मेरी कहानी

मेरी कहानी: यह वादा है कि हम दोनों साथ हैं और आगे भी साथ रहेंगे

तर्कसंगत

सोर्स: ह्यूमन्स ऑफ़ बॉम्बे

December 21, 2018

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“5 साल पहले, मेरी एक दोस्त ने सोशल मीडिया के पेज पर, अपनी  समलैंगिकता से जुड़ी चुनौतियों के बारे में बातें साझा कीं। मैंने उसे उसी पेज पर जवाब दिया कि, ‘तुम अकेली नहीं हो …’
इसके बाद जो हुआ उसने मेरी ज़िन्दगी को बदल दिया – शुब ने मेरी टिप्पणी देखी, मुझे फेसबुक पर ढूंढा और मुझसे मिलने की इच्छा ज़ाहिर की!

पहले तो हमारे बीच धीरे धीरे बातें शुरू हुईं, वह रात के समय केवल 10 मिनट के लिए भी मुझसे अगर बात कर लेती तो मुझे बहुत ख़ुशी होती| हम दोनों में से कोई भी पहले किसी लड़की के साथ इस तरह के रिश्ते में नहीं थे, हम दोनों ने तय किया कि हमें इस रिश्ते को थोड़ा और वक़्त देना चाहिए|

कुछ समय बाद हम शुब के कॉलेज के पास की एक झील पर मिले और 2 घंटे हम दोनों साथ रहे, जैसे हमने सोचा था हमारा समय उससे कहीं अच्छा गुज़रा, शुब ने मुझसे कहा की वह मुझे पसंद करती है, मैं भी इस बात से ना नहीं कर सकती थी और न ही उसे दोष दे सकती थी|

उस पहली डेट के बाद हम और भी कई बार डेट पर मिले, हम लोग एक समबन्ध में जुड़ चुके थे, अगले 6 महीने में हमने एक दूसरे के प्रति अपने प्यार को ज़ाहिर किया|  मैं उससे मिल कर काफी खुश थी, मुझे उसकी उस सच्चाई से प्यार था जो केवल मैं जानती थी| सारे शोर शराबे के बीच हमें अपनी ज़िन्दगी सही लग रही थी और सच्ची लग रही थी|

लेकिन यह सब कुछ आसान नहीं है – जब भी हम एक दूसरे का हाथ पकड़ते हैं, तो लोग हमें अजीब और घृणा भरी नज़रों से देखते हैं, हमारे बारे लोग अपनी तरह से अपनी राय बना लेते हैं|

यहां तक कि हमारे दोस्तों ने हमें चेतावनी दी कि हम अगर अपने इस रिश्ते को सफल नहीं कर पाए तो उसके बाद हम क्या करेंगे यह भी सोच लेना चाहिए, हमने इस तरह से कुछ दोस्त भी खो दिए| हमने शुब की बिल्डिंग में कुछ पड़ोस की औरतों को यह कहते भी सुना की ” इन्हें कोई शर्म नहीं है, ये दोनों कोई मर्द क्यों नहीं खोज लेती?

हम घर खरीदने के लिए साथ में लोन के लिए आवेदन भी नहीं कर सकते क्योंकि हम विवाहित नहीं हैं, और यह साबित करने का कोई तरीका नहीं है कि हमारा रिश्ता वैध है। मुझे यह नहीं मालूम कि – हमारा प्यार कैसे अलग है? यह अलग क्यों होना चाहिए?

इन सब के बावज़ूद हम दोनों अपने रिश्ते के लिए मिलकर खड़े रहे|  जब हमने अपने परिवार में यह बात बताई तो सभी तो इस बात से दिक्कत हुई, मगर शुक्र है कि किसी ने भी उसमें कोई आपत्ति नहीं जताई| शुब की माँ मेरी सबसे अच्छ दोस्त बन गयी हैं, उन्होनें मुझे एक माँ का पूरा प्यार दिया है, मगर मेरी माँ के लिए अभी तक इस बात को मानने में कि “मैं लेस्बियन हूँ ” दिक्कत हो रही है, लेकिन हम एक बार में  हर एक कदम सोच समझ कर उठा रहे हैं, और सेक्शन 377 पास हो जाने के बाद हम खुद को दोषी जैसा महसूस नहीं कर रहे हैं|

जब यह हुआ तो मैं अपने ऑफिस में एक मीटिंग में बैठी थी कि तब किसी ने मुझे मैसेज किया और मैं ख़ुशी से चिल्ला उठी! हम जैसे भी थे मगर अब हम स्वतंत्र थे। हमने घर पर इस फैसले की ख़ुशी में एक छोटी सी पार्टी की। इस साल, मैंने उसे एक सगाई की अंगूठी दी है, यह एक वादा है कि जब तक एलजीबीटी विवाह के लिए संघर्ष जारी है और उम्मीद है कि वह दिन भी जल्द आएगा हम दोनों साथ हैं और रहेंगे। अब कोई भी कानून मुझे उसे अपनी पत्नी बुलाने से नहीं रोक सकता; मेरा परिवार और हमारा प्यार अपनी जीत दर्ज़ कर चुका है।”

“5 years ago, a friend of mine came out on a confession page, and was talking about her challenges. I replied saying,…

Posted by Humans of Bombay on Saturday, 15 December 2018

 

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