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मुंबई लोकल में दृष्टिहीन लड़की ने छेड़छाड़ करने वाले युवक को कैसे घुटने टिकाया?

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Image Credits: Times Of India, Hindustan Times

December 20, 2018

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एक 15 वर्षीय दृष्टिहीन लड़की ने 17 दिसंबर को मुंबई लोकल ट्रेन पर उसके साथ छेड़छाड़ कर रहे एक आदमी को धर दबोचा। आरोपी विशाल बालराम सिंह को अगले स्टेशन पर पहुंचने के तुरंत बाद ही गिरफ्तार कर लिया गया। यह कोई सामान्य गिरफ्तारी हीं थी। कराटे और आत्मरक्षा में प्रशिक्षित किशोरी ने अपने साथ छेड़छाड़ करने वाले का हाथ पकड़ लिया। उसने इतनी कुशलतापूर्वक मोलेस्टर के हाथों को मोड़ा कि वह घुटनों पर बैठ गया।

क्या हुआ था ?

टाइम्स नाउ न्यूज की एक रिपोर्ट के अनुसार, सरकारी रेलवे पुलिस (जीआरपी) के अधिकारियों ने कहा कि लड़की अपने पिता के साथ अपने घर लौट रही थी। दोनों ने रात 8:15 बजे कल्याण से दादर की फास्ट ट्रेन में प्रवेश किया था। लड़की और उसके पिता, जो 56 वर्षीय हैं, दिव्यांगों के लिए आरक्षित डिब्बे में चढ़े। 24 वर्षीय सिंह भी उसी डब्बे में चढ़ गया।

प्रसाद पांधारे, जो (दादर) जीआरपी के एक वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक हैं, ने कहा कि वह व्यक्ति लड़की के पीछे खड़ा हो गया था। उसने उसे गलत तरह से छुआ। उसकी मंशा समझ कर भी, लड़की डरी नहीं थी। इसके बजाए, लड़की ने उसका हाथ इस तरह से घुमाया कि वह चिल्लाने लगा। इससे सभी यात्रियों का ध्यान उसकी तरफ़ चला गया।

लड़की ने फिर अपने पिता को सिंह द्वारा उसे छेड़े जाने के बारे बताया|  हिंदुस्तान टाइम्स से बात करते हुए, पांधारे ने कहा, “जब तक ट्रेन अगले स्टेशन, माटुंगा पहुंची, लड़की ने सिंह को कस के पकड़े रखा”

अधिकारी उस तकनीक से प्रभावित थे जिसका इस्तेमाल कर लड़की ने खुद को बचाने के लिए किया था। उन्होंने यह भी कहा कि अगर लड़की ने सिंह की ऊँगली को थोड़ी और ज़ोर से पकड़ा होता तो सिंह की उंगली टूट गई होती। अधिकारी ने बताया कि घटना ने उस लड़की को डराया नहीं है बल्कि उसने साहसपूर्वक पुलिस को गिरफ्तार करने के लिए कहा था।

जैसे ही ट्रेन माटुंगा स्टेशन पहुंची, पिता ने जीआरपी अधिकारियों को बुलाया, जो उस वक़्त ड्यूटी पर थे। उन्होंने सिंह को अधिकारियों को सौंप दिया। दादर जीआरपी ने तीन आरोपों पर सिंह को गिरफ्तार किया। उन्हें दिव्यांग यात्री के डिब्बे में यात्रा करने, टिकट के बिना यात्रा करने और छेड़छाड़ के लिए गिरफ्तार किया गया।

सिंह, जो एक निजी कंपनी के लिए काम करता है, पेशे से कंप्यूटर टेक्नीशियन है, उसे दो दिनों तक पुलिस हिरासत में रखा गया। वह मुलुंड क्षेत्र का रहना वाला है। लड़की ने कहा कि उसके स्कूल में आत्म-रक्षा और कराटे सिखाये जाते हैं जो कि उनको विकलांगता के बावजूद दुनिया का सामना करने के लिए तैयार करता है। उन्होंने यह भी बताया कि उनके जैसे लड़कियां ऐसी घटनाओं का आसान लक्ष्य बन जाती हैं।

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