मेरी कहानी

मेरी कहानी: मैं अपने बेटे के शव के लिए दूसरे सैनिक की जान खतरे में नहीं डाल सकती थी

तर्कसंगत

Image Credits: Rachna Bisht

December 22, 2018

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मैं आज सुबह कारगिल के शहीद और वीर चक्र से सम्मानित कैप्टन हनीफ उद्दीन की माँ से मिली और तब समझी कि कैप्टेन हनीफ को इतनी हिम्मत कहाँ से मिली? एक शास्त्रीय गायिका, श्रीमती हेमा अजीज ने हनीफ के पिता के निधन के बाद हनीफ को सिंगल मदर की तरह पाला था। हनीफ के पिता की मृत्यु तब हुई जब हनीफ कक्षा 8 में थे। उनकी माँ ने हनीफ की शहादत के बाद उन्हें मिल रहे पेट्रोल पंप को लेने से इनकार कर दिया था, ठीक वैसे ही जैसे उन्होनें हनीफ को स्कूल में मिल रहे मुफ्त यूनिफार्म लेने से मन कर दिया था क्यूँकि उनके पिता नहीं थे। उन्होनें हनीफ से कहा “अपने शिक्षक से कहो कि मेरी माँ काफी कमाती है और मेरी यूनिफार्म खरीद सकती है”। उन्होनें कहा कि हनीफ एक सैनिक था और अपने राष्ट्र के प्रति अपना कर्तव्य निभा रहा था। उन्होनें यह उम्मीद नहीं की थी कि वह अपनी जान बचाने के लिए पीछे मुड़ेगा। 25 साल की उम्र में कैप्टन हनीफ उद्दीन की मृत्यु तुरतुक में कई गोली लगने से हुई थी। सेना उनके शरीर को 40 दिनों से ज्यादा समय में भी वापस नहीं ला पायी थी। जब तत्कालीन सेना प्रमुख जनरल वी.पी. मलिक ने उनकी माँ को बताया कि शव को नहीं लाया जा सकता क्योंकि दुश्मन लगातार गोलीबारी कर रहा था, श्रीमती हेमा अजीज ने उनसे कहा कि वह नहीं चाहती कि एक और सैनिक उनके बेटे के शरीर को लाने के लिए अपनी जान जोखिम में डाले।

 

I met Kargil martyr Capt Haneef Uddin VrC ‘s mother this morning and understood where his courage came from. A classical…

Posted by Rachna Bisht on Friday, 14 December 2018

 

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