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मणिपुर सरकार की बुराई करने पर पत्रकार को दी गयी एक साल की सजा

तर्कसंगत

Image Credits: Wangkhemcha Wangthoi, Facebook

December 21, 2018

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मणिपुर के एक पत्रकार किशोरचंद्र वांगखेमचा को पिछले महीने बीजेपी की अगुवाई वाली मणिपुर सरकार पर अपमानजनक टिप्पणियों के लिए हिरासत में लिया गया| उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (एनएसए) के तहत 12 महीने की लंबी हिरासत की सजा सुनाई गई है। यह इस अधिनियम के तहत दी जाने वाली सजा की सबसे अधिकतम अवधि है|

द न्यू इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार 11 दिसंबर को एनएसए के सलाहकार बोर्ड ने राज्य सरकार द्वारा पत्रकार के खिलाफ लाए गए आरोपों को देखा और 13 दिसंबर को समिति ने फैसला किया कि पत्रकार को 12 महीने तक हिरासत में लिया जाना चाहिए। सरकार के आदेश को पढ़ते हुए 39 वर्षीय पत्रकार को शुरुआत में 27 नवंबर को हिरासत में लिया गया था, सरकार के आदेश के अनुसार यह कहा गया था कि उनके द्वारा राज्य की सुरक्षा के खतरे के पूर्वाग्रह को देखते हुए और सार्वजनिक परिवेश की शांति भंग होने के खतरे को देखते हुए गिरफ्तार किया जाए।

 

पृष्ठभूमि

वायर के अनुसार इम्फाल के निवासी किशोरचंद्र, टेलीविज़न एंकर और रिपोर्टर हैं, जिन्होनें भाजपा की अगुआई वाली राज्य सरकार की आलोचना करते हुए सोशल मीडिया पर एक वीडियो अपलोड किया था| उन्होंने राज्य के मुख्यमंत्री बिरेन सिंह को अंग्रेजों के खिलाफ झांसी की लड़ाई और मणिपुर की स्वतंत्रता आंदोलन के बीच तुलना करने के लिए भी निंदा की थी| उन्होंने मुख्यमंत्री सिंह पर नाराज़ होते हुए उन्हें “मोदी और हिंदुत्व की कठपुतली” कह कर सम्बोधित किया और लक्ष्मीबाई की जयंती मनाने के लिए 19 नवंबर को आयोजित एक समारोह की भी आलोचना की|

उन्होंने मीटी (भाषा) में बीजेपी और आरएसएस की भी निंदा की और पार्टी की विचारधाराओं की निंदा करते हुए आरएसएस के खिलाफ गलत भाषा का इस्तेमाल किया। इसके अलावा, उन्होंने राज्य सरकार को उन्हें  गिरफ्तार करने की चुनौती भी दी।

 

Voice Against CM of Manipur

Wangkhemcha Wangthoi from Manipur abuses the Chief Minister of Manipur and expresses his anger on the decision of Government of Manipur to commemorate the birth anniversary of Lakshmibai, the Rani of Jhansi. He says that the Rani did nothing for Manipur and should not celebrate the birth anniversary. Have some forgotten the valour of our freedom fighters? Have some failed to realize the fact that they are still Indians and availing tax-payers money through central grants and aids? Please watch the full video and comment your views.#Manipur #CMBirenSingh #BJP

Posted by Observers on Monday, 19 November 2018

 

रिपोर्ट के अनुसार, उन्हें राजद्रोह के आरोप में गिरफ्तार किया गया था, लेकिन स्थानीय अदालत के समक्ष पेश किए जाने पर उन्हें जमानत पर रिहा कर दिया गया। अदालत ने कहा कि उन्होनें जिस भाषा का इस्तेमाल किया था वह गलत नहीं थी बल्कि यह “आम भाषा में सार्वजनिक व्यक्ति के सार्वजनिक आचरण के खिलाफ राय की अभिव्यक्ति” थी।

हालांकि, उन्हें फिर से गिरफ्तार कर लिया गया और एनएसए के तहत हिरासत में लिया गया और तब से, उन्हें मणिपुर के बाहरी इलाके में स्थित केंद्रीय जेल में रखा गया है। इसके अलावा, उन्हें वीडियो अपलोड करने के लिए, जिस समाचार चैनल आईएसटीवी में वह काम कर रहे थे उसके द्वारा निकाल दिया गया है। इसके अलावा, चैनल के संपादक ने मुख्यमंत्री से माफ़ी भी मांगी है।

 

आदेश पर पुनर्विचार करने के लिए पत्नी का अनुरोध

किशोरचंद्र की पत्नी रंजीता एलांगबान ने राज्य सरकार से आदेश की समीक्षा करने का अनुरोध किया है। “हमने दो दिन पहले आदेश पर पुनर्विचार करने के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय से अपील की है और प्रतिक्रिया का इंतजार कर रहे हैं। उम्मीद है कि जवाब एक या दो दिन में आ जाना चाहिए” उन्होनें कहा। उन्होंने यह भी कहा कि नियमों के अनुसार वह 15 दिनों के बाद ही अपने पति से मिल सकेंगी। सजा सुनाये जाने के बाद किशोरचंद्र अपने परिवार से नहीं मिले हैं।

 

हिरासत के खिलाफ विरोध

रिपोर्ट के अनुसार, मणिपुर स्टूडेंट एसोसिएशन और मणिपुर मुस्लिम एसोसिएशन ऑफ दिल्ली के कार्यकर्ताओं ने दिल्ली में मणिपुर भवन के सामने हिरासत के आदेश के खिलाफ एक विरोध प्रदर्शन किया। दिल्ली पुलिस ने विरोध करने वाले 35 छात्रों को गिरफ्तार किया।

रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय पत्रकार संघ और प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया किशोरचंद्र की हिरासत का विरोध कर रहे हैं और उनकी रिहाई की मांग कर रहे हैं।

 

तर्कसंगत का तर्क

एक मजबूत लोकतंत्र के मूल में प्रेस की आज़ादी निहित है। भाषण की स्वतंत्रता लोगों का मौलिक अधिकार है, जिसके बिना कोई विकास नहीं हो सकता है। निर्वाचित अधिकारियों को जांच में रखने के लिए, सरकार को सतर्क करने के लिए एक स्वतंत्र प्रेस जरूरी है, और उन्हें याद दिलाने के लिए कि आखिरकार, वे लोगों का जवाब देने के लिए ज़िम्मेदार हैं। किशोरचंद्र वांगखेमचा की गिरफ्तारी एक बुरी मिसाल है। हालांकि उनकी भाषा असहज हो सकती है, उनकी अस्वीकृति व्यक्त करना भारत के नागरिक के रूप में उनका मौलिक अधिकार है। कई सारे देश हैं जो अपने प्रेस को परेशान करते हुए और पत्रकारों को बाँध कर रखते हैं, यह जरूरी है कि हम ऐसे रास्ते पर न चलें जहाँ से वापस आना  मुश्किल हो।

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