अर्थशास्त्री की रिपोर्ट अन्य मुद्दों पर भी चर्चा की। जबकि डिप्टी गवर्नर वायरल आचार्य ने केंद्रीय बैंक की बोर्ड मीटिंग में बैंकों की निजीकरण के लिए दबाव डाला है, राजन का मानना है कि निजीकरण बैंक की समस्याओं का अंतिम समाधान नहीं हो सकता है।

अर्थशास्त्रियों के समूह ने यह भी कहा कि प्राथमिक शिक्षा पर भारत का रिकॉर्ड निराशाजनक है। उन्होंने पारदर्शिता और प्रकटीकरण के आधार पर निजी स्कूलों को विनियमित करने के दृष्टिकोण में बदलाव की मांग की।

रिपोर्ट के अन्य हिस्सों में बिजनेस स्टैंडर्ड द्वारा रिपोर्ट किए गए अनुसार स्वास्थ्य, पर्यावरण, कौशल, महिला श्रम बल आदि के बारे में बात करते हैं।

रिपोर्ट को सारांशित करते हुए राजन ने कहा, “इस रिपोर्ट के पीछे विचार रचनात्मक आलोचना है। यहाँ रचनात्मक हिस्सा मौलिक समस्याओं के बारे में सोचने के लिए सुझाव हैं। विचार किसी भी विशेष पार्टी या सरकार पर उँगलियों को इंगित नहीं करना है, यह उन समस्याओं की पहचान करना है जिनकी हम सामना करते हैं।”

 

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